छत्तीसगढ़ी सिनेमा के रिवाइवल को 25 साल पूरे:अनुज शर्मा बोले-हमारे यहां भी नेपोटिज्म, अश्लीलता से स्टैंडर्ड गिरता है; अभी मैं राजनेता कहलाना पसंद करूंगा

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पहली छत्तीसगढ़ फिल्म ‘कही देबे संदेश’ 1965 में रिलीज हुई थी। अगली फिल्म ‘ घर द्वार’ 1971 में रिलीज हुई। हालांकि, दोनों ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। इसके बाद अगली छत्तीसगढ़ फिल्म के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। सन 2000 में आई ‘मोर छइयां भुइयां’, जो घर द्वार के बाद पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म थी। मोर छइयां भुइयां ने बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ दिए। फिल्म सुपरहिट रही। एक्टर अनुज शर्मा इस फिल्म में मुख्य किरदार में थे। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिनेमा के विकास का सिलसिला बढ़ता रहा। सन 2000 से अब तक छत्तीसगढ़ी सिनेमा के रिवाइवल को 25 साल पूरे हो चुके हैं। इस मौके पर हमने छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के विकास, वर्तमान स्थिति और भविष्य को लेकर एक्टर और बीजेपी विधायक अनुज शर्मा से बात की। एक्टर या पॉलिटिशियन के सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी वे राजनेता कहलाना पसंद करेंगे। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: जब आप फिल्म इंडस्ट्री में आए थे, तब छत्तीसगढ़ी सिनेमा में करियर बनाने का दौर नहीं था। आप क्या सोचकर आए?
जवाब: मैं छत्तीसगढ़ सिनेमा का फुल टाइम एक्टर हूं। साइड में दूसरा कुछ नहीं था। तब एक्टर के तौर पर छत्तीसगढ़ सिनेमा में करियर बनाने की चॉइस रिस्की डिसीजन था। मैं नौकरी छोड़कर आया। परिवार-दोस्त कोई भी ऐसा नहीं था जिसने मेरे फैसले को सही बताया। कठिन समय था। लेकिन मैं टिका रहा, मुझे मालूम था कुछ अच्छा कर जाउंगा। सवाल: आपका अपना करियर तो चमकदार है, लेकिन छत्तीसगढ़ सिनेमा किस डायरेक्शन में जा रहा है?
जवाब: पिछले 25 सालों में छत्तीसगढ़ सिनेमा आत्मनिर्भर हुआ है। पहले हम हर छोटी-छोटी चीजों के लिए मुंबई, ओडिशा और मद्रास जैसे दूसरे राज्यों के टेक्निशयन पर डिपेंड होते थे। आज छत्तीसगढ़ में ही पूरी फिल्म बन जाती है। ये सबसे बड़ी उपलब्धि। दूसरी अच्छी बात ये है कि अब छत्तीसगढ़ी इंडस्ट्री में प्रयोग होने लगा है। अब अलग-अलग जॉनर की फिल्में छत्तीसगढ़ में बनाई जा रही। दूसरी भाषाओं में छत्तीसगढ़ी फिल्मों के रीमेक बन रहे हैं। हमारे एक्टर्स को भी बाहर अब रिकॉग्नाइजेशन मिल रहा है। बिजनेस के मामले में भी छत्तीसगढ़ी फिल्में हिन्दी फिल्मों को टक्कर दे रही है। मेरी फिल्म सुहाग 50 दिन से पर्दे पर है। आज कल कौन सी फिल्म 50 दिन चलती हैं। इम्प्रूवमेंट की नीड है, लेकिन डायरेक्शन सही है। सवाल: छत्तीसगढ़ी फिल्म की यूएसपी क्या है?
जवाब: छत्तीसगढ़ी सिनेमा की दो यूएसपी मुझे लगती है। पहली तो सादगी और अपनापन। और दूसरा छत्तीसगढ़ी सिनेमा का म्यूजिक। आप छत्तीसगढ़ी फिल्में अपने परिवार वालों के साथ देखने जा सकते हैं। तो ये दो बाते हैं जो मुझे इस सिनेमा में सबसे खास दिखती है। सवाल: सादगी के साथ कई फिल्मों में अश्लीलता भी परोसी जा रही है, इस पर क्या कहेंगे?
