पहली बार देश की टॉप सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस छत्तीसगढ़ में होने जा रही है। हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटी मीटिंग में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, अलग-अलग राज्यों के DGP और IG देश की इंटरनल सिक्योरिटी का ब्लूप्रिंट तैयार करेंगे, जिसे सभी राज्यों में लागू किया जाएगा। इंटेलिजेंस ब्यूरो ने मीटिंग की जगह सुरक्षा कारणों से छत्तीसगढ़ को चुना है। सभी राज्य अपने मुख्य सुरक्षा मुद्दों पर रिपोर्ट पेश करेंगे। 2014 से अब तक अलग-अलग राज्यों में 10 मीटिंग हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में DGP-IG कॉन्फ्रेंस की यह 11वीं मीटिंग है। कल यानी 28 से 30 नवंबर तक स्ट्रैटजी तय की जाएगी। भास्कर डिजिटल की टीम ने DGP-IG कॉन्फ्रेंस को लेकर पूर्व डीजीपी डीएम अवस्थी से बातचीत की। डीएम अवस्थी ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में नक्सलवाद, आतंकवाद, ड्रग नेटवर्क, सीमा सुरक्षा और सांप्रदायिक तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। बैठक को देश की सुरक्षा नीति का अहम आधार माना जाता है। इस इंटरव्यू में पढ़िए प्रदेश में पहली बार आयोजित हो रही इस बैठक के क्या मायने हैं, आखिर यह बैठक होती क्या है, कैसे चलती है। कॉन्फ्रेंस का क्या इतिहास रहा है ? सवाल- छत्तीसगढ़ में बैठक के क्या मायने निकाले जाएं ? जवाब- यह बैठक साल में एक बार होती है। 2014 में जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने, उसके बाद इसका स्वरूप बदला। पहले यह हमेशा दिल्ली के विज्ञान भवन में होती थी, लेकिन अब हर साल एक अलग राज्य में आयोजित होती है। सवाल- छत्तीसगढ़ में इस बार कौन-से मुद्दे शामिल हो सकते हैं? जवाब- छत्तीसगढ़ का मुख्य मुद्दा नक्सलवाद ही रहेगा। इसके अलावा देशभर के आंतरिक सुरक्षा मुद्दे। हिंदू-मुस्लिम तनाव, कास्ट-रिलेटेड तनाव, लॉ एंड ऑर्डर, ड्रग्स, आतंकवाद दिल्ली में हुए बम ब्लास्ट की घटना, सीमा सुरक्षा चर्चा के विषय होगें। इसके साथ ही पूरे देश की इंटरनल सिक्योरिटी के महत्त्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लिए जाएंगे। सवाल- नक्सल एनकाउंटर के बीच कॉन्फ्रेंस का छत्तीसगढ़ को क्या लाभ मिलेगा? जवाब: सबसे बड़ा फायदा—छत्तीसगढ़ के अधिकारियों को देशभर के सुरक्षा विशेषज्ञों और DGs के साथ काम करने का एक्सपोजर मिलेगा। उनकी प्रोफेशनल स्किल, ऑपरेशन मैनेजमेंट और इंटेलिजेंस समझ और मजबूत होगी। सवाल- बैठक का स्थान कैसे तय होता है, कौन निर्णय लेता है ? जवाब: इस कॉन्फ्रेंस का आयोजन इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) करती है। अलग-अलग राज्यों के DG से लगातार संवाद होता रहता है। बातचीत के बाद IB यह तय करती है कि किस राज्य में बैठक करना उपयुक्त रहेगा। राज्य की परिस्थितियां, सुरक्षा माहौल और संभावना देखते हुए चयन होता है। इस बार छत्तीसगढ़ को इसलिए चुना गया होगा। सवाल- इस बैठक का एजेंडा कैसे तय होता है ? जवाब: सभी राज्यों से सुझाव मांगे जाते हैं, लेकिन एजेंडा तय करने की नोडल एजेंसी IB है। IB को पता होता है कि देश में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कौन-से मुद्दे प्रमुख हैं। इससे पहले दो कॉन्फ्रेंस हुई है। इनमें छत्तीसगढ़ का नक्सलवाद, कश्मीर का आतंकवाद पर चर्चा हुई। सवाल-बैठक में जाने से पहले DG स्तर पर क्या तैयारी होती है? जवाब: राज्यों से पहले ही विस्तृत जानकारी भेज दी जाती है। IB एजेंडा सेट करने के बाद राज्यों से नोट्स, प्रेजेंटेशन और फील्ड इनपुट मांगती है। छत्तीसगढ़ के मामले में 2019 के सम्मेलन में हमारा मुख्य एजेंडा नक्सलवाद था। इसी तरह पंजाब में ड्रग्स और बंगाल में सीमा घुसपैठ मुख्य मुद्दे रहे। सवाल- क्या इस बैठक में लिए फैसले बाद में लागू होते हैं ? जवाब: बिल्कुल। कॉन्फ्रेंस के बाद “Minutes of Meeting” सभी राज्यों को भेजे जाते हैं। उनकी मॉनिटरिंग होती है। पहले चर्चा होती है। पिछली कॉन्फ्रेंस के क्या एजेंडे थे और उनमें क्या प्रगति हुई? सबसे पहले IB “एक्शन-टेकन रिपोर्ट” पेश करती है। प्रधानमंत्री की उपस्थिति में बताया जाता है कि पिछले साल तय एजेंडा पर कितना काम हुआ। चीजें नहीं होतीं, ऐसा सवाल ही नहीं है। अगर कुछ चीजें अधूरी रह जाती है कॉन्फ्रेंस में कारण बताना होता हैं। सवाल- 2014 से पहले और अब की बैठक में क्या बड़ा अंतर आया है ? जवाब: बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। पहले प्रधानमंत्री सिर्फ उद्घाटन में आते थे। गृह मंत्री एक-दो सेशन में रहते थे।अब तीनों दिन प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और NSA उपस्थित रहते हैं। उनके इनपुट सीधे एजेंडों में शामिल होते हैं। पिछले 10 सालों में यह कॉन्फ्रेंस क्वालिटी के मामले में बहुत बेहतर हुई है। सवाल- बैठक में तीन बेस्ट पुलिस स्टेशन के अवॉर्ड कैसे तय होते हैं ? जवाब: इसके लिए अलग जूरी और कमेटी होती है। 4–5 DG स्तर के अधिकारी चयन करते हैं। पुलिसिंग, क्राइम कंट्रोल, जनता से व्यवहार और परिणामों के आधार पर बेस्ट थाने चुने जाते हैं। इसमें पैरामिलिट्री और अन्य एजेंसियों के अधिकारी भी शामिल होते हैं। सवाल- मॉडल स्टेट का चयन कैसे होता है? जवाब – क्राइम रेट,पुलिसिंग का व्यवहार,रिजल्ट-ओरिएंटेड वर्क ,टेक्नोलॉजी एडॉप्शन लॉ एंड ऑर्डर हैंडलिंग इन सभी फैक्टर्स के आधार पर मॉडल स्टेट चुना जाता है। सवाल- इस तरह की कॉन्फ्रेंस की शुरुआत क्यों हुई थी ? जवाब: पहले देश बड़ा था और कम्युनिकेशन के साधन सीमित थे। एक पत्र आने-जाने में 15 दिन लगते थे, इसलिए सभी राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी एक जगह इकट्ठे हों, अपनी समस्याएं साझा करें और समाधान निकालें। इसी उद्देश्य से कॉन्फ्रेंस शुरू हुई। आज स्वरूप बदल गया है, लेकिन महत्व और प्रतिष्ठा और बढ़ गई है। इस कॉन्फ्रेंस में अटेंड करना और इसे होस्ट करना। दोनों ही बड़ी उपलब्धियां हैं। सवाल- आपको कितनी बार कॉन्फ्रेंस अटेंड करने का मौका मिला है? जवाब: DG और IG इंटेलिजेंस रहते हुए मैंने करीब 8–10 कॉन्फ्रेंस अटेंड की हैं। पीएम मनमोहन सिंह के समय की कॉन्फ्रेंस में भी शामिल रहा और पीएन नरेन्द्र मोदी के समय में आयोजित हो रही कांफ्रेस में रहा। अब जानते हैं इस कॉन्फ्रेंस का इतिहास देश की सबसे जरूरी इंटरनल सिक्योरिटी मीटिंग मानी जाने वाली DGP-IGP कॉन्फ्रेंस का इतिहास 100 साल से भी ज्यादा पुराना है, जो 1920 के दशक से शुरू होता है।ब्रिटिश राज के दौरान, इंटेलिजेंस ब्यूरो इंटेलिजेंस अधिकारियों के लिए छोटे लेवल पर ब्रेनस्टॉर्मिंग मीटिंग्स ऑर्गनाइज करता था। इसका मकसद बस राज्य की इंटेलिजेंस को केंद्र सरकार से जोड़ना था। हालांकि, आजादी के बाद, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने होम मिनिस्ट्री संभाली, तो 12 जनवरी, 1950 को देश के सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर की नींव रखी गई। शुरू में यह हर दो साल में एक बार होता था, लेकिन 1973 के बाद यह एक सालाना इवेंट बन गया। पहले यह मीटिंग दिल्ली में होती थी, लेकिन 2014 से प्रधानमंत्री मोदी ने DGP कॉन्फ्रेंस में गहरी दिलचस्पी दिखाई। इसे अलग-अलग राज्यों में किया गया है।
