‘रहमान डकैत की दी हुई मौत बड़ी कसाईनुमा होती है… ‘धुरंधर’ मूवी में एक्टर अक्षय खन्ना का यह डायलॉग इन दिनों हर किसी की जुबान पर है। लोग अक्षय की एक्टिंग की जमकर तारीफ कर रहे हैं। उन्हें ऑस्कर और नेशनल अवॉर्ड देने की मांग हो रही है। फिल्म में अक्षय के दो बेटों का भी रोल है। छोटे बेटे फैजल डकैत का किरदार बिहार के भोजपुर जिले के 14 साल के अजिंक्य मिश्रा ने निभाया है। फैजल का कोई डायलॉग तो नहीं है, लेकिन किरदार सुर्खियों में है। भोजपुर के पीरो के चरपोखरी के रहने वाले अजिंक्या की बतौर बाल कलाकार धुरंधर पहली फिल्म है। उनके गांव से मुंबई पहुंचने के सफर और पहली ही बार में इतनी बड़ी बजट की फिल्म मिलने की पूरी कहानी पर दैनिक भास्कर ने उनके पिता जयशंकर मिश्रा से बात की… सवाल: अजिंक्या मिश्रा की एक्टिंग की शुरुआत कैसे हुई?
अजिंक्य 3 साल की उम्र से ही एक्टिंग में दिलचस्पी लेने लगा था। इंदौर में 2015 में मॉडलिंग में एडमिशन करवाया। यहां वो पाकिजा, ड्यूक, महिंद्रा, अमेरिकन कंपनी समेत कई कंपनियों का ब्रांड एंबेसडर बनाया गया। फेसबुक के माध्यम से इसकी रीच बढ़ती गई। सवाल: इंदौर से मुंबई का सफर कैसे शुरू हुआ?
2017 में स्टार प्लस के एक सीरियल ‘विद्रोही’ के लिए मुंबई से कॉल आया। अजिंक्य का यह पायलट प्रोजेक्ट था। फिर 2018 में मुंबई शिफ्ट हो गए। इसके बाद अजिंक्य को एक शॉर्ट मूवी ‘डेमोक्रेसी; में एंट्री मिली। इसके लिए उन्हें अवॉर्ड भी मिले। बिहार फिल्म फेस्टिवल में भी बेटे को सम्मानित किया गया। दिल तो हैप्पी है सीरियल से मिली टीवी इंडस्ट्री में पहचान दिल तो हैप्पी है जी शो के लीड रोल से आजिंक्य मिश्रा को टीवी इंडस्ट्री में पहचान दी। ज़ी टीवी का ईश्क शुभान अल्लाह शो में डॉक्टर चाइल्ड का रोल निभाया। 2019 में ज़ी टीवी ने इसके लिए अजिंक्या को अवॉड भी दिया। 50 से अधिक टीवी एड कर चुका है अजिंक्या मिश्रा अजिंक्या मिश्रा अभी तक 50 से अधिक टीवी एड कर चुका है। पंकज त्रिपाठी, रणबीर सिंह के साथ एड में काम करने का मौका मिला है। 2024 में फिल्म के लिए आया था कॉल धुरंधर फिल्म के लिए सितंबर 2024 में कास्टिंग प्रोडक्शन के डॉयरेक्टर मुकेश छाबड़ा ने कॉल कर ऑडिशन के लिए बुलाया. पिता जयशंकर मिश्रा बताते हैं कि अजिंक्या बेबाक बोलने के लिए जाना जाता है, लेकिन इस फिल्म में उसका एक भी डायलॉग नहीं था,तो मैंने फिल्म करने से मना कर दिया था, लेकिन बाद में पता चला कि इससे बड़े-बड़े कलाकारों का भी डायलॉग नहीं है। फिल्म बनने के बाद एहसास हुआ कि इसका रोल इंपैक्ट और पॉवरफुल है… आदित्य धर ने अजिंक्या का ऑडिशन किया था। 12 दिसंबर को सिंगल पापा वेब सीरीज में अजिंक्या मिश्रा का रोल जबरदस्त है। कुणाल खेमू की कॉमेडी फिल्म में चाइल्ड कलाकार अजिंक्या ने अपना गहरा छाप छोड़ा है। इंदौर में हुआ अंजिक्या मिश्रा का जन्म 7 सितंबर 2011 को मध्यप्रदेश के इंदौर में अजिंक्या मिश्रा का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ। उनके पिता एक प्राइवेट कंपनी में काम करते हैं। मुकुंदपुर गांव से निकलकर अजिंक्या मिश्रा ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। उन्होंने टीवी की दुनिया में भी कई लोकप्रिय धारावाहिकों में काम किया है, जिनमें ‘दिल तो हैप्पी है जी’ उनका पहला सीरियल था। उनकी पहली फिल्म ‘राष्ट्रकवच ओम’ थी। परिवार की मदद से सच हुआ अभिनय का सपना अजिंक्या की सफलता में उनके माता-पिता और परिवार का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है। उनके दादा समाजसेवी चंदेश्वर मिश्रा रिटायर्ड बैंककर्मी हैं, जबकि पिता जय शंकर मिश्रा प्राइवेट सेक्टर में काम करते हैं। वो अपने बेटे के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव