बॉलीवुड सिंगर अरिजीत सिंह ने प्लेबैक सिंगिंग छोड़ने का ऐलान कर दिया। उन्होंने इंस्टाग्राम पोस्ट पर यह जानकारी दी। अरिजीत ने लिखा- हैलो, सबको नया साल मुबारक, इतने सालों तक प्यार देने के लिए धन्यवाद। मैं खुशी से बताना चाहता हूं कि अब प्लेबैक वोकलिस्ट के तौर पर कोई नए असाइनमेंट्स नहीं लूंगा। इसे यहीं खत्म कर रहा हूं। ये सफर शानदार रहा। भगवान ने बहुत दया की। उन्होंने साफ किया कि म्यूजिक बंद नहीं करेंगे। आगे छोटे आर्टिस्ट के तौर पर सीखते रहेंगे। कुछ पेंडिंग कमिटमेंट्स पूरे करेंगे। 2026 में कुछ रिलीज हो सकती हैं। अरिजीत ने कहा, “मैं अच्छे म्यूजिक का फैन हूं। अपना काम जारी रखूंगा।” अरिजीत की फिल्म साउंडट्रैक्स ने उन्हें स्टार बनाया। ये फैसला उनके करियर में नया मोड़ लाएगा। फैंस और इंडस्ट्री वाले उनकी विरासत को याद कर रहे हैं। अब वे इंडिपेंडेंट म्यूजिक पर फोकस करेंगे। भारतीय संगीत जगत में अगर किसी एक आवाज ने पिछले एक दशक में सबसे गहरी छाप छोड़ी है, तो वह है अर्जित सिंह। उनकी गायकी में दर्द, मोहब्बत, सादगी और सच्चाई का ऐसा मेल है जिसने उन्हें हर उम्र के श्रोताओं का पसंदीदा बना दिया। लेकिन यह सफलता अचानक नहीं मिली, इसके पीछे वर्षों का संघर्ष और निरंतर मेहनत छुपी है। अर्जित सिंह का जन्म 25 अप्रैल 1987 को पश्चिम बंगाल के जीयागंज में हुआ। संगीत उन्हें विरासत में मिला। मां शास्त्रीय गायिका थीं और मौसी तबला वादक। कम उम्र में ही उन्होंने शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेनी शुरू कर दी। साल 2005 में उन्होंने रियलिटी शो ‘फेम गुरुकुल’ में हिस्सा लिया। हालांकि वे शो जीत नहीं पाए, लेकिन इस मंच ने उन्हें इंडस्ट्री की वास्तविकता समझने और खुद को निखारने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने बतौर म्यूजिक प्रोग्रामर और बैकग्राउंड सिंगर काम किया, जो उनके करियर का एक अहम लेकिन कम चर्चित हिस्सा रहा। ‘आशिकी 2’ में मिला बड़ा मौका 2013 में आई फिल्म ‘आशिकी 2’ का गाना “तुम ही हो” अर्जित सिंह के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस एक गाने ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया। उनकी भावनात्मक आवाज सीधे दिल को छू गई और वे हर म्यूजिक डायरेक्टर की पहली पसंद बन गए। इसके बाद “चाहूं मैं या ना”, “रब्ता”, “अगर तुम साथ हो”, “गेरुआ” और “ऐ दिल है मुश्किल” जैसे सुपरहिट गानों ने उनके करियर ग्राफ को तेजी से ऊपर पहुंचा दिया। 2014 से 2019 तक का समय अर्जित सिंह के करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है। वे एक साल में दर्जनों हिट गाने देने लगे। हिंदी के साथ-साथ उन्होंने बंगाली, तमिल, तेलुगु, मराठी और कन्नड़ भाषाओं में भी गाने गाए। हाल के वर्षों में अर्जित सिंह ने चुनिंदा प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया है। वे अब केवल लोकप्रियता नहीं, बल्कि संगीत की गुणवत्ता और भावनात्मक गहराई को प्राथमिकता देते हैं। साथ ही वे नए कलाकारों को मौका देने और म्यूजिक कंपोज़िशन में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
