एक्ट्रेस के घर से लापता हुए कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर:हत्या कर 300 टुकड़े किए, कातिलों ने लाश के सामने बनाए शारीरिक संबंध

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भास्कर की नई सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स के केस-2 में जानिए कहानी, फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने कास्टिंग डायरेक्टर नीरज ग्रोवर की, जिनकी एक्ट्रेस ने हत्या की और फिर लाश के सामने बॉयफ्रेंड से शारीरिक संबंध बनाए। नीरज की लाश के 300 टुकड़े किए गए थे। मई 2008 की बात है उस दौर की सबसे मशहूर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा के पास अमरनाथ ग्रोवर का कॉल आया। उन्होंने घबराती हुई आवाज में कहा, ‘जिग्ना जी, मैं अमरनाथ बोल रहा हूं, मेरा बच्चा गुम हो गया है, क्या आप इस पर स्टोरी करेंगी?’ जिग्ना जो बड़े-बड़े केस की रिपोर्टिंग करती थीं, उनके लिए ये कोई बड़ी बात नहीं थी। उन्होंने जवाब दिया- ‘सर, ऐसे कई बच्चे गुम हो जाते हैं, लेकिन हम सब पर स्टोरी थोड़ी कर सकते।’ अमरनाथ ग्रोवर ने दबाव देकर कहा, ‘नहीं, ये केस कुछ अलग है।’ अमरनाथ ने बताया कि उनके बेटे का नाम नीरज ग्रोवर है। वो एक मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर हैं। उन्होंने शाहरुख खान के शो ‘क्या आप पांचवी पास से तेज हैं’ और ‘कहानी हमारे महाभारत की’, जैसे कई शोज में कास्टिंग की है। वो एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स में काम करते हैं। जिग्ना को इस केस में कोई दिलचस्पी नहीं हुई। उन्होंने कॉल कटते ही बात नजरअंदाज कर दी। कुछ दिनों बाद पता चला कि अमरनाथ ग्रोवर मुंबई के लोखंडवाला मार्केट में घूम-घूमकर बेटे की गुमशुदगी के पोस्टर चिपका रहे हैं। बेटे की जानकारी देने पर उन्होंने एक लाख रुपए नकद इनाम भी रखा। उन्हें उम्मीद थी कि कुछ दिनों बाद ही सही, लेकिन उनका बेटा जरूर मिलेगा। कुछ दिन बीते लेकिन नीरज की कोई खबर नहीं मिली। उन्होंने फिर क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा को कॉल किया। इस बार उनकी आवाज में डर और घबराहट थोड़ी ज्यादा थी। उन्होंने स्टोरी करने का दबाव बनाया तो जिग्ना मान गईं। जिग्ना वोरा ने जिस एक्ट्रेस का जिक्र किया, उनका नाम है मारिया सुसईराज। ये वही मारिया हैं, जिन्होंने खुद 7 मई 2008 की शाम, नीरज के कजिन निशांत ग्रोवर, दोस्त निशांत लाल के साथ उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करवाई थी। शिकायत के अनुसार, नीरज हर रोज सुबह अपनी मां नीलम ग्रोवर से कॉल पर बात करते थे। 7 मई की सुबह नीरज ने कॉल नहीं किया, मां ने जब कॉल किया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया। कुछ देर बाद जब बार-बार कॉल करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो मां ने निशांत को कॉल किया। निशांत, नीरज के कजिन थे, जो उनके साथ ही चार बंग्ला रोड के अपार्टमेंट में रहते थे। उन्होंने भी नीरज को कॉल किए, लेकिन जवाब नहीं मिला। उन्होंने अगला कॉल नीरज के सबसे करीबी दोस्त निशांत लाल को किया, जवाब