20 जनवरी 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति बने डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को अपने कार्यकाल के 6 महीने पूरे कर लिए। चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने वादा किया था कि वे गाजा और यूक्रेन युद्ध को ‘24 घंटे में खत्म’ करा देंगे। लेकिन अब तक न तो रूस-यूक्रेन युद्ध थमा है और न ही गाजा पट्टी में इजराइल-हमास संघर्ष। यूक्रेन में अब भी लड़ाई जारी है, जबकि गाजा में अभी तक 58 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद पहले छह महीनों में ट्रम्प का मुख्य फोकस वैश्विक व्यापार नीति पर रहा। उन्होंने चीन पर 60% टैरिफ, वियतनाम पर 25%, और यूरोपीय कारों पर 40% टैक्स लगाया। इसके जवाब में चीन और यूरोपीय संघ ने भी जवाबी कर लगाए हैं। घरेलू मोर्चे पर ट्रम्प ने प्रवासी नियंत्रण को लेकर सख्ती बरती है। पिछले 3 महीनों में अमेरिका-मेक्सिको सीमा पर हजारों लोगों को वापस भेजा गया है। अब ट्रम्प ने यूक्रेन युद्ध को लेकर अपना रुख बदला है। यूक्रेन का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रम्प के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में दोनों युद्धों को लेकर कोई सार्थक नतीजे आ सकते हैं। यूक्रेन युद्ध: 50 दिन की डेडलाइन 2 सितंबर को खत्म ट्रम्प ने रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के लिए आक्रामक कूटनीतिक और आर्थिक रणनीतियां अपनाने का संकेत दिया है। ट्रम्प ने रूस पर 100% सेकेंडरी टैरिफ लगाने की धमकी दी है, यदि 50 दिनों के भीतर शांति समझौता नहीं हुआ। यह डेडलाइन 2 सितंबर को खत्म होगी,उसके बाद सख्ती की तैयारी है। ट्रम्प ने यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम जैसे हथियारों की आपूर्ति का वादा किया है, इसका खर्च यूरोपीय देश उठाएंगे। साथ ही, ट्रम्प ने नाटो देशों से रक्षा खर्च को जीडीपी का 5% करने का दबाव किया है, ताकि यूक्रेन को समर्थन मिले। अभी तक यूक्रेन पर ट्रम्प की नीतियां अस्थिर रही हैं, लेकिन इस बार वे आक्रामक हैं। गाजा युद्ध: हमास को 60 दिन के सीजफायर का प्रस्ताव राष्ट्रपति ट्रम्प ने गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए अगले 6 महीनों में इजराइल और हमास पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। ट्रम्प ने इजराइल को 60-दिन का युद्धविराम प्रस्तावित किया और हमास को चेतावनी दी कि इसे स्वीकार न करने पर ‘गंभीर परिणाम’ भुगतने होंगे। हमास ने इजराइली सेना के गाजा खाली करने की मांग की, जबकि इजराइल इस शर्त पर राजी नहीं है। ट्रम्प ने इजराइल को 33,400 करोड़ रुपए की सैन्य सहायता का वादा किया है। साथ ही, सऊदी अरब और कतर से गाजा पुनर्निर्माण के लिए 83,500 करोड़ रु. के निवेश की मांग की। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प की रणनीति आंशिक युद्धविराम तक सीमित रह सकती है। ट्रम्प 2.0: 22 साल बाद अमेरिका सीधे युद्ध में उतरा, ईरान पर हमला दुनिया पर असर: टैरिफ वॉर से कई देशों की मुसीबतें बढ़ीं टैरिफ वॉर: जनवरी 2025 में ट्रम्प ने सभी देशों पर 10% आधारभूत टैरिफ लागू किया। चीन, भारत, यूरोप पर अलग-अलग दरों पर भारी टैरिफ लगाए। ईरान पर सैन्य कार्रवाई: जून में ट्रम्प ने इजराइल के साथ मिलकर ईरान की परमाणु साइट्स पर हमले किए। 22 साल बाद अमेरिका युद्ध में उतरा। रूस वार्ता और दबाव: रूस से तेल या गैस खरीदने वाले देशों पर 100% सेकेंडरी टैरिफ की धमकी दी। इससे भारत भी प्रभावित हो सकता है। अमेरिका पर असर: कई विभागों की फंडिंग बंद की बिग ब्यूटीफुल बिल: 12.45 लाख करोड़ की रक्षा फंडिंग स्वीकृत हुई। इसमें मेडिकेड और गरीबों के लिए योजनाओं में भयंकर कटौती की गई। कैंपस क्रैकडाउन: कोलंबिया, ऑक्सफोर्ड और अन्य विवि पर कार्रवाई तेज। डिपोर्टेशन: रोज 3,000 प्रवासियों की गिरफ्तारी, बॉर्डर क्रॉसिंग में भारी कमी। शिक्षा और डीआईए पर हमले: ट्रम्प ने शिक्षा विभाग में 1,400 कर्मचारियों की छंटनी की। डीआईए कार्यक्रमों की 18,260 करोड़ रु. की फंडिंग बंद की। खर्च नियंत्रण: DOGE विभाग बना, टकराव के बाद मस्क ने साथ छोड़ा। भारत पर असर: 1500 से ज्यादा भारतीय डिपोर्ट किए भारत पर टैरिफ: भारत पर बेसलाइन टैरिफ (10%) से निर्यात पर असर पड़ा है। स्मार्टफोन, बासमती और फॉर्मा सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित हुए। भारतीयों का डिपोर्टेशन: जनवरी से अब तक 1,563 भारतीय डिपोर्ट हुए। इसमें से 333 भारतीयों को 3 सैन्य विमानों से फरवरी 2025 में डिपोर्ट किया। वीजा सख्ती का असर: वित्तवर्ष 2026 के लिए भारत समेत दुनियाभर के देशों से एच‑1बी में 3.58 लाख आवेदन आए। यह पिछले वर्ष से 27% कम है।
