छत्तीसगढ़ के 23 जिलों में बिजली गिरने का यलो अलर्ट:रायपुर-दुर्ग समेत 10 जिलों में साामन्य रहेगा मौसम, अगले 3 दिन तक धीमा पड़ेगा मानसून

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छत्तीसगढ़ में पिछले 7 दिनों से अच्छी बारिश का दौर जारी है। प्रदेश के लगभग हर हिस्से में मानसूनी बारिश हुई है, लेकिन अगले 3 दिन मानसून की रफ्तार कम हो सकती है। हालांकि इसके बाद फिर से मानसून रफ्तार पकड़ेगा। इस बीच शनिवार को भी प्रदेश के 10 जिलों के 40 से अधिक जगहों में बारिश हुई है। सबसे ज्यादा बारिश सरगुजा संभाग में हुई। जहां औसतन 70 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं आज (रविवार) को भी सरगुजा संभाग सहित नॉर्थ के सभी 10 जिलों में में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का यलो अलर्ट है। साथ ही दक्षिणी हिस्से के 13 जिलों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का यलो अलर्ट है। सेंट्रल पार्ट में रायपुर, दुर्ग, बेमेतरा सहित 10 जिलों में मौसम सामान्य रहेगा। वहीं तापमान की बात करें तो शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस माना, रायपुर का रहा। सबसे कम न्यूनतम तापमान 22.0 डिग्री सेल्सियस पेंड्रारोड में रिकाॅर्ड किया गया। सरगुजा में चार लोग बहे, 1 का शव बरामद वहीं शुक्रवार हुई तेज बारिश से सरगुजा के मैनी नदी में अचानक आई बाढ़ में मां-बेटे समेत चार लोग बह गए। इनमें एक महिला का शव मिल गया है। तीन की तलाश जारी है। बता दें कि गुरुवार शाम 5:30 से 06:00 के बीच चारों बाढ़ की चपेट में आ गए थे। सभी ढोड़ागांव के रहने वाले हैं। सभी पुटू (मशरूम) बीनने गए थे, तभी लौटते वक्त बाढ़ की चपेट में आ गए। एसडीआरएफ और पुलिस की टीम तलाश में जुटी है। बता दें कि 19 जून को पूरे छत्तीसगढ़ को मानसून ने कवर कर लिया है। पिछले कुछ दिनों से सरगुजा संभाग में लगातार बारिश के बाद से नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। बाढ़ में बहने वालों के नाम इस इमेज से समझिए मानसून की रफ्तार पिछले छह दिनों 22.69 मिमी औसत बारिश राज्य में पिछले छह दिनों में 22.69 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। मंगलवार को 25 दिनों से बस्तर में अटका मानसून रायपुर से होते हुए सरगुजा पहुंचा था। इसके बाद से ही प्रदेश के अलग-अलग स्थानों में बारिश का दौर जारी है। बारिश की तस्वीरें देखिए 16 दिन पहले आ गया था मानसून इससे पहले छत्तीसगढ़ में नौतपे के बीच मानसून की एंट्री हो गई थी। प्रदेश में मानसून के पहुंचने की नॉर्मल डेट 13 जून है। लेकिन इस बार 16 दिन पहले ही मानसून ने दस्तक दे दी थी। वहीं 64 साल के इतिहास में ये पहली बार है, जब मानसून मई माह में छत्तीसगढ़ पहुंचा था। इससे पहले साल 1971 में 1 जून को मानसून पहुंचा था जून में अब तक सामान्य से कम बारिश ओवर ऑल जून महीने की बात करें तो प्रदेश में अब तक कुल 41.0 मिमी औसत वर्षा हुई है, जबकि सामान्य औसत 81.0 मिमी होती है। यानी लगभग आधी बारिश ही अब तक हुई है। बलरामपुर इकलौता जिला है जहां नॉर्मल से बहुत अधिक बारिश हुई है। वहीं दंतेवाड़ा ऐसा जिला है जहां सामान्य बारिश हुई है। 26 जिलों में वर्षा सामान्य से कम रही है। इनमें से 17 जिलों में कम और 9 जिलों में कम बारिश दर्ज की गई। हालांकि मौसम विभाग की माने तो जून का ट्रेंड यही रहा है। शुरुआती 10 से 12 दिन गर्मी बढ़ती है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी या अरब सागर में बनने वाले लो प्रेशर एरिया या चक्रवातों के चलते मानसून सक्रिय हो जाता है। इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। मई में 374 फीसदी ज्यादा बारिश हुई थी पिछले माह लगातार बने सिस्टम और करीब 14 दिन पहले आए मानसून ने पूरे छत्तीसगढ़ में मई महीने में जमकर बारिश कराई। इस दौरान औसत से 373 फीसदी ज्यादा पानी गिर गया। इसके बाद से मानसून पिछले करीब 12 दिनों से ठहरा है। यह आगे ही नहीं बढ़ रहा है। छत्तीसगढ़ में 22 मई से 28 मई के बीच 53.51 मिलीमीटर औसत बारिश हो चुकी है। प्रदेश में मानसून में औसतन 1200 मिलीमीटर पानी बरसता है। पिछले साल 1276.3 MM पानी गिरा था। पिछले साल के मुकाबले तापमान कम हालांकि इस बार की स्थित पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। साल 2024 में जून का अधिकतम तापमान 45.7°C था, जो 1 जून को दर्ज किया गया था। जबकि इस साल अधिकतम तापमान अब तक 42 से 43°C के आस-पास ही रहा है। वहीं सबसे कम न्यूनतम तापमान 23.5°C 19 जून को रिकॉर्ड किया गया था। पिछले साल जून में पूरे महीने के औसत तापमान की बात करें तो 38.6°C रहा था। वहीं न्यूनतम औसतन तापमान 27.7°C दर्ज किया गया था। प्रदेश के बदलते तापमान को दो इंफोग्राफिक से समझिए इसलिए आकाशीय बिजली धरती पर गिरती है दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढि़या कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ गरज-चमक, बिजली और ओले गिरने के दौरान इन बातों का रखें ध्यान लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियम समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है।

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