डेंटल सर्जन से अभिनेत्री बनने तक श्रेया शर्मा का सफ़र किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। हरियाणा के एक मेडिकल परिवार से निकलकर उन्होंने अपने सुरक्षित करियर को छोड़ अभिनय के सपने को चुना। बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के मुंबई आकर श्रेया शर्मा ने संघर्ष, ऑडिशन और अस्वीकृतियों का सामना किया। मेहनत, धैर्य और अपने सपनों पर अटूट विश्वास के बल पर उन्होंने मस्ती 4 जैसी बड़ी फिल्म में अपनी जगह बनाई। दैनिक भास्कर से बातचीत में श्रेया ने बताया कि उन्हें अभिनय से सच्चा प्यार है और वह मेहनत के दम पर इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाना चाहती हैं। एक डेंटल सर्जन कैसे एक्टर्स बनने का ख्वाब देख लेती है और एक दिन उसे पूरा भी कर लेती है? मुझे अच्छे से याद है कि बचपन से ही मैं “मेड इन इंडिया” गाने पर डांस किया करती थी। मेरे पापा डॉक्टर हैं और मम्मी एक टीचर हैं। हरियाणा में हमारा खुद का हॉस्पिटल भी है। मैं हमेशा से एक्ट्रेस बनना चाहती थी, लेकिन कैसे और किस दिशा में जाना है, ये मुझे पता नहीं था। बोर्ड एग्जाम के बाद मैंने वही रास्ता चुना, जो हमारे घर में परंपरा के तौर पर चला आ रहा है, और मैंने बीडीएस किया। मेरे रिजल्ट में अच्छे मार्क्स आए, जिससे मेरे मां-बाप बहुत खुश थे। लेकिन कन्वोकेशन खत्म होते ही मैंने मुंबई जाने की ठान ली और अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया। एक आउटसाइडर के तौर पर मुंबई में दिक्कतें तो हुईं हीं। अब मुझे मुंबई में आए हुए दो साल हो गए हैं और मैं धीरे-धीरे सब कुछ सीख रही हूं। मैं दिल से एक्टिंग करना चाहती थी और आज वही कर रही हूं। कितने ऑडिशन दिए और किसी प्रोजेक्ट को करने से पहले कितनी बार रिजेक्ट हुईं? जब मैं पहली बार मुंबई पहुंची, तो सबसे बड़ी दिक्कत ये थी कि आखिर रहूं कहां। घर ढूंढने में ही एक महीना लग गया। फिर तीन महीने बाद मैंने काम की तलाश शुरू की। मेरा मेडिकल बैकग्राउंड था, इसलिए इंडस्ट्री के बारे में उतना आइडिया नहीं था। मैंने एक लिस्ट बना ली थी कि इंडस्ट्री में किन-किन लोगों से मुझे मिलना है। मैंने अपना एक अच्छा-सा पोर्टफोलियो भी तैयार किया, ताकि ये दिखा सकूं कि मैं किस तरह के काम करना चाहती हूं। मैंने काफी सारे वर्कशॉप्स भी किए हैं। मैं एक वुमन आर्मी हूं और इंडस्ट्री में मैंने थोड़ा लेट कदम रखा है, लेकिन मुझे एक्टिंग से प्यार है और वो मुकाम मैं जरूर हासिल करूंगी। मस्ती 4 फिल्म कैसे मिली आपको? कितना पापड़ बेलना पड़ा इस फिल्म को हासिल करने के लिए? मैंने ‘Mr. Mrs. Grey’ नाम की एक फिल्म की शूटिंग खत्म की थी। उस फिल्म के बाद मैं एक प्रोड्यूसर के ज़रिए मिलान मिलाप जावेरी सर से मिली। उस वक्त मस्ती 4 के ऑडिशन चल रहे थे।मैंने अपनी फिल्म के किरदार ‘आंचल’ नाम की लड़की के लिए ऑडिशन दिया। जब मिलाप सर मुझे उस किरदार के बारे में बता रहे थे कि वो लड़की अपने हसबैंड का फोन चेक करती है, लोकेशन मंगवाती है, तो मैंने उनसे कहा कि “सर, मैं तो रियल लाइफ में भी ऐसी ही हूं।” ऑडिशन देने के बाद मैंने बहुत लंबा इंतज़ार किया और डेली कॉल करके पूछा करती थी। मैं किसी भी हाल में ये फिल्म करना चाहती थी, क्योंकि इसी फिल्म से मुझे इंडस्ट्री में ब्रेक मिलता। और कौन नहीं चाहता है आफताब शिवदासानी, विवेक ओबेरॉय, रितेश देशमुख और अरशद वारसी जैसे एक्टर्स के अपोजिट काम करना, मेरे लिए ये एक बहुत बड़ी ऑपर्च्युनिटी थी। मस्ती 4 के सेट पर कितनी मस्ती हुई? कुछ यादें बताइए जिन्हें आप आज भी सोचकर हंस पड़ती हैं। विवेक ओबेरॉय सर सबसे बड़े प्रैंकस्टर थे। वो किसी एक से कुछ बोल देते थे, फिर दूसरा आकर पूछता था कि “क्या आपने मेरे बारे में ऐसा कहा?” हम तीनों लड़कियों ने सेट पर बहुत मस्ती की है। शूट यूके में हुआ था, तो हमने बहुत खाया। जिस दिन हमारा बिकिनी शूट था, उस दिन हम तीनों पिज्जा खा रही थीं।नरगिस माशाअल्लाह बहुत खूबसूरत है। जब मैंने उन्हें बकिंघम में मिलने वाले शॉपिंग ऑफर्स के बारे में बताया, तो वो मास्क लगाकर वहां शॉपिंग करने चली गईं। आगे चलकर किसी ऐसे एक्टर के साथ काम करने की ख्वाहिश है? मुझे लगता है कि मैं आदित्य रॉय कपूर के साथ अच्छी दिखूंगी। इसके अलावा मैं शाहिद कपूर के साथ भी काम करना चाहती हूं। मुझे लगता है कि कबीर सिंह में मैं कियारा की जगह ज्यादा अच्छा परफॉर्म कर सकती थी, मुझे उस फिल्म में होना चाहिए था। जहां तक डायरेक्टर्स की बात है, तो मैं संजय लीला भंसाली की बहुत बड़ी फैन हूं। मैं उनकी बनाई हुई दुनिया में खो जाना चाहती हूं।
