छत्तीसगढ़ के बालोद में जंबूरी रोवर-रेंजर कार्यक्रम में टेंडर, खर्च और अध्यक्ष पद विवादों से घिरा रहा। रायपुर में होने वाला कार्यक्रम अचानक बालोद शिफ्ट कर दिया गया। कार्यक्रम में टेंडर खुलने से पहले टेंट लगा दिया गया। इस पर कांग्रेस ने सरकार को जमकर घेरा। वहीं विवाद के बीच BJP सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने भी हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की है। याचिका में कहा है कि उन्हें अध्यक्ष पद से हटाने के लिए न तो कोई सूचना दी गई और न ही कोई सुनवाई का मौका दिया गया। 10 करोड़ की गड़बड़ी का भी दावा किया है। हाईकोर्ट ने बृजमोहन अग्रवाल की याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि बृजमोहन अग्रवाल को स्काउट गाइड जंबूरी अध्यक्ष के पद से कैसे और किस आधार पर हटाया गया। इस मामले में राज्य शासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। जंबूरी कार्यक्रम में खर्च की बात करें तो टेंट में करीब 1 करोड़ 43 लाख रुपए खर्च हो गए। टॉयलेट और नहाने की व्यवस्था पर 1 करोड़ 68 लाख 60 हजार रुपए खर्च कर दिए गए। 30 VIP टॉयलेट लगाए गए थे, जिन पर करीब 10 लाख खर्च हुए, जबकि 10 VVIP टॉयलेट पर 4 लाख और जोड़े गए। वहीं खाने-पीने के खर्च की बात करें तो 1 हजार अधिकारियों पर कुल 2 लाख 65 हजार रुपए खर्च किए गए। करीब 10 हजार छात्र और प्रतिभागियों पर 12 लाख 49 हजार रुपए भोजन खर्च दिखाया गया। इस तरह कुल मिलाकर 23 लाख 59 हजार रुपए खाने-पीने में खर्च किए गए। इसके अलावा VIP पर 80 हजार, चाय-बिस्किट पर 1 लाख, स्टेज पर भोजन व्यवस्था पर 65 हजार और पानी सप्लाई पर 6 लाख रुपए शामिल हैं। इस रिपोर्ट में जंबूरी कार्यक्रम की इनसाइड स्टोरी पढ़िए कैसे विवाद शुरू हुआ, हाईकोर्ट कैसे पहुंचा मामला, बिना टेंडर टेंट कैसे लगा, कहां कितने खर्च हुआ ? पहले कार्यक्रम से जुड़ी ये 3 तस्वीरें देखिए सबसे पहले जानिए रोवर-रेंजर जंबूरी ? दरअसल, जंबूरी शब्द अफ्रीकी भाषा से लिया गया है। जिसका अर्थ होता है आनंदपूर्ण मिलन। स्काउटिंग जंबूरी की अवधारणा विश्व स्काउट आंदोलन से जुड़ी हुई है। इसका उद्देश्य दुनियाभर के स्काउट्स और गाइड्स को एक मंच पर लाकर आपसी सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना है। अब जानिए कहां हुआ कितना खर्च ? जंबूरी आयोजन में सबसे बड़ा खर्च शौचालय और स्नान व्यवस्था पर हुआ। 400 सामान्य अस्थायी टॉयलेट पर ही 88 लाख खर्च हुए। इसके अलावा 100 पुरुष टॉयलेट पर 18 लाख, 200 महिला टॉयलेट पर 36 लाख और 100 पुरुष-महिला यूरिन ब्लॉक पर 13 लाख दिखाए गए। VIP-VVIP टॉयलेट में खर्च हो गए 14 लाख इसके अलावा अलग से 30 VIP टॉयलेट लगाए गए, जिन पर ₹9.60 लाख खर्च हुए, जबकि 10 VVIP टॉयलेट पर ₹4 लाख और जोड़े गए। खाने-पीने के खर्च की बात करें तो 1,000 अधिकारियों पर कुल 2 लाख 65 हजार रुपए खर्च किए गए। सुबह के नाश्ते पर 65 हजार, दोपहर के भोजन पर 1 लाख और रात के भोजन पर भी 1 लाख खर्च हुआ। यानी अधिकारियों को दिनभर खिलाने पर प्रति व्यक्ति औसतन आम प्रतिभागियों से कई गुना ज्यादा पैसा लगाया गया। प्रतिभागियों को 12 लाख 49 हजार रुपए का भोजन वहीं 10,000 छात्र और प्रतिभागी इस जंबूरी का असली हिस्सा थे, जिन पर कुल 12 लाख 49 हजार रुपए का भोजन खर्च दिखाया गया। सुबह के नाश्ते पर 2.49 लाख, दोपहर के भोजन पर 5 लाख और रात के भोजन पर भी 5 लाख खर्च हुए। इसके अलावा 100 VIP और विशेष अधिकारी, जिन पर कुल ₹80 हजार रुपए खर्च हुए। इन 100 लोगों के नाश्ते पर 20 हजार, दोपहर के भोजन पर 30 हजार और रात के भोजन पर भी 30 हजार खर्च हुआ। यानी VIP का प्रति व्यक्ति खर्च छात्रों से लगभग दस गुना तक ज्यादा रहा। अब जानिए रोवर-रेंजर जंबूरी पर कैसे शुरू हुआ विवाद ? विवाद की शुरुआत आयोजन स्थल को लेकर हुई। शुरुआती चर्चाओं में जंबूरी को नवा रायपुर में आयोजित करने की बात सामने आई थी। नवा रायपुर में पहले भी बड़े आयोजन हो चुके हैं। वहां बुनियादी ढांचा, ठहरने और परिवहन की बेहतर व्यवस्था मानी जाती है, लेकिन बाद में अचानक आयोजन स्थल बदलकर बालोद कर दिया गया। इस फैसले के पीछे क्या ठोस कारण थे। इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई। यही वजह रही कि स्थल चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठे। यह चर्चा शुरू हुई कि क्या यह निर्णय पूरी तरह संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिया गया या इसमें राजनीतिक दखल भी रहा। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि भारत स्काउट गाइड की राज्य परिषद का अध्यक्ष होने के नाते कार्यक्रम को स्थगित करने की घोषणा करता हूं। मैं अध्यक्ष हूं और कार्यक्रम के बारे में मुझे पता ही नहीं है। आयोजन नवा रायपुर में होना था, लेकिन गलत तरीके से बालोद में व्यवस्था की गई। भाजपा के भीतर विवाद, मंत्री गजेन्द्र बनाम सांसद बृजमोहन दरअसल, स्कूल शिक्षा मंत्री को स्काउट-गाइड संगठन का पदेन प्रदेश अध्यक्ष माना जाता है। बृजमोहन अग्रवाल स्कूल शिक्षा मंत्री थे, तब वे स्वाभाविक रूप से इस पद पर रहे। जानकारी के अनुसार, बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद राज्य स्काउट-गाइड कार्य परिषद की एक बैठक हुई। इसमें उनके कार्यकाल को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इस अवधि के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के पास भी स्कूल शिक्षा विभाग का प्रभार रहा। इसके बाद मंत्रिमंडल विस्तार के तहत स्कूल शिक्षा विभाग का दायित्व गजेन्द्र यादव को सौंपा गया। इसके साथ वे स्काउट-गाइड संगठन के पदेन प्रदेश अध्यक्ष बने। हालांकि, बृजमोहन अग्रवाल के कार्यकाल विस्तार से पहले नियमों में किसी प्रकार के परिवर्तन किए गए थे या नहीं, इसे लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मुख्यमंत्री साय ने डिलीट कर दिया X पोस्ट, कांग्रेस ने घेरा विवाद के बीच CM विष्णुदेव साय की ओर से किया गया एक ट्वीट भी चर्चा में रहा, जिसे कुछ समय बाद डिलीट कर दिया गया। ट्वीट हटाए जाने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाए। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई विस्तृत सफाई नहीं दी गई, लेकिन इस घटना ने विवाद को और बढ़ाया। टेंडर प्रक्रिया पर सवाल: काम पहले, नियम बाद में ? जंबूरी कार्यक्रम में सबसे गंभीर आरोप टेंडर प्रक्रिया को लेकर लगे। कांग्रेस प्रवक्ता सुबोध हरितवाल ने टेंडर वाले दिन प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि जंबूरी आयोजन के लिए जेम पोर्टल पर टेंडर 3 जनवरी को सुबह 12 बजे खुलनी थी, लेकिन इसके पहले ही आयोजन स्थल पर एक निजी कंपनी ने काम शुरू कर दिया था। सुबोध हरितवाल ने आरोप लगाया कि कई कामों में टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम शुरू कर दिया गया। नियमों के मुताबिक पहले टेंडर, फिर स्वीकृति और उसके बाद काम शुरू होना चाहिए, लेकिन यहां प्रक्रिया के उलट होने के आरोप सामने आए। कहा गया कि कुछ एजेंसियों को बिना औपचारिक आदेश के काम सौंप दिया गया और बाद में कागजी प्रक्रिया पूरी की गई। इन आरोपों ने आयोजन की प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। कोर्ट तक मामला: ACB-EOW में शिकायत विवाद बढ़ने के बाद कांग्रेस की ओर से एंटी करप्शन ब्यूरो और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता, सरकारी धन के दुरुपयोग और नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए गए। राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी 2026 से जुड़े कथित भ्रष्टाचार का मामला अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। कांग्रेस की ओर से दाखिल की गई शिकायत याचिका को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अदालत ने मामले की पहली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की है। याचिका स्वीकार होने के बाद अब आयोजन से जुड़े खर्च, टेंडर प्रक्रिया और लिए गए प्रशासनिक फैसलों की न्यायिक समीक्षा की जाएगी। जांच एजेंसियों तक मामला पहुंचने के बाद यह साफ हो गया कि यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा है। बृजमोहन ने रखी थी राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी की नींव- कृष्ण कुमार खंडेलवाल भारत राष्ट्रीय स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त कृष्ण कुमार खंडेलवाल ने कहा कि स्कूल शिक्षा मंत्री रहते हुए बृजमोहन अग्रवाल ने ही इस राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी की नींव रखी थी। बृजमोहन अग्रवाल ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आयोजन के लिए सहमति भी बनाई थी। खंडेलवाल के मुताबिक संगठन की मंशा थी कि बृजमोहन अग्रवाल इस कार्यक्रम का सक्रिय हिस्सा बनें, लेकिन वे आयोजन में शामिल नहीं हुए। इसे लेकर संगठन को दुख है, क्योंकि बृजमोहन अग्रवाल एक वरिष्ठ और बड़े नेता हैं। वहीं मंत्री गजेन्द्र यादव ने बृजमोहन अग्रवाल को मनाने की बात कही थी। दूसरे राज्यों में जंबूरी का बड़ा बजट था स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त कृष्ण कुमार खंडेलवाल ने कहा कि राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के लिए कुल 5 करोड़ 20 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था, जिसके तहत आयोजन से जुड़ी सभी व्यवस्थाएं की गईं। इसमें किसी बड़े घोटाले की आशंका नहीं लगती है।
