कनाडाई पीएम बोले- लोग स्वदेशी सामान खरीदें:ट्रम्प की 100% टैरिफ धमकी के बाद कहा- हमारी अर्थव्यवस्था पर बाहरी खतरा

0
2

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ट्रम्प की टैरिफ धमकी के बाद देशवासियों से स्वदेशी सामान खरीदने की अपील की है। कार्नी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि कनाडा की अर्थव्यवस्था पर इस वक्त बाहरी खतरा है, इसलिए जो हमारे नियंत्रण में है, उसी पर ध्यान देना होगा। कार्नी का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कनाडा को चीन के साथ व्यापार समझौते करने पर कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर कनाडा ने चीन के साथ व्यापारिक रिश्ते बढ़ाए, तो अमेरिका कनाडाई सामान पर 100 फीसदी टैरिफ लगाएगा। उन्होंने कहा, ट्रम्प ने कनाडाई पीएम को गवर्नर कार्नी कहा ट्रम्प ने शनिवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कनाडाई प्रधानमंत्री को ‘गवर्नर कार्नी’ कहा। उन्होंने लिखा कि अगर कार्नी कनाडा को चीन के लिए अमेरिका में सामान भेजने का ‘ड्रॉप ऑफ पोर्ट’ बनाना चाहते हैं, तो यह गलतफहमी है। ट्रम्प ने आगे कहा कि चीन कनाडा के कारोबार, सामाजिक ढांचे और जीवनशैली को पूरी तरह नष्ट कर देगा। इससे पहले शुक्रवार को भी ट्रम्प ने कहा था कि चीन, कनाडा को एक साल के अंदर ही खा जाएगा। दरअसल, कनाडा के PM मार्क कार्नी ट्रम्प के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। ट्रम्प इससे नाराज हो गए हैं। अमेरिका-कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर अमेरिका और कनाडा दुनिया के उन गिने-चुने देशों में हैं, जो एक-दूसरे के सबसे बड़े ट्रेड पार्टनर हैं। अमेरिका की सरकारी ट्रेड बॉडी USTR के मुताबिक दोनों देशों के बीच हर दिन औसतन 2 अरब डॉलर से ज्यादा का व्यापार होता है। अमेरिका को मिलने वाला कच्चा तेल, गैस और बिजली का बड़ा हिस्सा कनाडा से आता है। इसके अलावा ऑटो पार्ट्स, लकड़ी और कृषि उत्पाद भी अमेरिका में कनाडा से बड़े पैमाने पर जाते हैं। कनाडा अपने कुल निर्यात का बड़ा हिस्सा अमेरिका को भेजता है। मशीनरी, टेक्नोलॉजी, दवाइयां और उपभोक्ता सामान के मामले में कनाडा अमेरिका पर काफी हद तक निर्भर है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से रिश्ते गहरे हुए अमेरिका और कनाडा बीच गहरे व्यापारिक रिश्तों की नींव 1989 में पड़ी, जब पहला फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हुआ। 1994 में NAFTA लागू होने के बाद यह रिश्ता और मजबूत हुआ। इससे ऑटो, कृषि और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की सप्लाई चेन अमेरिका-कनाडा सीमा के आर-पार जुड़ गई। 2020 में NAFTA की जगह USMCA लागू किया गया। इस समझौते के तहत ज्यादातर सामान बिना टैरिफ के आयात-निर्यात होता है और ट्रेड को ज्यादा नियमबद्ध बनाया गया। अमेरिका और कनाडा की कई फैक्ट्रियां एक ही प्रोडक्ट पर साथ-साथ काम करती हैं। उदाहरण के तौर पर एक कार का इंजन अमेरिका में बनता है, उसके पार्ट्स कनाडा में फिट होते हैं और फिर वह गाड़ी दोबारा अमेरिका लौटती है। ट्रम्प कनाडा और चीन के बीच समझौते से नाराज कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 13 जनवरी से 17 जनवरी तक चीन की यात्रा की और वहां व्यापार समझौते किए। रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रम्प इससे नाराज बताए जा रहे हैं। करीब एक साल पहले कार्नी खुद चीन को कनाडा के सामने “सबसे बड़ा सुरक्षा खतरा” बता चुके थे, लेकिन एक साल बाद हालात बदल चुके हैं। चीन दौरे पर उन्होंने कई अहम करार किए हैं। इसमें कनाडा, चीन की इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EV) पर लगाए गए टैरिफ को कम करेगा। कनाडा ने 2024 में अमेरिका के साथ मिलकर चीनी गाड़ियों पर 100% टैरिफ लगाया था। अब नए समझौते के तहत इस टैरिफ को घटाकर 6.1% किया जा रहा है। हालांकि यह हर साल 49 हजार इलेक्ट्रिक गाड़ियों पर लागू होगा। 