‘चित्रकोट महोत्सव 2026’ का शानदार आगाज:बस्तर की लोक विरासत से लेकर आधुनिक सुरों तक, ‘नियाग्रा’ के तट में सांस्कृतिक उत्सव

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बस्तर की जनजातीय परंपराओं, लोक कलाओं और आधुनिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का भव्य संगम बुधवार को चित्रकोट जलप्रपात के समीप देखने को मिला, जब मेला स्थल पर ‘चित्रकोट महोत्सव 2026’ का शानदार आगाज हुआ। सोंधी माटी की खुशबू, ढोल-नगाड़ों की गूंज और रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों के बीच महोत्सव का पहला दिन दर्शकों को बस्तर की जीवंत सांस्कृतिक आत्मा से रूबरू कराता नजर आया। महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर सांसद महेश कश्यप ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ पर्यटन और विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार लगातार प्रयासरत है। विधायक चित्रकोट विनायक गोयल और केंद्रीय सहकारी बैंक के अध्यक्ष दिनेश कश्यप ने भी महोत्सव को समृद्ध जनजातीय संस्कृति का प्रतीक बताया। नेता-अफसर रहे मौजूद दो दिवसीय आयोजन के माध्यम से कला, संस्कृति, खेल और पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यक्रम में जिला पंचायत उपाध्यक्ष बलदेव मंडावी, नगर निगम सभापति खेमसिंह देवांगन, अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ आईजी सुंदरराज पी, सीसीएफ आलोक तिवारी, जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन, वन मंडलाधिकारी उत्तम गुप्ता सहित अधिकारी मौजूद रहे।
स्कूली छात्र-छात्राओं की हुई प्रस्तुतियां महोत्सव के पहले दिन की शुरुआत स्थानीय स्कूली छात्र-छात्राओं की प्रस्तुतियों से हुई। सेजेस अलनार और अंग्रेजी माध्यम स्कूल धाराउर के विद्यार्थियों ने मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाई, वहीं प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास गढ़िया, चित्रकोट और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं ने लोक संस्कृति पर आधारित नृत्यों से समां बांध दिया। गौर-परब नृत्य ने दर्शकों की तालियां बटोरीं शाम होते-होते मंच पूरी तरह बस्तर की पारंपरिक पहचान और जनजातीय गौरव से सराबोर हो गया। आंजर के कलाकारों के गौर नृत्य और लोहड़ीगुड़ा के परब नृत्य ने दर्शकों की तालियां बटोरीं। इसके बाद तोकापाल के ककसाड़ नृत्य और बकावंड नाट परब ने बस्तर की प्राचीन लोकगाथाओं और परंपराओं की झलक प्रस्तुत की। संगीत प्रेमी झूमने पर हुए मजबूर सांस्कृतिक संध्या में शास्त्रीय और आधुनिक कला का संतुलित संगम भी देखने को मिला। जेनिसा देवांगन और निधि रावल के गायन के बाद धुर्विका शर्मा, गीतिका चक्रधर और समृद्धि शर्मा के कथक नृत्य ने मंच को शास्त्रीय गरिमा से भर दिया। स्थानीय प्रतिभाओं को मंच देते हुए ‘बस्तर विट्स म्यूजिकल ग्रुप’ और वंदना पॉल की प्रस्तुतियों ने संगीत प्रेमियों को झूमने पर मजबूर किया। वहीं कोंडागांव के लोक कला मंच ‘चिरैया’ की वृहद प्रस्तुति ने छत्तीसगढ़ी लोक विधाओं का प्रभावी प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का समापन ‘लाइव बैंड जुनूनियत’ की प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने युवा दर्शकों में खासा उत्साह भर दिया। लोक और आधुनिक संगीत के इस फ्यूजन ने महोत्सव की पहली शाम को यादगार बना दिया।

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