शासकीय अस्पतालों में संवेदनशील मामलों के प्रति लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। इंदौर के एमटीएच अस्पताल में रेप पीड़िता को प्रसव के बाद अपने नवजात को पाने के लिए पांच दिनों तक संघर्ष करना पड़ा। नियमों की गलत समझ, विभागीय समन्वय की कमी और स्टाफ की असंवेदनशीलता ने पीड़िता की परेशानी बढ़ा दी, जिससे अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
