एआई सर्वे से यह तय किया गया कि किस सड़क को पहले सुधारा जाए। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि जरूरतमंद गांवों को प्राथमिकता मिले। ग्रामीणों का कहना है कि पहले योजनाएं कागजों में बनती थीं, अब जमीन पर दिख रही हैं। सरकार द्वारा पांच साल तक देखभाल की गारंटी से यह भरोसा भी बढ़ा है कि सड़कें जल्द टूटेंगी नहीं।
