आरजी ज्यूडिशियल ने आदेश पत्र में कहा है कि अनावश्यक विलंब से संबंधितों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। जमानत आवेदनों पर संबंधित न्यायालयों को एक सप्ताह के भीतर अपना फैसला सुनाना होगाा। वहीं, सत्र विचाराधीन मामलों और मजिस्ट्रेट विचाराधीन मामलों को क्रमशः दो साल और छह महीने के भीतर निपटाना होगा।
