दुर्ग जिले में टमाटर की फसल इस बार वायरस और बैक्टीरियल प्रकोप की चपेट में आ गई है। इसके कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है। कई किसानों ने पौधों को बचाने के लिए लाखों रुपये की दवाइयां छिड़कीं, लेकिन इसका असर न के बराबर रहा। पत्तियों का काला पड़ना जारी रहा और बड़ी संख्या में पौधे सूखकर खत्म हो गए। कई गांवों में तो पूरी फसल लगभग चौपट हो चुकी है। इसी गंभीर स्थिति को लेकर सोमवार को धमधा क्षेत्र के किसानों का एक प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मुलाकात करने जिला कार्यालय पहुंचा। किसानों ने बताया कि अलग-अलग गांवों में हजारों एकड़ में टमाटर की खेती की गई थी, जो अक्टूबर तक हुई बारिश के कारण वायरस और बैक्टीरियल रोगों से पूरी तरह नष्ट हो गई। किसानों ने यह भी बताया कि वे 25 से 30 वर्षों से टमाटर की खेती कर रहे हैं, लेकिन ऐसा संकट उन्होंने पहले कभी नहीं देखा। फसल खराब होने से व्यापारी खरीद से कर रहे इनकार किसानों ने कलेक्टर को बताया कि जमीन पर उत्पादन लेने वाले छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। भारी लागत लगाने के बाद भी उन्हें फायदा मिलना तो दूर, लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। उनका कहना था कि बड़ी संख्या में पत्ते झड़ रहे हैं, फलों पर दाग पड़ रहे हैं और गुणवत्ता खराब होने के कारण बाहरी व्यापारी माल खरीदने से मना कर रहे हैं। किसानों के अनुसार, बहुत अधिक दवा छिड़कने के बाद भी केवल 15 से 20 प्रतिशत बड़े किसान ही कुछ हद तक फसल बचा पाए हैं। कलेक्टर से मिलने आए जिला पंचायत सदस्य दानेश्वर साहू ने जानकारी दी कि वे धमधा क्षेत्र के किसानों के साथ मौजूदा हालात बताने पहुंचे थे। उनके अनुसार, धमधा के करीब 25 से अधिक गांवों में हजार एकड़ से ज्यादा में लगी टमाटर की खेती लगभग पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। उन्होंने बताया कि खराब मौसम, लगातार बारिश और उसके बाद छाए कोहरे ने ब्लाइट, वायरस और अन्य रोगों को और तेज कर दिया, जिसकी वजह से खेतों में खड़ी फसल नष्ट होती चली गई। साहू ने कलेक्टर से मांग की कि जिन किसानों ने फसल बीमा कराया है उन्हें तत्काल बीमा राशि दिलाई जाए। वहीं जिन किसानों का बीमा नहीं हो सका, उन्हें आरबीसी 6(4) के तहत राहत राशि उपलब्ध कराई जाए, क्योंकि इस बार की बर्बादी सामान्य नहीं है और किसानों के पास अगली फसल लगाने तक की स्थिति भी नहीं बची है।
