‘झीरम में नक्सलियों ने पहलगाम की तरह पूछ-पूछकर मारा’:चश्मदीद बोले-कांग्रेस नेताओं की हत्या सुपारी-किलिंग थी, वॉकी-टॉकी से ‘आका’ दे रहा था मारने का ऑर्डर

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25 मई 2013, यह तारीख छत्तीसगढ़ के इतिहास में हमेशा एक काले अध्याय के रूप में याद की जाएगी। नरसंहार में जिंदा बचे चश्मदीद रायपुर निवासी कांग्रेस नेता शिव ठाकुर ने दैनिक भास्कर से कहा आज भी उस दिन की गोलियों की आवाज और साथियों की चीखें भूल नहीं पाए हैं। उन्होंने कहा कि नक्सली पहलगाम की तरह-तरह नाम पूछ-पूछकर नेताओं को मार रहे थे। अपने आका के निर्देश पर चुन-चुनकर गोलियों बरसा रहे थे। ये नरसंहार नक्सली हमला नहीं, बल्कि सुपारी किलिंग थी। वह बता रहा था कि किसे मारना है और फिर नक्सली उसे ढूंढ कर मार रहे थे। इसके पीछे कौन था खुलासा आज तक नहीं हुआ है। मुझे भी गोली लगी है। 12 साल बीत जाने के बाद भी मेरे शरीर में बुलेट धंसी है। शिव ठाकुर ने दैनिक भास्कर से नक्सलियों के नरसंहार की आंखों देखी बताई। पढ़िए उनकी जुबानी, नरसंहार की कहानी… सवाल- आपने क्या देखा, जब फायरिंग चल रही थी, क्या हालात थे ?
जवाब- पीठ पर मुझे गोली लगी है बुलेट और 7 मेटल पार्टिकल आज भी मेरे शरीर में धंसे हुए हैं, जिनके साथ मैं जी रहा हूं। सारी घटना मेरी आंखों के सामने हुई है। नक्सलियों के सिर पर खून सवार था। वह बार-बार पूछ रहे थे नंद कुमार पटेल कहां है, महेंद्र कर्मा कहां है, दिनेश पटेल कहां है ? वो नाम पूछ-पूछकर गोली मार रहे थे। वो कह रहे थे नंदकुमार पटेल अगर नहीं मिले तो तुम सब मारे जाओगे। यह सुपारी किलिंग थी, मुझे लगता है की नक्सलियों को किसी ने सुपारी दी थी कि इन व्यक्तियों को मारना है, इसी वजह से वह ढूंढ-ढूंढ कर नेताओं को मार रहे थे। सवाल- आपको क्या लगता है कि इस घटना के पीछे कौन हो सकता है, ये आपको सुपारी किलिंग क्यों लगती है ?
जवाब- बहुत बड़े लोग इसमें शामिल थे। हमले के वक्त नक्सलियों के पास लैपटॉप और वॉकी-टॉकी सेट थे। वह बार-बार अपने किसी बॉस से बात करते थे, वह कोई भी फैसला करने के लिए वॉकी टॉकी से अपने बॉस से बात करते थे, हमलावर नक्सली खुद कोई फैसला नहीं कर रहे थे। वायरलैस सेट पर जो आदेश मिलता था उसके हिसाब से वह काम करते थे। कोई उनका बॉस था जो पूरी घटना को हैंडल कर रहा था। उसके ही डायरेक्शन पर नक्सली चल रहे थे, लेकिन इसके पीछे कौन था इस खुलासा आज तक नहीं हुआ है। सवाल- इस वक्त प्रदेश सरकार नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन कर रही है, बड़ा नक्सल लीडर बसवा राजू मारा गया जो झीरम कांड में शामिल बताया जाता है ? जवाब- हां मीडिया की खबरों में हमने पढ़ा कि बसवा राजू नाम का बड़ा नक्सली लीडर मारा गया। दावा किया गया है कि वो झीरम कांड में शामिल था। उसके जो खास नक्सली थे उनसे ही उसकी पहचान करवाई गई, तो वह लोग बताएं झीरम में क्या हुआ कैसे हुआ। उनसे पूछताछ क्यों नहीं हो रही है। खुलासा होना चाहिए कि क्या हुआ था, झीरम की हकीकत क्या थी। हम फोर्स को बधाई देते हैं, सैल्यूट करते हैं। मगर हमको न्याय कब मिलेगा डॉ रमन सिंह की सरकार में यह घटना हुई थी। आखरी में सारे नक्सलियों को मार दिया जाएगा या उनको सरेंडर करवा दिया जाएगा लेकिन जिन नक्सलियों ने हमारे नेताओं की हत्या की, उसका खुलासा कब होगा। झीरम कांड में शामिल नक्सलियों से पूछताछ करके जनता के बीच सच्चाई को लाना चाहिए, नहीं तो ऐसे में राज राज ही रह जाएगा। सवाल- NIA इस घटना की जांच कर रही थी क्या आप लोगों से कोई पूछताछ हुई ? जवाब- मुझसे कोई पूछताछ नहीं हुई, मेरा कोई बयान नहीं लिया गया। अस्पताल में जब मैं था तब NIA के लोग मुझसे मिले थे तो मेरा नाम पता और फोन नंबर लेकर गए, लेकिन उसके बाद मुझसे कोई संपर्क नहीं किया गया। अचानक NIA ने क्लोजर रिपोर्ट प्रस्तुत कर कह दिया कि ये आतंक और दहशत फैलाने के लिए किया गया था। इसके बाद जब प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आई, भूपेश बघेल मुख्यमंत्री थे तो वह स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाकर जांच कर रहे थे। लेकिन NIA ने कोर्ट में स्टे लगा दिया। वो जांच भी नहीं हो पाई। कांग्रेस सरकार में बनी एसआईटी ने हमसे पूछताछ की हमने बयान दिए, मगर जांच रुक गई। सवाल- असल में क्या हुआ था वहां, कैसे नक्सलियों ने अटैक किया, आप कहां थे ?