जवाब: आज हर तरह की फिल्में बन रही हैं। ओटीटी पर जाएंगे तो आपको डार्क स्टोरीज देखने को मिलेगी, क्राइम और कॉमेडी ड्रामा भी मिलेगा। तो इंपोर्टेंट ये कि फिल्म किस विषय पर बनाई जा रही है और उसका टारगेट ऑडियंस क्या है? अगर जरूरत है, फिल्म की डिमांड है, तो इस तरह के दृश्य गलत नहीं हैं। हां, ये जरूर कहूंगा कि कई लोग कन्फ्यूज रहते हैं। अनावश्यक ऐसे दृश्य फिल्मों में डाल देते हैं, जिनकी जरूरत नहीं। लेकिन इस तरह के फिल्मों को लंबी सफलता भी नहीं मिलती। सवाल: क्या छत्तीसगढ़ सिनेमा में भाई-भतीजावाद हावी है? जवाब: हां, बिल्कुल है। जैसे कि बाकी फिल्ड में होता है, हमारे यहां भी होता है। ये सब जगह है, पॉलिटिक्स में, बिजनेस में तो सिनेमा भी है। लेकिन मेरा मानना है कि किसी को अवसर मिलने में आसानी और कठिनाई हो सकती है। लेकिन सफलता उसी को मिलेगी जो योग्य होगा। तो कुल मिलाकर ये है कि कई लोगों को मौके आसानी से मिल जाते है, लेकिन कला नहीं है तो सक्सेस नहीं मिलती। सवाल: छत्तीसगढ़ विकास निगम क्या कर रहा है?
जवाब: रमन सिंह के शासन काल में छत्तीसगढ़ विकास निगम बना था। इसके पहले अध्यक्ष राजीव अवस्थी थे। उसके बाद पिछली सरकार ने फिल्म विकास निगम के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं की। अभी फिल्म पॉलिसी आई है, इस पर बात हो रही है। बहुत जल्द फिल्म विकास निगम की ये पॉलिसी लागू हो जाएगी। ताकि हमारे फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को इसका फायदा मिल सके। इसके अलावा 150 करोड़ फिल्म सिटी के लिए भी सेंट्रल से मिले हैं। तो ये तय है कि फिल्मों के अच्छा वातावरण बन रहा है। सवाल: छत्तीसगढ़ सिनेमा को लेकर कोई स्पेशल इंस्ट्‌टीयूशन नजर नहीं आते ?
जवाब: किसी भी सिनेमा के ग्रोथ के लिए ये जरूरी है कि न्यू जेनरेशन तैयार होता रहे। और न्यू जेनरेशन नई सोच और प्रयोग के साथ एंट्री करे। लेकिन अब छत्तीसगढ़ में प्राइवेट और सरकारी इंस्टीट्यूट है, जहां एक्टिंग सिखाई जा रही है। एक्टिंग की क्लास हो रही है। तो ये कहूंगा कि यहां माहौल भी और इंस्ट्‌टीयूशन भी हैं। हालांकि बेहतर इंस्ट्‌टीयूशन बनाए जाने चाहिए। सवाल: छत्तीसगढ़ी सिनेमा को स्क्रीन कम क्यों मिलती है?
जवाब: अब ये प्रॉब्लम नहीं है। मेरी जो अभी फिल्म आई है, उसे 70 स्क्रीन मिली है। सिर्फ मेरी ही नहीं बाकी दूसरी फिल्मों को भी स्क्रीन मिल रहे हैं। एक और बात ये है एक्जीबिटर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और जनता का आप पर भरोसा होना चाहिए। सवाल: हमारी नजर में छत्तीसगढ़ सिनेमा के महानायक अनुज शर्मा हैं, आपकी नजर में कौन है?
जवाब: किसी एक-दो का नाम लेना मुश्किल है। लेकिन कुछ आर्टिस्ट हैं जो अभी अच्छा कर रहे हैं। नए बैच में बताऊं तो दीपक साहू हैं। अमलेश नागेश हैं, मन कुरैशी हैं। दीपक और नागेश ये दो ऐसे नाम हैं, जिन्होंने अपना नाम बनाया है। इनकी फिल्में भी मार्केट में अच्छा परफॉर्म कर रही हैं। सवाल: क्या कारण रहा कि आप ने सिनेमा के साथ पॉलिटिक्स भी जॉइन कर लिया?
जवाब: मुझे सिनेमा में काम करते हुए, 20-22 साल हो गए थे। काम करते हुए एक वक्त ऐसा आता है कि आप अपना दायरा बढ़ाना चाहते हैं। तो मैं आम लोगों के साथ जुड़ा हुआ था, मुझे भी था कि जिन्होंने मुझे बनाया मैं उनके लिए क्या कर सकता हूं। तो पॉलिटिक्स वो प्लेटफॉर्म है। सवाल: करियर का सबसे बेस्ट एक्सपीरियंस क्या रहा?
जवाब: बहुत सारे अच्छे-बुरे अनुभव हैं। लेकिन एक फैन के साथ इंट्रैक्शन के साथ जो फील होता है, वैसी गुड वाइब दूसरी जगह से नहीं मिलती। ऐसा ही एक फैन है उसका जब बच्चा हुआ उसने कॉल पर बोला- भइया इसका नाम क्या रखूं? मैं अनुज रखना चाहता हूं। तब मुझे बहुत अच्छा लगा था।

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