इस फैसले का सीधा अर्थ है कि रजिस्ट्रार को धारा 26–27 के तहत अपनी वैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ाना होगी। रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट शिकायत के आधार मामले और सीआइएफ की संपंत्तियों की जांच कर पाएगा। साथ ही इस मामले में जिला न्यायालय को कार्रवाई के लिए भी भेजा जा सकेगा।