जवाब- नक्सली करीब 200 से 250 की तादाद में थे। वो अलग-अलग टीमों में बंटकर घटना को अंजाम दे रहे थे। जैसे ही सभी कांग्रेस नेताओं का काफिला मोड़ पर पहुंचा, वहीं नक्सलियों ने चारों ओर से अटैक किया। गाड़ियां रुक गई, सबसे पीछे विद्याचरण शुक्ल की कार थी, वहां नक्सलियों ने पेड़ गिरा दिया ताकि कोई निकल न सके और दो से ढाई घंटे फायरिंग करते रहे। नक्सलियों का एक ग्रुप नंदकुमार पटेल को लेकर चला गया। एक ग्रुप लगातार अटैक कर रहा था। तीसरा ग्रुप छानबीन कर रहा था कि कौन जिंदा बचा है कोई भागा तो नहीं है। मैं नंदकुमार पटेल की गाड़ी के पीछे कार में था, मेरे साथ ही सुरेंद्र शर्मा, मोतीलाल साहू जो भाजपा में चले गए विधायक बने वो भी थे। नक्सली बार-बार महेंद्र कर्मा को पुकार रहे थे, और लोगों की जान न जाए ये देखते हुए महेंद्र कर्मा ने सरेंडर किया मगर नक्सलियों ने उन्हें मार दिया। जिस तरह से पहलगाम की घटना में बात आई थी कि हमलावरों ने कहा था कि मोदी को बता दो, वैसे ही नक्सली हमसे कह रहे थे कि केंद्र सरकार पर तुम्हें भरोसा था उसकी फोर्स आ गई क्या बचाने के लिए, क्यों फोर्स लेकर चलते हो? सवाल- फिर सब कुछ थमा कैसे, नक्सली कहां गए ?
जवाब- नक्सलियों ने जब ये कंफर्म किया कि अब नंदकुमार पटेल और महेंद्र कर्मा नहीं बचे हैं तो वो घायलों को पहाड़ पर लेकर गए। सड़क पर 30 लाशें पड़ी थीं। मुझसे नक्सलियों ने नाम पद पूछा, वो बार बार चेक कर रहे थे कि और कोई बड़ा नेता हमारे बीच है क्या। जब उन्हें तसल्ली हुई तो कुछ देर बाद नक्सली जंगलों में गायब होने लगे, हम सभी वहीं लेटे रहे, कुछ देर बाद मीडिया के लोग आए और हम लोग उन्हें सारी बात बताते हुए अस्पताल ले जाए गए। सवाल- इतने साल बीतने के बाद हमले को लेकर मन में क्या बात आती है आपके ?
जवाब- हम तो अभी भी प्रताड़ित और पीड़ित लोग हैं। बार-बार सरकार से मांग करते रहे हैं की जांच हो । इस दुख को झेल रहे हैं कि जो दोषी हैं वह अभी तक पकड़े नहीं गए हैं और ना ही खुलासा हुआ है कि इसके पीछे कौन था। हम लोग केंद्र सरकार, राज्य सरकार से बार-बार हम यह मांग कर रहे हैं कि दोषियों के बारे में खुलासा करे। ……………………………….. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… झीरम घाटी नरसंहार के 11 साल:एनआईए जिन 18 इनामी नक्सलियों तक नहीं पहुंच सकी, उनके गांव जाकर भास्कर ने ताजा लोकेशन खोज निकाली आज 25 मई है। 11 साल पहले आज ही के दिन नक्सलियों ने झीरम घाटी में सबसे बड़ा हमला किया था। इस हमले की जांच कर रही एनआईए ने 23 दिसंबर 2023 को घटना में शामिल 18 वांटेड (फरार) नक्सलियों के नाम, पते और उन पर इनाम घोषित किया। दैनिक भास्कर इन 18 नक्सलियों के पतों को खोजते हुए सुकमा, दंतेवाड़ा और बीजापुर के धुरनक्सल प्रभावित गांवों तक पहुंचा। पढ़ें पूरी खबर…

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