डायरेक्टर को पाकिस्तानी दे रहे जान से मारने की धमकी:फारूक कबीर बोले- हिन्दुस्तानी हूं, धमकियों से नहीं डरता, लाख बार वंदे मातरम कहूंगा

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डायरेक्टर फारूक कबीर की वेब सीरीज ‘सलाकार: द लीजेंड ऑफ एन एक्स्ट्राऑर्डिनरी इंडियन स्पाई’ हाल ही में जियो हॉटस्टार पर स्ट्रीम हुई है। इस सीरीज में दिखाया गया है कि किस तरह से इंडियन स्पाई ने पाकिस्तान के जनरल जियाउल हक के परमाणु बम बनाने की योजना को बर्बाद करके भारत को जीत दिलाई। जब से यह सीरीज रिलीज हुई है तब से डायरेक्टर को पाकिस्तानी जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। हाल ही में सीरीज के डायरेक्टर फारूक कबीर ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बताया कि वो हिन्दुस्तानी हैं, ऐसे धमकियों से नहीं डरते हैं। डायरेक्टर ने फिल्म इंडस्ट्री में अब तक के अपने अनुभव के बारे में भी बात की। पेश है बातचीत के कुछ खास अंश.. फिल्म इंडस्ट्री में अब तक आप का कैसा अनुभव रहा है? इंडस्ट्री थोड़ी कठोर है। यहां लोग रिश्तों की अहमियत को भूल गए हैं। मुझे लगता है कि जहां पैसे की हद खत्म होती है, वहीं से ताल्लुकात की हद शुरू होती है। मेरे साथ भी ऐसा हुआ कि जब कोई चीज कामयाब हुई तो दुनिया भर के फोन आए। अभी ‘सलाकार’ के बाद मेरे कुछ दुश्मनों के भी फोन और मैसेज आए हैं। मुझे लगता है कि शायद यह सीरीज लोगों को पसंद आ रही है। कोई चीज कामयाब नहीं होती है तो सब लोग गायब भी हो जाते हैं। चाहे सफलता मिले या फिर असफलता, मैं दोनों परिस्थितियों में संयम बनाकर रखता हूं। सफलता से ज्यादा असफलता इंसान को सीखा जाती है, असफलता में हौसले को कैसे बरकरार रखा आपने? मैं परमात्मा में बहुत यकीन रखता हूं। मेरी सारी ताकत मां और परमात्मा में यकीन से आता है। कई बार इंसान भरोसा तोड़ते हैं और दिल दुखाते हैं। फिर इंसान पर निर्भर होना बंद कर देते हैं। धीरे-धीरे जिंदगी का सच समझ आने लगता है। अगर मां-बाप हैं तो उनकी सेवा करके दुआएं कमा लीजिए और परमात्मा के साथ बहुत मजबूत रिश्ता बनाकर रखे। कहने का मतलब यह है कि रब राजी तो दुनिया राजी। दुनिया से ज्यादा अपने रब को राजी रखना चाहता हूं। इसलिए जब पाकिस्तान से जान से मारने की धमकी आती है तो डर नहीं लगता है। क्या ‘सलाकार’ के बाद भी ऐसी धमकी मिली? पाकिस्तानी तो पागल हो गए हैं। ‘सलाकार’’ की रिलीज के बाद एक हजार से ज्यादा नफरत भरे मैसेज इंस्टाग्राम पर पड़े हैं। कुछ जान से मारने वाले भी मैसेज आ रहे हैं। हम हिन्दुस्तानी लोग हैं, ऐसे मैसेज से नहीं डरते हैं। लोग चिढ़ते हैं कि मुसलमान डायरेक्टर ने ऐसी कहानी क्यों बनाई। मैं जितना मुसलमान हूं, उतना ही हिन्दुस्तानी भी हूं। ये मेरी सरजमी है। यहां पैदा हुआ हूं, ये मेरी मातृभूमि है। कुछ ऐसे भी मैसेज आए है कि मुसलमान होकर वंदे मातरम गाना क्यों किया है। उनका कहना है कि मुसलमान वंदे मातरम बोलते हैं। मैंने कहा कि एक लाख बार वंदे मातरम कहूंगा। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि इससे मेरे नाम का फतवा जारी हो जाए। हमारी परवरिश ऐसी रही है कि घर में कभी ऐसी बातें नहीं सुनी। हमारे पेरेंट्स ने कभी भी इन विषयों पर बात नहीं की। मैं गणेश चतुर्थी में लेजम खेलता था। होली मेरा सबसे फेवरेट त्योहार है। अभी हाल ही में वृंदावन में प्रेमानंद महाराज जी से मिलकर आया। मैं इसी कल्चर में पला बढ़ा हूं। दिवाली ईद में बड़ा हुआ हूं। स्कूल में क्रिसमस सेलिब्रेट किया। इसमें कोई धार्मिक पहचान की बात ही नहीं है। मेरी बहन की शादी राजपूत फैमिली में हुई है। उनका कन्यादान खुद मैंने किया।

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