एक ऐसी डायरेक्टर, जिसकी फिल्में भले ज्यादा शोर नहीं करतीं, लेकिन गहरा असर छोड़ जाती हैं। उनकी फिल्मों में ग्लैमर भले कम हो, लेकिन भावनाओं की गहराई हमेशा मौजूद रहती है। उनके किरदारों के चेहरे पर चमक न सही, पर उनकी आंखों में संघर्ष और दिल में उम्मीद साफ झलकती है। जी हां, हम बात कर रहे हैं किरण राव की, जो उन फिल्ममेकर्स में से हैं, जो सिनेमा को सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को समझने और दिखाने का जरिया मानते हैं। आज किरण राव के जन्मदिन पर, आइए उनकी जिंदगी और करियर को करीब से जानते हैं। किरण राव का जन्म बेंगलुरु में हुआ था, लेकिन उनका बचपन कोलकाता में बीता। किरण के फैमिली बैकग्राउंड की बात करें, तो लोग अक्सर उन्हें तेलंगाना की रॉयल फैमिली से जोड़ते हैं। हालांकि लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में किरण ने बताया था कि उनका सीधा संबंध रॉयल फैमिली से नहीं है। तेलंगाना से उनका कनेक्शन उनके दादा की बहन के जरिए है, जिनकी शादी वनपर्थी के राजा जे. रामेश्वर राव से हुई थी। किरण खुद को कर्नाटक और कोलकाता दोनों की मिली-जुली सांस्कृतिक पहचान मानती हैं। वहीं, एक्ट्रेस अदिति राव हैदरी उनकी कजिन हैं। किरण की मां उमा राव एक स्कूल टीचर थीं, जबकि उनके पिता सी.आर. राव, गेस्ट कीन एंड विलियम्स नाम की ब्रिटिश आयरन-स्टील कंपनी में मार्केटिंग का काम करते थे। किरण ने अपनी स्कूलिंग कोलकाता के लोरेटो हाउस और फिर ला मार्टिनियर फॉर गर्ल्स से की। इसके बाद वे मुंबई के सोफिया कॉलेज में आर्ट्स की पढ़ाई करने गईं। आगे उन्होंने दिल्ली की जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर किया है। जामिया से मास कम्युनिकेशन में मास्टर करने के बाद किरण ने फिल्म इंडस्ट्री में काम करने के लिए मुंबई का रुख किया। उनकी पहली फिल्म आशुतोष गोवारिकर की ‘लगान’ थी। जिसमें उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर की भूमिका निभाई थी। फिल्म ‘लगान’ की सफलता सिर्फ आशुतोष गोवारिकर और आमिर खान के विजन की कहानी नहीं है, बल्कि उस टीम के जज्बे की भी है, जिसने छह महीनों तक रेगिस्तान जैसी कठोर परिस्थितियों में मेहनत की। उस टीम की सबसे मेहनती सदस्यों में एक किरण राव भी थीं। 2001 में ‘लगान’ की शूटिंग गुजरात के भुज के कुनरिया गांव में हुई थी। तापमान कभी माइनस में गिरता, तो कभी 48 डिग्री तक पहुंच जाता था। किरण राव का काम सभी कलाकारों को मेकअप, हेयरस्टाइल, कपड़ों से लेकर सेट तक लाना था। किरण रोज सुबह 4 से 4:30 बजे तक सेट पर पहुंच जाती थीं ताकि शूटिंग सही तरीके से शुरू हो सके। यहां तक कि कई बार उन्हें सेट पर एक्टर्स के लिए कॉफी लाने के भी कहा जाता था। ‘लगान’ की शूटिंग को लेकर द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, “सेट पर पहुंचने से पहले मैं वॉकी-टॉकी पर टोस्टर चालू करने के लिए कहती रहती थी। फिल्म में ‘एलिजाबेथ’ का रोल निभाने वाली एक्ट्रेस रचेल शेली सुबह सबसे पहले टोस्ट चाहती थीं।” हाल ही में दैनिक भास्कर के साथ बातचीत में एक्टर अखिलेंद्र मिश्रा ने बताया, “फिल्म ‘लगान’ के चीफ असिस्टेंट डायरेक्टर अपूर्व लाखिया थे। अपूर्व ने हॉलीवुड फिल्मों ‘द आइस स्टॉर्म’ और ‘ए परफेक्ट मर्डर’ में भी असिस्टेंट के रूप में काम किया था। आमिर खान उन्हें इंडिया लेकर आए थे। अपूर्व ने फिर ‘लगान’ की टीम में तीन और असिस्टेंट डायरेक्टर्स रीमा कागती, प्रियंवदा नारायणन और किरण राव को शामिल किया।” अखिलेंद्र मिश्रा के अनुसार, “आजकल प्रोडक्शन का मतलब सिर्फ चीजों को मैनेज करना होता है, लेकिन ‘लगान’ के सेट पर काम एक अलग ही लेवल पर होता था। किरण राव का काम महज कॉलशीट थमाना नहीं था। वे सुनिश्चित करती थीं कि हर एक्टर, खासकर एक्ट्रेसेस, समय पर तैयार हों, उन्हें नाश्ता मिले और वे सेट पर सही समय पर पहुंचें।” सेट पर अनुशासन का आलम यह था कि अगर कोई कलाकार तैयार होकर सेट पर घूमने निकल जाए, तो किरण और उनकी टीम साफ हिदायत देती थी- “आप अलाउड नहीं हैं। अपने कमरे या मेकअप रूम में इंतजार कीजिए।” अखिलेंद्र मिश्रा ने बताया कि इस फिल्म की सफलता का बड़ा श्रेय अपूर्व लाखिया और उनकी टीम किरण, रीमा और प्रिया को जाता है। इन तीनों का काम देखकर हम सभी एक्टर्स उनके फैन थे। अखिलेंद्र मिश्रा ने आगे बताया कि गांव में रोजाना की शूटिंग में करीब 1 हजार लोगों की भीड़ होती थी और क्लाइमेक्स सीन में यह संख्या 10 हजार तक पहुंच गई थी। उन हजारों लोगों के कपड़ों, उनकी कन्टीन्यूटी, यहां तक कि उनकी बकरियों तक की कन्टीन्यूटी बनाए रखना किरण और उनकी टीम ने सब कुछ बखूबी संभाला। ‘लगान’ के बाद किरण राव ने आशुतोष गोवारिकर की फिल्म स्वदेश और मीरा नायर की फिल्म ‘मानसून वेडिंग’ में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम किया था। डायरेक्टर के तौर पर पहली फिल्म एक दशक तक सीख, समझ और अनुभव के बाद किरण ने अपनी पहली फिल्म बतौर डायरेक्टर ‘धोबी घाट’ बनाई थी। फिल्म की बात करें तो यह फिल्म मुंबई शहर, अकेलेपन, सपनों और रिश्तों की नर्म परतों के बारे में थी। ‘धोबी घाट’ का वर्ल्ड प्रीमियर सितंबर 2010 में टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में हुआ था और यह 21 जनवरी 2011 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। 5 करोड़ रुपए की लागत में बनी इस फिल्म ने दुनिया भर में 25 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था। फिल्म की क्रिटिक्स ने भी तारीफ की थी। इस फिल्म को 65वें ब्रिटिश अकादमी फिल्म अवॉर्ड्स में बेस्ट नॉन-इंग्लिश लैंग्वेज फिल्म कैटेगरी में लिस्टेड किया गया था। फिल्म ‘धोबी घाट’ में काम करने वाले एक्टर दानिश हुसैन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि यह फिल्म उनके लिए सिर्फ एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि किरण राव के विजन और