दंतेवाड़ा जिले के अनेक किसान खेती में नवाचार कर नए आयाम गढ़ रहे हैं। ऐसे ही किसानों में शामिल हैं छिंदबहार गांव के तुलसीराम मौर्य। क्षेत्र में पहली बार श्री विधि से कुटकी की खेती कर उन्होंने उत्पादकता में सुधार किया है। अब वे दूसरे किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं। किसान तुलसीराम ने बताया, पहले मैं सामान्य विधि से धान की खेती करता था। इसमें लागत ज्यादा आ रही थी जबकि उत्पादन सीमित हो रहा था। फिर दो साल पहले आंध्रप्रदेश के अरकू जाकर मैंने कुटकी की खेती देखी। इसके फायदे भी जाने। वहां से लौटकर इस साल दो एकड़ रकबे में श्री विधि से कुटकी की खेती की। कुटकी को स्थानीय भाषा में कोसरा भी कहा जाता है। सामान्य तरीके से कुटकी की खेती करने में प्रति एकड़ करीब डेढ़ से दो क्विंटल उत्पादन होता है जबकि श्री विधि से खेती करने में यह करीब पांच गुना बढ़कर 8-10 क्विंटल तक होता है। यानी सामान्य खेती की तुलना में करीब पांच गुना फायदा मिलता है। इस विधि में बीज और पानी की खपत कम होती है जबकि बेहतर पोषण प्रबंधन के जरिए उत्पादन ज्यादा लिया जा सकता है। इस विधि में भूमि की उर्वरता में वृद्धि होती है, खरपतवार नियंत्रण में आसानी रहती है। उत्पादन लागत में कमी के साथ शुद्ध लाभ में वृद्धि होती है और बेहतर गुणवत्ता के कारण बाजार में फसल के दाम अच्छे मिलते हैं। किसान तुलसीराम ने बताया, पारंपरिक खेती के साथ नई तकनीकों को अपनाकर और उत्पादकता में सुधार करने के बाद मैंने गांव के 10 अन्य किसानों को भी इस विधि से खेती करने के लिए प्रेरित किया। दूसरे किसानों को भी समझ में आ रहा है कि जैविक खेती और श्री विधि जैसी तकनीक अपनाकर सीमित संसाधनों में भी अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। मैं जैविक विधि से सब्जी उत्पादन भी कर रहा हूं। अपने खेत में नीम घोल, जीवामृत, घनजीवामृत व देशी गोबर खाद का प्रयोग कर रासायनिक मुक्त सब्जियां उगा रहा हूं। स्थानीय बाजार में जैविक सब्जियों के दाम अच्छे मिल जाते हैं। गर्मी में श्री विधि से रागी (मडिया) की खेती की और वर्षभर खेत की उपयोगिता बनाए रखी। ————————- आप भी किसान हैं और खेती में ऐसे नवाचार किए हैं जो सभी किसान भाइयों के लिए उपयोगी हैं, तो डिटेल व फोटो-वीडियो हमें अपने नाम-पते के साथ 9755195863 पर सिर्फ वॉट्सएप करें। ध्यान रखें, ये नवाचार किसी भी मीडिया में न आए हों।
