अफीम की खेती वाले गांव में BJP नेता की दहशत:जमीन-तालाब-कुआं में कब्जा, लाश ले जाने परमिशन लेते थे ग्रामीण; गूगल ने खोला राज

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दुर्ग जिले का समोदा गांव….जहां पिछले 5 साल से भाजपा नेता विनायक ताम्रकार अफीम की खेती कर रहे थे। लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। एक दिन गांव के बच्चों के हाथ अजीब सा कुछ पौधा लगा। गूगल में सर्च करने पर पता चला कि यह अफीम है। बस फिर यही से पूरे गांव में हल्ला मच गया। 6 मार्च 2026 को मामला सामने आया। खुलासा होने के बाद अब ग्रामीण अलग-अलग तरह के आरोप लगा रहे हैं। गांव की महिलाएं बताती है कि भाजपा नेता विनायक का इतना दहशत है कि “गांव में अगर किसी की मौत हो जाती है, तो श्मशान ले जाने के लिए भी दाऊ जी (विनायक ताम्रकार) की परमिशन लेनी पड़ती है। जब तक वे नहीं कहते, तब तक लाश को अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जाता। यहां तक कि गांव के सरकारी शौचालय पर भी उनका कब्जा है, बिना उनकी मर्जी के हम वहां तक नहीं जा सकते। इस रिपोर्ट में जानिए अफीम के खुलासे और गांव में भाजपा नेता के दहशत से जुड़ी दिलचस्प कहानी… अफीम के खुलासे की कहानी भी दिलचस्प इसी समोदा गांव में ही अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया है, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बीजेपी नेता विनायक ताम्रकार को गिरफ्तार किया है और करीब 8 करोड़ कीमत के पौधे जप्त किए हैं। इस खुलासे की कहानी भी अपने आप में काफी दिलचस्प है। दैनिक भास्कर की टींम पहुंची समोदा गांव जब इस पूरे मामले का खुलासा हुआ और दैनिक भास्कर की टीम समोदा गांव पहुंची, तो गांव का माहौल पूरी तरह बदला हुआ था। महिलाएं समूह बनाकर विनायक ताम्रकार के खिलाफ नारे लगाते हुए विरोध के लिए निकल पड़ी थीं। उसी दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी अफीम की खेती वाली जगह का जायजा लेने पहुंचे। गुस्साए ग्रामीणों और पुलिस के बीच बहस इतनी बढ़ी कि मौके पर धक्का-मुक्की तक की नौबत आ गई। अब जानिए गांव वालों ने क्या कहा… फार्महाउस के चारों ओर लगे थे गेट गांव के त्रिलोचन निषाद कहते हैं कि फार्महाउस के चारों ओर गेट लगाए गए थे, जिससे आम लोगों का अंदर जाना लगभग असंभव था। उसी की आड़ में अफीम उगाई जा रही थी। गांव के लोगों ने कभी अफीम देखा ही नहीं था। ऊपर से विनायक ताम्रकार की पाबंदियों के कारण कोई उसके खेतों की तरफ जाता भी नहीं था। त्रिलोचन बताते हैं, “दाऊ जी यानी विनायक ताम्रकार का इतना डर था कि लोग उस तरफ जाने की हिम्मत नहीं करते थे। इसी वजह से इतने बड़े इलाके में अफीम की खेती हो रही थी और गांव को इसकी भनक तक नहीं लगी।” कुएं और तालाब तक पर भी कब्जा गांव के रहने वाले रिगेश देशमुख ने वह पुराना कुआं भी दिखाया, जिसका इस्तेमाल कभी पूरे गांव के लोग पानी के लिए करते थे। रिगेश का कहना है कि कई सालों तक यही कुआं गांव के लिए पानी का मुख्य स्रोत रहा, लेकिन बाद में इस पर भी विनायक ताम्रकार ने कब्जा कर लिया। ग्रामीणों का आरोप है कि सिर्फ कुआं ही नहीं, बल्कि आसपास के तालाब और वहां तक जाने वाली सड़क पर भी ताम्रकार का दबदबा रहा। गांव वालों का कहना है कि इन जगहों का इस्तेमाल करने में भी उन्हें धमकाकर रोक दिया जाता है। लीज पर ली गई जमीन पर हो रही थी खेती पुलिस पूछताछ में गिरफ्तार आरोपी विकास विश्नोई ने बताया कि जिस जमीन पर अफीम के पौधे मिले हैं, वह जमीन राजस्थान के जोधपुर निवासी आचल दास ने लीज पर ली हुई थी। पुलिस के अनुसार आचल दास होली मनाने के लिए अपने गृहग्राम गया हुआ है। जांच में सामने आया है कि विकास विश्नोई पिछले करीब 4 साल से समोदा गांव में रह रहा है। वह विनायक ताम्रकार की लगभग 13 एकड़ जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहा था, जहां कपास की फसल लगाई जाती थी। पुलिस अब इस मामले में आचल दास समेत अन्य संभावित लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। ………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… 4 साल से 5 एकड़ में अफीम की खेती: दुर्ग फार्महाउस में तैनात रहते थे बाउंसर्स; भाजपा नेता ने डिजिटल सर्वे में गेहूं-मक्का दिखाया छत्तीसगढ़ के दुर्ग में पुलिस ने अफीम की खेती करते हुए भाजपा नेता विनायक ताम्रकर (पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष दुर्ग) सहित 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। ग्राम समोदा और झेनझरी के बीच स्थित फार्महाउस से करीब 5 एकड़ 62 डिसमिल क्षेत्र में लगे अफीम के पौधे जब्त किए गए हैं। खेत से करीब 14 लाख 30 हजार पौधे बरामद किए गए हैं। पढ़ें पूरी खबर

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