उनके पास भी नहीं था। लेकिन वो जानते थे कि नीरज पिछली रात अपनी करीबी दोस्त मारिया सुसईराज से मिलने गए थे। पिछले कुछ दिनों से नीरज और मारिया अक्सर साथ समय बिताते थे। मारिया कन्नड़ एक्ट्रेस थीं। वो कुछ दिनों पहले ही हिंदी फिल्मों और टीवी शोज में काम ढूंढने के लिए मुंबई आई थीं। नीरज एकता कपूर के प्रोडक्शन हाउस बालाजी टेलीफिल्म्स में कास्टिंग का काम करते थे। एक ऑडिशन में उनकी मारिया से मुलाकात हुई और दोनों दोस्त बन गए। उस समय नीरज, मारिया को टीवी शो में काम दिलवाने में मदद कर रहे थे। नीरज हर रोज दोस्तों के साथ कॉफी कैफे डे जाते थे। 29 अप्रैल 2008 को नीरज ने वहीं मारिया से दोस्तों की मुलाकात करवाई, जिसके बाद मारिया हर रोज उनके साथ वहां आने लगी थीं। 6 मई 2008 को नीरज रोज की तरह कॉफी कैफे डे नहीं पहुंचे। दोस्तों ने कुछ देर इंतजार किया और फिर नीरज को कॉल मिलाया, जवाब मिला- ‘मारिया ने नया घर किराए पर लिया है, मैं शिफ्टिंग में उसकी मदद करवाने उसके घर आया हूं।’ दोस्तों ने आने की जिद की, लेकिन नीरज नहीं माने। उनकी निशा नाम की दोस्त ने मारिया से कहा कि वो भी नीरज के साथ आएं, लेकिन दोनों ही घर की शिफ्टिंग में व्यस्त थे। इसके बाद से ही निशांत लाल की नीरज से कोई बात नहीं हुई। दरअसल, मारिया को ऑडिशन के सिलसिले में अक्सर मुंबई आना पड़ता था। तो उन्होंने 6 मई को मुंबई के मलाड में धीरज सोलिटियर बिल्डिंग की चौथी मंजिल का फ्लैट नंबर 201 किराए पर लिया था। निशांत लाल, नीरज की खबर लेने मारिया को कॉल करते, उससे पहले ही सुबह करीब 11 बजे उनके पास नीरज के नंबर से कॉल आया। कॉल मारिया ने किया था। मारिया ने निशांत से कहा, ‘नीरज जल्दबाजी में मेरे घर पर ही अपना मोबाइल छोड़कर चला गया।’ निशांत ने पूछा वो कब निकला, तो जवाब मिला- ‘वो तो देर रात करीब डेढ़ बजे ही निकल गया। जल्दबाजी में था तो फोन भूल गया।’ निशांत ने फिर पूछा- ‘लेकिन वो गया कहां?’ मारिया ने कहा- ‘उसने कहा वो निशा के पास जा रहा है, उनकी कोई पार्टी थी।’ कॉल कटते ही निशांत लाल ने नीरज के कजिन को ये बात बताई। सुबह से शाम हो गई, लेकिन नीरज की कोई खबर नहीं मिली, न वो लौटे। घरवालों, कजिन और दोस्तों की चिंता बढ़ने लगी। रात करीब साढ़े 10 बजे निशांत लाल ने फिर मारिया को कॉल किया और कहा- ‘नीरज अब तक नहीं मिला। हम सब उनकी मिसिंग कंप्लेंट लिखवाने जा रहे हैं। उसका फोन दे दो।’ निशांत, मारिया की बिल्डिंग के नीचे पहुंचे और नीरज का फोन लिया। उनके कहने पर मारिया भी उनके साथ मलाड पुलिस स्टेशन पहुंचीं और शिकायत लिखवाई। नीरज ग्रोवर की गुमशूदगी जो संदिग्ध बनी….. बेटे की गुमशूदगी से परेशान नीरज के पिता अमरनाथ ग्रोवर भी कानपुर से मुंबई आ गए। उन्होंने मलाड पुलिस स्टेशन में नीरज की किडनैपिंग की शिकायत दर्ज करवाई। दो शिकायतें दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी। सभी दोस्तों से पूछताछ करने के बाद मलाड पुलिस ने नीरज के कॉल रिकॉर्डस खंगालना शुरू किए। नीरज ने 6 मई 2008 की रात करीब साढ़े 10 बजे मारिया को कॉल किया था। अगले दिन 7 मई की सुबह उनके नंबर पर कई कॉल आए, जो रिसीव नहीं हुए। साढ़े 11 बजे उनके नंबर से दोस्त निशांत लाल को कॉल गया, जो शिकायत के मुताबिक मारिया ने किया था। इसके अलावा उनके कॉल से कुछ 8 कॉल्स के जवाब दिए गए। 