छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, कोंडागांव और अंबिकापुर में ACB-EOW की टीमों ने छापेमारी की है। आबकारी और DMF से जुड़े मामलों की जांच आगे बढ़ाते हुए टीमों ने रविवार तड़के करीब 20 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। रायपुर में पूर्व आबकारी आयुक्त निरंजन दास के ठिकानों पर छापेमारी की गई, जहां अधिकारी आवश्यक दस्तावेजों की पड़ताल कर रहे हैं। वहीं कारोबारी और सप्लायर हरपाल अरोरा के निवास पर भी कार्रवाई जारी है। सरगुजा में EOW-ACB की टीम ने पशु चिकित्सक डॉ. तनवीर अहमद और अंबिकापुर के सत्तीपारा निवासी सप्लायर अमित अग्रवाल के ठिकानों पर रेड की। टीम यहां वित्तीय लेन-देन और विभागीय रिकॉर्ड से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। कोंडागांव में कारोबारी कोणार्क जैन के घर और अन्य ठिकानों पर भी छापेमारी की गई है। कोणार्क जैन वर्ष 2019-20 में DMF सप्लाई कार्यों से जुड़े रहे थे। टीम यहां दस्तावेजों और लेन-देन से संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। रेड की तस्वीरें देखिए… 29 अक्टूबर को DMF घोटाले की जांच करने पहुंची थी टीम इससे पहले 29 अक्टूबर को जिला खनिज न्यास निधि (DMF) घोटाले से जुड़े सप्लायरों के 14 ठिकानों पर ACB और EOW की संयुक्त टीमों ने छापेमारी की थी। रायपुर में पचपेड़ी नाका स्थित वॉलफोर्ट इन्क्लेव में अशोक और अमित कोठारी के घर टीम ने रेड की थी। इनका कारोबार कृषि कच्चा माल, खाद्य पदार्थ से जुड़ा है। वहीं, राजनांदगांव शहर के भारत माता चौक स्थित राधा कृष्ण एजेंसी अग्रवाल के निवास, नहटा और भंसाली के ठिकानों पर भी कार्रवाई की गई थी। दुर्ग में महावीर नगर स्थित कारोबारी नीलेश पारख के यहां जांच की गई, जबकि धमतरी के सिर्री में 5 घंटे की कार्रवाई के बाद टीम लौट गई थी। अब जानिए क्या है DMF घोटाला प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई जानकारी के मुताबिक ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। इस केस में यह तथ्य निकल कर सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं है। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED के तथ्यों के मुताबिक टेंडर करने वाले संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी और बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नाम के लोगों के साथ मिलकर पैसे कमाए गए। 25 से 40 प्रतिशत का कमीशन ED की जांच से पता चला कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को भारी मात्रा में कमीशन का भुगतान किया है, जो कि कांट्रैक्ट का 25% से 40% तक था। रिश्वत के लिए दी गई रकम की एंट्री विक्रेताओं ने आवासीय (अकोमोडेशन) के रूप में की थी। एंट्री करने वाले और उनके संरक्षकों की तलाशी में कई आपत्तिजनक विवरण, कई फर्जी स्वामित्व इकाई और भारी मात्रा में कैश बरामद हुआ है। तलाशी अभियान के दौरान 76.50 लाख कैश बरामद किया गया। वहीं 8 बैंक खाते सीज किए। इनमें 35 लाख रुपए हैं। इसके अलावा फर्जी डमी फर्मों से संबंधित विभिन्न स्टाम्प, अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी जब्त किए गए हैं। मनी लॉन्ड्रिंग के तहत जांच कर रही ED मनी लॉन्ड्रिंग की बात सामने आने के बाद ED जांच कर रही है। DMF वित्त पोषित एक ट्रस्ट है, जिसे छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में खनन से संबंधित परियोजनाओं और गतिविधियों से प्रभावित लोगों के लाभ के लिए काम करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। ED ने 23.79 करोड़ की संपत्ति कुर्क की छत्तीसगढ़ में DMF घोटाला केस में ED ने पूर्व में 23.79 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति कुर्क है। कुर्क की गई ये संपत्ति DMF घोटाले में आरोपी निलंबित IAS रानू साहू, माया वारियर, मनोज कुमार द्विवेदी समेत 10 लोगों की है। ……………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… छत्तीसगढ़ के 7 जिलों में ACB-EOW की रेड:पटवारी से RI बने अधिकारियों पर एक्शन; रायपुर-बिलासपुर सहित 19 ठिकानों पर छापेमारी छत्तीसगढ़ में ACB-EOW ने पटवारी से RI बने अधिकारियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। संयुक्त टीम ने तड़के रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग समेत 7 जिलों में एक साथ 19 ठिकानों पर छापा मारा। अनियमित चयन और अवैध संपत्ति अर्जित करने की शिकायतें पर एक्शन हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…