डायरेक्शन की पाठशाला थी। दानिश के अनुसार, किरण राव ने शूटिंग के हर पहलू में शानदार बैंलेंस बनाए रखा। उन्होंने कहा, “वो कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करतीं, लेकिन सेट पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत होती थी। उन्हें पता होता था कि फिल्म को कहां ले जाना है।” दानिश बताया कि जब उन्होंने ‘धोबी घाट’ में काम किया, तब वे सिनेमा की दुनिया में बिल्कुल नए थे। उस वक्त उन्हें स्क्रीन एक्टिंग की समझ बहुत कम थी, वाइड शॉट्स में कैसे एक्ट करना चाहिए, कैमरे के सामने कितनी ऊर्जा रखनी चाहिए, ये सब वो सीख ही रहे थे। शूटिंग के दौरान कई बार वे कन्फ्यूज हो जाते थे, लेकिन किरण राव का रवैया बेहद सपोर्टिव था। दानिश कहते हैं, “किरण समझ गई थीं कि मेरा टेक्निकल सेंस थोड़ा कमजोर है। वे अक्सर कहती थीं, ‘टेंशन मत लो, बस एक्टिंग पर ध्यान दो।’ उनके ये शब्द मुझे तुरंत सहज कर देते थे। मेरा आत्मविश्वास वहीं से बढ़ने लगा।” दानिश बताते हैं कि हाल ही में जब उन्होंने ‘धोबी घाट’ को 14 साल बाद फिर से देखा, तो वे खुद अपनी परफॉर्मेंस देखकर चकित रह गए। उन्होंने कहा, “फिल्म में मेरा जो बंबइया लहजा था, वो असल में किरण राव की तैयारी और उनके निर्देशन से आया था।” आमिर खान और किरण राव का रिश्ता आमिर खान और किरण राव का रिश्ता एक प्रोफेशनल सहयोग से शुरू होकर फ्रेंडशिप, लव और मैरिज तक पहुंचा। समय के साथ यह रिश्ता परिपक्वता और आपसी सम्मान का उदाहरण बन गया। दोनों की पहली मुलाकात 2000 में फिल्म लगान के सेट पर हुई थी। उस समय आमिर फिल्म के लीड एक्टर और प्रोड्यूसर थे, जबकि किरण असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर रही थीं। हालांकि उस दौरान दोनों का कोई खास रिश्ता नहीं था। वो अच्छे दोस्त भी नहीं थे। बस यूनिट के लोगों की तरह किरण को आमिर जानते थे। 2002 में आमिर और उनकी पहली पत्नी रीना का तलाक हुआ था। इसके बाद उनकी और किरण की बातचीत शुरू हुई। आमिर उस वक्त अपनी शादी टूटने से काफी सदमे में थे। एक बार किरण ने उन्हें फोन लगाया और दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बात चली थी। यह फोन कॉल खत्म हुई तब आमिर को महसूस हुआ कि वे काफी खुश हैं। किरण से बात करने के बाद उनको सुकून महसूस हो रहा था। यहां से दोनों के रिलेशनशिप ने सीरियस मोड़ लिया था। धीरे-धीरे बातचीत के बाद उन्होंने डेटिंग शुरू की और शादी से पहले करीब डेढ़ साल तक दोनों साथ रहे थे। साल 2005 में आमिर और किरण ने मुंबई में सिविल मैरिज की थी। शादी के बाद मुंबई के पंचगनी में 3 दिन का सेलिब्रेशन हुआ था और महेरबाई हाउस नाम के पुराने पारसी बंगले में उनकी शादी का रिसेप्शन हुआ था। जिसमें बॉलीवुड के कई बड़े स्टार्स दोनों को बधाई देने पहुंचे थे। किरण को मां बनने में दिक्कत हो रही थी, इसलिए उन्होंने सरोगेसी का फैसला लिया। इसके बाद उनके बेटे आजाद का जन्म हुआ। वहीं, ANI