राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को कहा उन्हें भरोसेमंद सूत्रों ने बताया है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुक गई हैं। अब वहां कोई फांसी नहीं दी जाएगी। हालांकि ट्रम्प ने इस बयान के अलावा और कोई बात नहीं कही। उनका यह बयान ईरान सरकार के प्रदर्शनकारियों पर तेज ट्रायल और फांसी के संकेतों से उलट भी था। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ने मंगलवार को कहा था कि अगर ईरान सरकार प्रदर्शन करने वालों को फांसी देना शुरू करती है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया गया है कि ईरान में कोई भी फांसी हुई तो अगले 24 घंटे में अमेरिका मिलिट्री एक्शन शुरू कर सकता है। ईरान सरकार ने बुधवार को 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को सरेआम फांसी दिए जाने का ऐलान किया था। इधर, ईरान ने सरकारी टीवी चैनल पर राष्ट्रपति ट्रम्प को जान से मारने की धमकी जारी की थी। एजेंसी फ्रांस प्रेस (एएफपी) की रिपोर्ट के मुताबिक धमकी पर्शियन में थी। इस धमकी में पेंसिल्वेनिया के बटलर में 2024 में टम्प पर हुए जानलेवा हमले की फुटेज दिखाई गई। जिसके साथ एक संदेश था- इस बार गोली निशाने से नहीं चूकेगी। पहले देखें उस धमकी वाले टेलीकास्ट का स्क्रीन शॉट.. यह ट्रम्प के खिलाफ तेहरान की अब तक की सबसे सीधी धमकी है, इससे पहले ट्रम्प ने ही बार-बार ईरान सरकार को धमकी दी है कि अगर वह विरोधी प्रदर्शनकारियों पर अपनी क्रूर कार्रवाई जारी रखती है तो अमेरिका उस पर हमला करेगा। भारत समेत स्पेन, इटली और पोलैंड के नागरिकों को सलाह ईरान छोड़ें भारत सरकार ने बुधवार को अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। इसमें कहा गया है कि जो भी भारतीय नागरिक, चाहे वे छात्र हों, तीर्थयात्री हों, व्यापारी हों या पर्यटक, इस समय ईरान में हैं, उन्हें जल्द से जल्द वहां से निकल जाना चाहिए। ईरान में अभी 10 हजार से ज्यादा भारतीय हैं। इस एडवाइजरी में कहा गया है कि यह सलाह 5 जनवरी की पिछली एडवाइजरी के आगे की कड़ी है और ईरान की बदलती परिस्थितियों को देखते हुए दी गई है। सरकार ने यह भी दोहराया है कि सभी भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतनी चाहिए। उन्हें विरोध प्रदर्शन या भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहना चाहिए। ईरान में मौजूद भारतीय नागरिक भारतीय दूतावास के संपर्क में रहें और स्थानीय मीडिया पर नजर रखें ताकि किसी भी नई जानकारी से अवगत रहें। वहीं, विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बुधवार देर शाम ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर ईरान से जुड़े हालातों पर बात की। भारत के अलावा स्पेन, इटली और पोलैंड की सरकारों ने भी अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी है। कौन है सुलतानी, उसे सरेआम फांसी क्यों… ईरान में 26 साल के प्रदर्शनकारी इरफान सुलतानी को फांसी दी जानी है। द गार्डियन के मुताबिक इरफान को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। 11 जनवरी को उन्हें मौत की सजा सुनाई गई। सरकार ने कहा है कि इस मामले में आगे कोई ट्रायल नहीं होगा। फांसी से पहले उनके परिवार को सिर्फ 10 मिनट के लिए आखिरी मुलाकात का मौका मिलेगा। सुल्तानी पर मोहरेबेह (भगवान के खिलाफ युद्ध छेड़ना) का आरोप लगाया गया है। यह ईरानी कानून में सबसे गंभीर अपराधों में से एक है, जिसकी सजा मौत (फांसी) होती है। सुल्तानी को ट्रायल, वकील या अपील का मौका नहीं दिया गया। गिरफ्तारी के बाद परिवार को बताया गया कि उन्हें मौत की सजा सुनाई गई है। मानवाधिकार संगठन और एक्साइल एक्टिविस्ट्स का कहना है कि यह फास्ट-ट्रैक एक्जीक्यूशन (रैपिड/शो ट्रायल) का हिस्सा है। सरकार का मकसद डर फैलाकर बाकी हजारों प्रदर्शनकारियों (10,000+ गिरफ्तार) को चुप कराना है। यह विरोध प्रदर्शन के दौरान पहली फांसी होगी। द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन के बाद ईरान दुनिया का दूसरा देश है, जहां सजा के तौर पर सबसे ज्यादा लोगों को फांसी दी जाती है। नॉर्वे स्थित ईरान मानवाधिकार समूह के मुताबिक, पिछले साल ईरान ने कम से कम 1,500 लोगों को फांसी दी। ईरान के ज्यूडीशियरी चीफ ने कहा था- सजा में देरी तो असर कम होगा ईरान के न्यायपालिका प्रमुख गुलाम हुसैन मोहसेनी-एजेई ने बुधवार को कहा था कि सरकार को फास्ट ट्रायल और फांसी के जरिए हिरासत में लिए गए 18,000 से ज्यादा लोगों को जल्द से जल्द सजा देनी होगी। उन्होंने कहा, “अगर हमें कोई काम करना है, तो हमें उसे अभी करना चाहिए। अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे जल्दी करना होगा। अगर इसमें दो महीने या तीन महीने की देरी होती है, तो इसका उतना असर नहीं होता। अगर हम कुछ करना चाहते हैं, तो हमें उसे तेजी से करना होगा।”