7 मई की शाम को नीरज के नंबर पर एक कॉल आया, जिसे चंद सेकेंड के लिए रिसीव कर कट कर दिया। उस कॉल की लोकेशन मारिया के घर की नहीं थी, जबकि मारिया के अनुसार, नीरज उनके घर पर फोन छोड़कर गए थे। पुलिस ने अब मारिया को पूछताछ के लिए बुलाया। मारिया ने बयान दिया कि 7 मई को उनका बॉयफ्रेंड जेरॉम मैथ्यू उनसे मिलने आया था, वो उनके साथ शॉपिंग पर गई थीं। जेरॉम नेवी में लेफ्टिनेंट थे। वो मारिया के शहर मैसूर के रहने वाले थे और उनकी मारिया से सगाई हुई थी। दोनों जल्द शादी करने वाले थे। 2008 में उनकी पोस्टिंग कोचीन में थी। अब जेरॉम को पूछताछ के लिए बुलाया गया। जेरॉम ने कहा कि वो 7 मई को नेवी की ट्रेनिंग के लिए मुंबई पहुंचे थे। दोनों ने मुंबई के इनॉर्बिट मॉल में मिलने का प्लान बनाया था। वो 10 बजे सीधे मॉल पहुंचे और 12 बजे मारिया से मिले। पुलिस ने जब उनसे पूछा कि क्या वो जानते हैं कि नीरज, मारिया के फ्लैट पर थे और फिर गुमशुदा हो गए। जवाब में जेरॉम ने कहा कि वो नीरज को जानते हैं, वो मारिया के दोस्त हैं। लेकिन ये भी कहा कि वो सोलिटियर बिल्डिंग गए ही नहीं। वो सीधे मॉल ही गए और वहां से लिंक रोड स्थित होटल गए, जहां उन्होंने रूम लिया था। अगले दिन वो अंकल से मिले और फिर कोचीन निकल गए। पुलिस ने पूछताछ के बाद दोनों को छोड़ दिया, लेकिन उन्हें दोनों के बयान संदिग्ध लग रहे थे। पुलिस जांच के लिए मारिया के घर भी गई, लेकिन कुछ नहीं मिला। अब दोनों के कॉल रिकॉर्ड्स निकाले गए, जो बेहद अटपटे थे। रिकॉर्ड्स के अनुसार, दोनों के बीच 8 मई के बाद महज एक हफ्ते में एक हजार कॉल्स हुए। जबकि इससे पहले दोनों दिन भर में 3-4 बार ही बात करते थे। शक होने पर मलाड पुलिस ने धीरज सोलिटियर बिल्डिंग में पूछताछ की। बिल्डिंग में दो गार्ड्स रहते थे, एक नाइट शिफ्ट में और दूसरा, सुबह 8 से शाम के 8 बजे तक। दोपहर की शिफ्ट वाले गार्ड ने पुलिस को बताया कि 7 मई की दोपहर करीब 12 बजे मारिया बिल्डिंग से निकलीं और कुछ शॉपिंग कर लौटीं। यही मारिया ने भी बयान में कहा था, लेकिन जो आगे गार्ड ने कहा वो कुछ अलग था। गार्ड के अनुसार, शाम को करीब 4 बजे वो टी ब्रेक पर गए थे। करीब 5 मिनट बाद ही वो लौटे तो देखा, बिल्डिंग के नीचे एक ग्रे सेंट्रो कार खड़ी है। वो कार बिल्डिंग के किसी शख्स की नहीं थी। कुछ देर बार मारिया, भारी-भरकम पॉलीथिन बैग्स लेकर कार में रखने लगीं। 3-4 बैग्स रखे के बाद, वो दोबारा ऊपर गईं और इस बार वो एक बड़ा बैग लेकर आईं। उस बैग को एक तरफ से मारिया ने पकड़ रखा था और दूसरी तरफ एक नौजवान 24-25 साल का हट्टा-कट्टा लड़का बैग पकड़ा हुआ था। दोनों ने बैग आगे की सीट पर रखा। मारिया ड्राइविंग सीट पर बैठी और लड़का पीछे वाली सीट पर। दोनों निकल गए और देर रात साढ़े 9 बजे लौटे। पुलिस को लगा कि कहीं वो शख्स नीरज तो नहीं, क्योंकि उनकी उम्र भी महज 26 साल थी। लेकिन जब तस्वीर दिखाई गई तो कन्फर्म हुआ कि वो शख्स नीरज नहीं बल्कि जेरॉम मैथ्यू था। सुबह वाले गार्ड ने भी जेरॉम की बिल्डिंग में मौजूदगी कन्फर्म की। उस गार्ड ने मई 2008 में ही ड्यूटी जॉइन की थी, वो बिल्डिंग में ज्यादा किसी से परिचित नहीं था। उसने बताया कि सुबह करीब साढ़े 7 बजे एक लड़का बिल्डिंग में दाखिल हो रहा था। गार्ड ने उसे रोका और पूछा- ‘कहां जाना है?’ जवाब मिला- ‘फ्लैट नंबर 201।’ गार्ड ने फिर कहा- ‘अपना नाम, नंबर और फ्लैट नंबर रजिस्टर में लिख दें।’ इस पर लड़के ने कहा- ‘फ्लैट नंबर 201 में मेरे रिश्तेदार हैं, जल्द ही मिलकर निकल जाऊंगा।’ वो शख्स जेरॉम था। मारिया के पड़ोस में रहने वालीं मयूरी प्रजापति से भी पुलिस ने पूछताछ की। मयूरी ने पुलिस को बताया कि 6 मई 2008 को ही मारिया बिल्डिंग में रहने आई थीं। उससे पहले दिसंबर 2007 में भी वो कुछ दिनों के लिए उसी फ्लैट में रह चुकी थीं। तब उनके बॉयफ्रेंड जेरॉम भी साथ थे। 6 मई को जब मारिया बिल्डिंग में आईं, तो उनके बाथरूम में कुछ दिक्कत थी। वो नहाने के लिए मयूरी के घर गईं। जब वो घर से निकलीं तो देखा कि उनके फ्लैट के बाहर एक नौजवान लड़का खड़ा था। वो वहां मारिया का इंतजार कर रहा था। मारिया उसे देखकर कुछ हैरान लग रही थीं, जैसे वो बिना इत्तला दिए आए हों। मारिया ने मयूरी का परिचय उस शख्स से करवाया, जो नीरज ग्रोवर थे। मयूरी ने बताया कि 7 मई को काम पर निकलने से पहले वो मारिया के दरवाजे तक गईं। तब उनके साथ उनके बॉयफ्रेंड थे। पहला लड़का वहां नहीं था। उस समय उनके घर में पुताई चल रही थी, तो मयूरी बिना बात किए ही वहां से चली गईं। मारिया को फिर पूछताछ के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि जेरॉम उनसे मिलने आए थे, फिर वो शॉपिंग के लिए निकले। जब पूछा गया कि कार किसकी थी, तो मारिया ने कहा कि जेरॉम ने नेवी ऑफिसर से कार ली थी, शॉपिंग के लिए। ये बयान भी झूठ था। मारिया ने जिस शख्स का नाम लिया, उसने पुलिस पूछताछ में कहा कि उसने मारिया को कार नहीं दी, बल्कि एक रोज मारिया ने कॉल कर मदद मांगी और कहा कि अगर पुलिस पूछे तो झूठ कहना कि कार उनकी थी। मारिया के सामने सभी सबूत पेश किए गए। इस बार मारिया ने बताया कि ये कार उनके दोस्त किरण श्रेयम की थी, उन्होंने निजी कारणों से झूठ कहा। अब किरण श्रेयम से पूछताछ हुई। उनके बयान के अनुसार, 7 मई की दोपहर को मारिया ने उनसे कॉल कर कार मांगी। उन्होंने कहा था कि जेरॉम आए हैं, उन्हें अपने रिश्तेदार के घर जाना है। दोपहर करीब 3 बजे मारिया और जेरॉम कार लेने अंधेरी के चार बंग्लो पहुंचे, कार की चाबियां लीं। रात 9 बजे तक मारिया ने कार नहीं लौटाई, तो किरण ने उन्हें कॉल किया। जवाब मिला- ‘मेरा दोस्त नीरज मिल नहीं रहा है, हम उसकी शिकायत करने पुलिस स्टेशन जा रहे हैं।’ ये वही तारीख थी, जिस दिन मारिया, नीरज के दोस्तों के साथ उनकी गुमशुदगी की शिकायत लिखवाने गई थीं। अगली सुबह यानी 8 मई 2008 को मारिया उन्हें कार लौटाने आई थीं। बिल्डिंग में जेरॉम की मौजूदगी, मारिया का नीरज का मोबाइल मुंबई से कई किलोमीटर दूर ले जाना, उनके और जेरॉम के बीच 1000 कॉल्स होना और बार-बार गलत बयानों ने मारिया पर पुलिस का शक गहरा कर दिया। 