रिलीज से पहले ही विवादों में घिरी फिल्म ‘द ताज स्टोरी’ पर रोक लगाने की याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। अधिवक्ता शकील अब्बास और बीजेपी नेता रजनीश सिंह द्वारा दायर इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म ताजमहल से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करती है और इससे सांप्रदायिक माहौल बिगड़ सकता है। कोर्ट ने मामले की तुरंत सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया से ही सुना जाएगा। फिल्म के निदेशक तुषार अमरीश गोयल ने फैसले का स्वागत किया और कहा— “यह फिल्म अफवाह नहीं, शोध पर आधारित सिनेमा है। हमने इतिहास के हर पहलू पर गहन अध्ययन किया है। CBFC ने जांच के बाद ही फिल्म को मंजूरी दी। हमारा उद्देश्य किसी समुदाय को भड़काना नहीं, बल्कि सोच और संवाद जगाना है।” निर्माता सीए सुरेश झा ने भी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि ‘द ताज स्टोरी’ इतिहास के प्रति सम्मान व्यक्त करने वाली फिल्म है, जिसका मकसद सच को दुनिया तक पहुंचाना है, न कि विभाजन पैदा करना। परेश रावल, अमृता खानविलकर, स्नेहा वाघ, जाकिर हुसैन और नमित दास जैसे कलाकारों के अभिनय से सजी ‘द ताज स्टोरी’ स्वतंत्रता के 79 वर्ष बाद बौद्धिक गुलामी के सवाल पर बहस छेड़ती है। स्वर्णिम ग्लोबल सर्विसेज बैनर तले निर्मित और रोहित शर्मा व राहुल देव नाथ के संगीत निर्देशन में बनी यह फिल्म 31 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
