अबूझमाड़ की पहचान लंबे समय तक बंदूक, बारूदी रास्तों और डर से रही। जिन पगडंडियों पर कभी हथियारबंद दस्तों की आवाजाही थी, वहीं शनिवार को जाटलूर गांव में हाट की रौनक दिखी। सब्ज़ियों की टोकरी, वनोपज के ढेर, बच्चों की हंसी और सौदेबाज़ी की आवाज़ें। यह बदलाव अचानक नहीं आया। चलिए आपको पूरी खबर विस्तार से बताते हैं।
