कॉलेज प्रबंधन ने इस जमीन का व्यावसायिक उपयोग करने की अनुमति लेने के लिए नगर तथा ग्राम निवेश विभाग में आवेदन किया था। इसी प्रक्रिया के दौरान नजूल भूमि से संबंधित आपत्तियां सामने आईं और प्रशासन ने जांच शुरू की। जांच में जमीन को सरकारी नजूल पाया गया, जिसके बाद कलेक्टर की कोर्ट में धारा 182 के तहत सुनवाई की गई।