20 मई को मारिया को कस्टडी में लिया गया। इस बार उनके साथ सख्ती की गई। मारिया पहले तो बार-बार अलग-अलग कहानियां सुनाने लगीं, लेकिन फिर वो टूट गईं। मारिया ने जो कहानी सुनाई वो सुनकर हर कोई हैरान रह गया। मारिया ने कहा- ‘जेरॉम ने नीरज को मार दिया। उसने लाश के सामने ही मेरा रेप किया और फिर लाश के टुकड़े कर दिए।’ नीरज की गुमशुदगी का मामला अब हत्या में तब्दील हो चुका था। मारिया को अब पुलिस के कई सवालों के जवाब देने थे। पहला सवाल- नीरज को क्यों और कैसे मारा? दूसरा सवाल- नीरज की लाश कहां हैं? तीसरा सवाल- क्या वाकई जेरॉम मैथ्यू ने नीरज का कत्ल किया या मारिया फिर कोई कहानी बना रही हैं? इन सभी सवालों के जवाब जानिए नीरज ग्रोवर हत्याकांड के पार्ट- 2 में, कल 28 जनवरी को, दैनिक भास्कर एप पर। ………………………………………………………. लाश के सामने एक्ट्रेस ने बनाए शारीरिक संबंध: मॉल से खरीदी चाकू, लाश के टुकड़े थैलियों में भरकर जंगल में जलाए, जानिए कैसे हुए हत्याकांड का खुलासा (नोटः ये खबर नीरज ग्रोवर हत्याकांड की चार्जशीट, क्राइम रिपोर्टर जिग्ना वोरा ,एक्टर रजा मुराद से बातचीत और दैनिक भास्कर की सीनियर रिपोर्टर वर्षा राय की रिसर्च के आधार पर लिखी गई है। ) लेखक- ईफत कुरैशी रिपोर्टर- वर्षा राय ……………………………… सीरीज बॉलीवुड क्राइम फाइल्स का केस-1 भी पढ़िए- पार्ट-1, फार्महाउस गया एक्ट्रेस का परिवार अचानक हुआ लापता: एक साल बाद खुदाई में सड़ते मिले 6 कंकाल, आतंकी बम ब्लास्ट से हुआ हत्याकांड का खुलासा छुट्टी मनाने पूरा परिवार साथ जा रहा था। हंसी-खेल का माहौल था, सबने फार्महाउस में होने वाले मनोरंजन, गानों और कुछ न कुछ करने का पहले से मन बना रखा था। घर के 7 लोग, लैला, लैला की मां सेलिना, बहनें जारा, आफरीन (अजमीना), कजिन रेशमा और भाई इमरान और सौतेले पिता परवेज टाक 2 गाड़ियों में भरकर फार्महाउस के लिए रवाना हुए। पूरी खबर पढ़िए… पार्ट-2, जमीन खोदकर निकाले गए एक्ट्रेस के परिवार के 6 कंकाल: एक साल पहले कुत्ते के साथ दफनाया, कातिल तसल्ली होने तक सिर कुचलता रहा लैला खान छुट्टी मनाने फार्महाउस गईं और अचानक लापता हो गईं। जांच में सामने आया कि सिर्फ लैला ही नहीं, उनके परिवार के 6 और लोग लापता हैं। एक साल तक लैला की कोई खबर नहीं मिली और फिर कश्मीर में एक बम ब्लास्ट हुआ, उस जगह के पास ही लैला की मां के नाम पर रजिस्टर्ड कार मिली। जांच में एक्ट्रेस लैला खान के सौतेले पिता परवेज टाक की गिरफ्तारी हुई। परवेज जांच टीम को फार्महाउस ले गया, जहां एक-एक कर 6 कंकाल बरामद किए गए। इनमें परिवार के पालतू कुत्ते का भी कंकाल था। 10 जुलाई 2012 को परवेज टाक को सदर्न मुंबई किला कोर्ट में पेश कर क्राइम ब्रांच ने कस्टडी ली। मामला गंभीर था, तो जांच टीम सख्ती करने से नहीं चूकी। हाथ-पैर बांधकर परवेज टाक को तबीयत से पीटा गया, जिसके बाद उसकी निशानदेही पर फार्महाउस से कंकाल निकाले गए। इससे पहले ही उसने फरवरी 2011 की रात की पूरी कहानी सुना दी थी। पूरी खबर पढ़िए…

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