5 साल में इसे बढ़ाकर 70 हजार तक किया जा सकता है। इसके बदले में चीन, कनाडा के कुछ अहम कृषि उत्पादों पर लगाए गए जवाबी टैरिफ को घटाएगा। पहले यह टैरिफ 84% तक था, जिसे अब घटाकर 15% कर दिया गया है। साल के अंत तक इसे जीरो किया जा सकता है। कार्नी के भाषण से नाराज हुए ट्रम्प कनाडाई पीएम ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम पर ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ पर भाषण दिया था। इसे लंबे समय से किसी भी राजनेता के दिए गए सर्वश्रेष्ठ भाषणों में से एक बताया जा रहा है। कार्नी ने बड़े देशों के दबदबे के खिलाफ अपनी राय रखी। उन्होंने कहा- हमें बार-बार याद दिलाया जाता है कि आज की दुनिया बड़ी ताकतों की आपसी होड़ का दौर है। जो नियमों पर चलने वाली अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था थी, वह अब कमजोर पड़ रही है। ताकतवर देश वही करते हैं जो वे करना चाहते हैं, और छोटे या कमजोर देशों को उसे झेलना पड़ता है। कार्नी आगे कहते हैं कि नियम आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की जो कहानी सुनाई जाती रही है, वह पूरी तरह सच नहीं थी। जब बड़े देशों को फायदा होता है, तो वे खुद के लिए नियमों से छूट ले लेते हैं। व्यापार के नियम सब पर बराबर लागू नहीं होते। वे कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय कानून भी सख्ती से इस बात पर निर्भर करता है कि मामले में आरोपी कौन है और पीड़ित कौन। उन्होंने कहा कि महाशक्तियां अकेले चलने का जोखिम उठा सकती हैं। उनके पास बड़ा बाजार होता है, मजबूत सेना होती है और शर्तें तय करने की ताकत भी होती है। लेकिन कमजोर देशों के पास ये चीजें नहीं होतीं। जब ऐसे देश किसी बहुत ताकतवर देश से आमने-सामने बातचीत करते हैं, तो वे कमजोर स्थिति में होते हैं। इसलिए उन्हें वही मानना पड़ता है, जो सामने वाला देश देने को तैयार होता है। पहले भी आमने-सामने आ चुके ट्रम्प-कार्नी मार्क कार्नी और डोनाल्ड ट्रम्प के बीच बढ़ता तनाव नया नहीं है। पहले भी दोनों नेता कई मुद्दों पर आमने-सामने आ चुके हैं। पिछले हफ्ते ग्रीनलैंड को लेकर कार्नी ने ट्रम्प को खुली चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड के भविष्य का फैसला अमेरिका नहीं कर सकता और यह अधिकार केवल ग्रीनलैंड और डेनमार्क का है। कार्नी ने उस समय अमेरिका समेत नाटो के सभी सहयोगी देशों से अपनी जिम्मेदारियों का सम्मान करने की अपील की थी और साफ किया था कि कनाडा डेनमार्क की संप्रभुता के साथ खड़ा है। कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाना चाहते हैं ट्रम्प ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। कार्नी ने पिछले साल मई में ट्रम्प से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इस दौरान कार्नी ने ट्रम्प से साफ शब्दों में कहा था कि कनाडा बिकाऊ नहीं है। दरअसल, बैठक के दौरान ट्रम्प ने कहा था कि अगर कनाडा अमेरिका में शामिल होता है तो वहां के लोगों को कम टैक्स, बेहतर सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। इस पर कार्नी ने ट्रम्प को जवाब देते हुए कहा कि जैसे रियल एस्टेट में कुछ जगहें कभी बिक्री के लिए नहीं होतीं, वैसे ही कनाडा भी कभी बिकाऊ नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस इमारत में वे बैठे हैं या बकिंघम पैलेस जैसी जगहें कभी नहीं बेची जातीं, उसी तरह कनाडा भी न कभी बिकेगा और न कभी बेचा जाएगा। कार्नी ने यह भी कहा था कि कनाडावासियों की सोच इस मुद्दे पर नहीं बदलेगी और कनाडा कभी अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेगा।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here