अमेरिका ने रूसी झंडे वाला तेल टैंकर मैरिनेरा को उत्तरी अटलांटिक में जब्त कर लिया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना इसी सप्ताह हुई है। अमेरिका इस जहाज का पीछा दो हफ्तों से कर रहा था। कहा जा रहा है कि यह जहाज वेनेजुएला से तेल ले जाने के लिए जा रहा था, ताकि उसे चीन या दूसरे देशों को पहुंचाया जा सके। रूस ने अपने जहाज की सुरक्षा के लिए सबमरीन और अन्य नौसैनिक जहाज भेजे थे, लेकिन वे इसे बचाने में सफल नहीं हो पाए। पिछले महीने जहाज ने नाम बदला था अमेरिका ने जिस जहाज को पकड़ा है, पहले इसका नाम बेला-1 था। अमेरिका ने इसे प्रतिबंधित जहाजों की लिस्ट में डाल दिया था। दिसंबर 2025 में यह वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की। उस समय जहाज के क्रू मेंबर की होशियारी से यह जहाज बच गया था। इसके बाद इस जहाज का नाम बदलकर ‘मैरिनेरा’ कर दिया गया था। इसके बाद इस पर रूसी झंडा लगाकर इसे देश की ऑफिशियल रजिस्ट्रेशन लिस्ट में शामिल कर दिया गया। इसके बाद यह जहाज वेनेजुएला की ओर जा रहा था, लेकिन अमेरिकी ब्लॉक के डर से उसने रास्ता बदलकर अटलांटिक की ओर मोड़ लिया था। लेकिन अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश इस जहाज की निगरानी कर रहे थे। हवाई और समुद्री निगरानी के जरिए इसके हर कदम पर नजर रखी गई। जब अमेरिकी बलों ने आखिरकार जहाज को बोर्ड किया, तब कोई रूसी नौसैनिक जहाज पास में नहीं था, जिससे संभावित टकराव टल गया। जहाज के पकड़े जाने का वीडियो… अमेरिका प्रतिबंधों की वजह से तेल नहीं खरीद पा रहे देश दरअसल, दिसंबर 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो की सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए ‘शैडो फ्लीट’ पर ब्लॉकेड लगाया था। ताकि वे अमेरिका की शर्तें मानें और तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों को जगह दें। वेनेजुएला पर अमेरिकी प्रतिबंध की वजह से कई टैंकर सीधे तेल नहीं ले जा पा रहे थे। इसलिए वेनेजुएला और उसके ग्राहक (जैसे चीन) ‘शैडो फ्लीट’ का इस्तेमाल कर रहे थे। ‘शैडो फ्लीट’ का मतलब है ऐसे जहाज जो अपने असली स्थान और पहचान को छिपाकर तेल ले जाते हैं। ये टैंकर अपने ट्रांस्पॉन्डर बंद कर देते हैं या झंडा बदल देते हैं ताकि अमेरिका या दूसरे देश उन्हें ट्रैक न कर सकें। इसे ‘डार्क मोड’ भी कहा जाता है।
