छत्तीसगढ़ में मंगलवार को मौसम विभाग ने 6 जिलों में भारी बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें गरियाबंद, बलौदाबाजार, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मारवाही, सूरजपुर और बलरामपुर शामिल है। वहीं गरज चमक के साथ 27 जिलों में बिजली गिरने की भी चेतावनी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 7 दिनों तक मानसून का सबसे अधिक प्रभाव उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों में दिखेगा।वहीं दक्षिण और मध्य छत्तीसगढ़ के कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है। बीते दिन की बात करें तो सबसे अधिक तापमान 34.4°C रायपुर के माना और पेंड्रा रोड में 22.0°C सबसे न्यूनतम तापमान रिकॉर्ड किया गया है। मौसम विभाग ने सोमवार को प्रदेश में मानसून के धीमे होने का अनुमान लगाया था, लेकिन इसके उलट राज्य के 15 जिलों के 49 से अधिक जगहों पर लगभग 25 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई, जबकि रविवार को सिर्फ 6 जिलों के सिर्फ 11 जगहों पर बारिश दर्ज की गई। दंतेवाड़ा में सबसे ज्यादा 40 मिमी बारिश हुई है। बिलासपुर में छाए रहे बादल, रायगढ़-रायपुर में हल्की बौछारें बिलासपुर में सोमवार दिन भर बादल छाए रहने के बाद शाम होते ही तेज बारिश हुई। वहीं रायगढ़ में भी दोपहर को बौछारें पड़ीं। यहां सुबह से बादल छाए हुए थे, दोपहर के वक्त मौसम बदला और ठंडी हवाओं के साथ पानी बरसा। वहीं राजधानी रायपुर में भी कुछ इलाकों में रात को हल्की बौछारें पड़ी हैं। पिछले दस दिनों में 25.25 मिमी औसत बारिश राज्य में पिछले 10 दिनों में 25.25 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। मंगलवार को 25 दिनों से बस्तर में अटका मानसून रायपुर से होते हुए सरगुजा पहुंचा था। इसके बाद से ही प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में बारिश का दौर जारी है। बारिश की तस्वीरें देखिए 16 दिन पहले आ गया था मानसून, 64 साल के इतिहास में पहली बार इससे पहले छत्तीसगढ़ में नौतपे के बीच मानसून की एंट्री हो गई थी। प्रदेश में मानसून के पहुंचने की नॉर्मल डेट 13 जून है। लेकिन इस बार 16 दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी थी। वहीं 64 साल के इतिहास में ये पहली बार है, जब मानसून मई माह में छत्तीसगढ़ पहुंचा था। इससे पहले साल 1971 में 1 जून को मानसून पहुंचा था जून में अब तक सामान्य से कम बारिश ओवर ऑल जून महीने की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 41.0 मिमी औसत वर्षा हुई है, जबकि सामान्य औसत 81.0 मिमी होती है। यानी लगभग आधी बारिश ही अब तक हुई है। बलरामपुर इकलौता जिला है जहां नॉर्मल से बहुत अधिक बारिश हुई है। वहीं दंतेवाड़ा ऐसा जिला है जहां सामान्य बारिश हुई है। 26 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है। इनमें से 17 जिलों में कम और 9 जिलों में कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि मौसम विभाग की माने तो जून का ट्रेंड यही रहा है। शुरुआती 10 से 12 दिन गर्मी बढ़ती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया या चक्रवातों के चलते मानसून सक्रिय हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। मई में 374 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी पिछले माह लगातार बने सिस्टम और करीब 14 दिन पहले आए मानसून ने पूरे छत्तीसगढ़ में मई महीने में जमकर बारिश कराई। इस दौरान औसत से 373 फीसदी ज्यादा पानी गिर गया। इसके बाद से मानसून पिछले करीब 12 दिनों से ठहरा है। यह आगे ही नहीं बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में 22 मई से 28 मई के बीच 53.51 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। प्रदेश में मानसून में औसतन 1200 मिलीमीटर पानी बरसता है। पिछले साल 1276.3 MM पानी गिरा था। पिछले साल के मुकाबले तापमान कम हालांकि इस बार की स्थित पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था, जो 1 जून को दर्ज किया गया था। जबकि इस साल अधिकतम तापमान अब तक 42 से 43°C के आस-पास ही रहा है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.5°C 19 जून को रिकॉर्ड किया गया था। पिछले साल जून में पूरे महीने के औसत तापमान की बात करें तो 38.6°C रहा था। वहीं न्यूनतम औसतन तापमान 27.7°C दर्ज किया गया था। लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियम समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। प्रदेश के बदलते तापमान को दो इंफोग्राफिक से समझिए इसलिए आकाशीय बिजली धरती पर गिरती है दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ गरज-चमक, बिजली और ओले गिरने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
