चीन की राजधानी बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर पर आज विक्ट्री डे परेड होगी। यह परेड सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान चीन में जापान की हार की 80वीं सालगिरह पर आयोजित हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन जापान की हार को अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश करेगा। इस कार्यक्रम में रूस, पाकिस्तान और ईरान समेत 25 देशों के नेता शामिल होंगे। चीन इसका इस्तेमाल पश्चिमी देशों के खिलाफ ग्लोबल साउथ की एकजुटता दिखाने और अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करने के लिए भी कर सकता है। चीन और जापान के बीच 1937 में लड़ाई शुरू हुई थी। तब जापान ने चीन पर हमला करके उसके एक बड़े हिस्से को कब्जा लिया था। जापानी सेना ने चीन के नानजिंग शहर में नरसंहार किया था, जिसमें करीब 3 लाख लोग मारे गए थे। इस लड़ाई को 1939 में शुरू हुई सेकेंड वर्ल्ड वॉर का हिस्सा माना जाता है। बाद में जापान ने अमेरिका के न्यूक्लियर हमलों के बाद 15 अगस्त 1945 को सरेंडर कर दिया था, जिसके बाद उसने 2 सितंबर 1945 को चीन के खिलाफ भी हार स्वीकार कर ली थी। जापान की हार को अपनी बड़ी जीत बता रहा चीन चीन हाल के महीनों में जापान की हार को अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रहा है। वह कहता है कि उसने और सोवियत यूनियन (USSR) ने युद्ध में सबसे ज्यादा योगदान दिया, जबकि अमेरिका और यूरोप जैसे पश्चिमी देशों की भूमिका को नजरअंदाज कर रहा है। जिनपिंग चाहते हैं कि लोग सेकेंड वर्ल्ड वॉर को चीन के नजरिए से देखें। उन्होंने मई 2025 में रूस के एक समारोह में हिस्सा लिया था। इस दौरान जिनपिंग ने एक आर्टिकल में कहा था कि चीन और USSR ने जापान और जर्मनी के खिलाफ युद्ध में मुख्य भूमिका निभाई। उन्होंने अमेरिका या यूरोप का कोई जिक्र नहीं किया। नानजिंग नरसंहार पर बनी फिल्में भी इसी इतिहास को लोगों तक पहुंचा रही हैं। चीन ने नानजिंग नरसंहार को दिखाने के लिए ‘डेड टू राइट्स’ नाम से फिल्म भी बनाई है। जुलाई 2025 में रिलीज हुई इस फिल्म ने पहले चार दिनों में ही 50 करोड़ युआन (लगभग 430 करोड़ रुपए) की कमाई की थी। चीन 100 से ज्यादा फाइटर जेट्स का प्रदर्शन करेगा यह परेड चीन की मिलिट्री पावर और ग्लोबल असर दिखाने का एक बड़ा मंच है। इसमें हजारों सैनिक, 100 से ज्यादा फाइटर जेट्स और सैकड़ों मिलिट्री इक्विपमेंट शामिल होंगे। परेड के दौरान चीन कई नए हथियार दुनिया के सामने लाएगा। इनमें J-20 (5वीं जनरेशन का स्टील्थ फाइटर जेट), FH-97 कॉम्बैट ड्रोन (सुपरसोनिक ड्रोन) और हाइपरसोनिक मिसाइलें शामिल हैं। इसके अलावा DF-41 और DF-31AG जैसी इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें दिखाई जाएंगी, जो 12000 से 15000 किमी तक मार कर सकती हैं। चीन YJ-15 और YJ-20 जैसी एंटी-शिप मिसाइलों का भी प्रदर्शन करेगा। परेड में गाइडेड लेजर वेपन, इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग सिस्टम और अंडरवाटर ड्रोन भी दिखाए जाएंगे, जो ताइवान के आसपास और दक्षिण चीन सागर में चीन की ताकत बढ़ाते हैं। ताइवान और पश्चिमी देशों को चेतावनी देगा चीन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह परेड सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर चीन की स्थिति को मजबूत करने की भी कोशिश है। राष्ट्रपति जिनपिंग इस परेड के जरिए ताइवान और पश्चिमी देशों को चेतावनी देना चाहते हैं कि चीन किसी भी युद्ध के लिए तैयार है। यह परेड पश्चिमी देशों के खिलाफ रूस, चीन, ईरान और उत्तर कोरिया के गठजोड़ को मजबूत करने का भी कोशिश है। पश्चिमी देशों की तरफ से सिर्फ सर्बिया और स्लोवाकिया इस प्रोग्राम में हिस्सा लेंगे। ब्रिटेन के चैथम हाउस की एक्सपर्ट यू जी का कहना कि जिनपिंग इस परेड के जरिए दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वह ग्लोबल लीडरशिप करना चाहते हैं। जिनपिंग का मानना है कि दुनिया को एक ऐसी व्यवस्था चाहिए, जिसकी अगुआई चीन करे और कई गैर-पश्चिमी देश उसका साथ दें। यह प्रोग्राम ऐसे समय पर हो रहा है, जब दुनिया ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और आक्रामक विदेश नीति से जूझ रही है। ऐसे में चीन के पास मौका है कि वो दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देशों को अपने पक्ष में गोलबंद कर सके।