से बातचीत में किरण राव ने बताया था कि जब उन्होंने अपने माता-पिता को आमिर खान से शादी करने के फैसले के बारे में बताया, तो वे चौंक गए थे। किरण ने कहा, “वो सच में हैरान रह गए थे। उनकी नजर में मैं बहुत संभावनाओं वाली लड़की थी जो जिंदगी में बहुत कुछ करना चाहती थी। उन्हें डर था कि कहीं आमिर जैसी बड़ी शख्सियत के आगे मैं खो न जाऊं, मेरी अपनी पहचान दब न जाए।” आमिर की इतनी बड़ी शोहरत के बीच किरण को भी कई बार उस दबाव का एहसास हुआ, लेकिन उन्हें सुकून इस बात से था कि आमिर ने हमेशा उन्हें खुद जैसा रहने दिया। उन्होंने कहा था, “आमिर ने कभी नहीं चाहा कि मैं किसी खास तरीके से रहूं। वो हमेशा खुश रहे कि मैं जैसी हूं, वैसी ही रहूं और यही उनकी सबसे बड़ी खूबी है।” 2021 में 15 साल बाद दोनों ने आपसी सहमति से अलग होने का फैसला लिया। अपने संयुक्त बयान में उन्होंने कहा था कि वे कपल के रूप में अलग हो रहे हैं, लेकिन परिवार और सहयोगी के रूप में हमेशा जुड़े रहेंगे। दोनों मिलकर बेटे आजाद की परवरिश कर रहे हैं। डायरेक्शन में 13 साल बाद की वापसी किरण राव ने साल 2023 में 13 साल बाद निर्देशन में वापसी की। डायरेक्टर के तौर पर उनकी दूसरी फिल्म ‘लापता लेडीज’ है। फिल्म की बात करें तो यह महिलाओं की पहचान, पितृसत्ता, सामाजिक व्यवस्था और आत्मसम्मान पर केंद्रित है। इस फिल्म की काफी तारीफ हुई। फिल्म ने 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में रिकॉर्ड भी बनाया। 70वें फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में इसे बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला। वहीं, किरण राव को बेस्ट डायरेक्टर का सम्मान भी दिया गया। फिल्म ‘लापता लेडीज’ की एक्ट्रेस छाया कदम ने डायरेक्टर किरण राव के बारे में दैनिक भास्कर से हाल ही में बातचीत में कहा कि किरण राव का सिनेमा उनके दिल से निकलता है। वो हर छोटे से छोटे डिटेल पर ध्यान देती हैं, ताकि फिल्म का कोई भी सीन गलत मैसेज न दे। छाया ने बताया कि कोरोना काल में शूटिंग के दौरान जब टीम के कई लोग बीमार पड़े, तो किरण ने खुद कैमरा और डायरेक्शन दोनों संभाले। एक पल के लिए भी उनके चेहरे पर शिकन नहीं आई। उन्होंने हम सबको हिम्मत दी। छाया ने आगे कहा कि किरण जी इंसानियत में यकीन रखती हैं। अगर कोई जूनियर आर्टिस्ट ठंड में खड़ा होता है, तो वो जाकर कहेंगी – ‘भाई, स्वेटर पहन लो।’ …………………….. बॉलीवुड से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… शाहरुख@60; मां के सपने के लिए बने एक्टर:हेमा मालिनी ने कहा बदसूरत, पहली कमाई थी 50 रुपए, आज हैं दुनिया के सबसे अमीर एक्टर दिल्ली का एक लड़का, जिसका सपना था कि वह आर्मी में जाए और देश की सेवा करे। खेल-कूद में भी वह आगे था और अपनी कॉलेज की हॉकी टीम का कप्तान था, लेकिन एक दिन अचानक उसे चोट लग गई और उसके बाद उसका स्पोर्ट्स करियर खत्म हो गया।। पूरी खबर यहां पढ़ें…