कोशिश करते हैं। उनकी मां का नाम रेणुबाला मिश्रा है। पढ़ाई के साथ कई प्रोजेक्ट पर काम कर चुके हैं अजिंक्या अजिंक्या मिश्रा ने अब तक कई टीवी सीरियल, वेब सीरीज और फिल्मों में काम किया है। वर्तमान में वे नौवीं कक्षा में पढ़ते हैं। उनके तीन आगामी प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं, जिनमें कई फिल्में और वेब सीरीज शामिल हैं। चरपोखरी प्रखंड के इस युवा कलाकार द्वारा बॉलीवुड में अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाने के बाद पूरे भोजपुर जिले में उनकी चर्चा हो रही है। अजिंक्या की सफलता से पूरे गांव में खुशी का माहौल अजिंक्या मिश्रा के सुपरहिट फिल्म धुरंधर में अभिनय के बाद पूरे जिले और प्रखंड में खुशी की लहर है। अजिंक्या के बड़े पापा विकास मिश्रा और दादी निर्मला देवी ने दैनिक भास्कर की टीम से बात करते हुए अपने पोते की सफलता पर खुशी जाहिर की है। 3 साल की उम्र से शुरू किया अभिनय का सफर अजिंक्या के बड़े पापा विकास मिश्रा CSP संचालक हैं। उन्होंने बताया कि वो बचपन से ही प्रतिभावान बच्चा रहा है। शुरू से ही स्कूल में पढ़ने के दौरान उसे एक्टिंग से लगाव था। उन्होंने बताया तीन साल की उम्र से उसने एक्टिंग में कदम रख दिया। शुरुआत में छोटे-छोटे ऐड में उसे देखा गया और अब अपनी मेहनत और प्रतिभा के दम पर बॉलीवुड में भी कदम रख चुका है। अजिंक्या मिश्रा मिश्रा को सिंगिंग, डांस, गाना और तैराकी पसंद है। दादी का आशीर्वाद- बड़ा अभिनेता बने आंगनबाड़ी सेविका के तौर पे काम कर रहीं अजिंक्या की दादी निर्मला देवी ने बताया कि जब भी उससे बात होती है तो वो कहता है “दादी मुझे आशीर्वाद दो मैं बड़ा हीरो बनूं।” परिवार वाले उसे एक कलाकार के तौर पर देख कर हमें बहुत खुशी और होता है। फिल्म की कहानी फिल्म की कहानी 1999 में हुए IC-814 विमान अपहरण और 2001 के भारतीय संसद हमले की पृष्ठभूमि से प्रेरित है। कहानी की शुरुआत भारतीय खुफिया एजेंसी के प्रमुख अजय सान्याल (आर माधवन) से होती है, जो पाकिस्तान में चल रहे आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड नेटवर्क को खत्म करने की योजना बनाते हैं। इसके लिए उन्हें एक ऐसे युवक की आवश्यकता होती है, जिसकी कोई पहचान न हो और जो किसी अपराध में फंसा हुआ हो। उनकी तलाश पंजाब के 20 साल के हमजा (रणवीर सिंह) तक पहुंचती है, जो जेल में बंद है। हमजा को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और मिशन के लिए पाकिस्तान भेजा जाता है। पाकिस्तान में हमजा का सामना ल्यारी के खतरनाक अंडरवर्ल्ड से होता है, जहां उसे गैंगस्टर रहमान डकैत (अक्षय खन्ना) और कराची के एसपी चौधरी असलम (संजय दत्त) जैसे खतरनाक लोगों से निपटना पड़ता है। फिल्म का पहला भाग गैंगस्टर दुनिया, अपराध और हिंसा को दर्शाता है, जबकि फिल्म का दूसरा पार्ट जासूसी, धोखे और षड्यंत्र से भरा है। कहानी दर्शकों को अंत तक उत्सुक बनाए रखती है कि क्या हमजा अपने मिशन में सफल होता है और कैसे वह अंडरवर्ल्ड का सफाया करता है। फिल्म में अभिनय र आदित्य धर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल और संजय दत्त जैसे बड़े कलाकार शामिल हैं। अजिंक्या ने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी है। णवीर सिंह हमजा के किरदार में पूरी तरह फिट बैठते हैं। उनका लुक, बॉडी लैंग्वेज और एक्शन एनर्जी दर्शकों को पूरी फिल्म में बांधे रखती है। कई सीन्स में उनका दमदार प्रदर्शन फिल्म का आकर्षण बनता है। अक्षय खन्ना विलेन के रूप में खतरनाक और प्रभावशाली हैं। उनके हर संवाद और एंट्री में जोश और डर दोनों महसूस होते हैं। संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और आर माधवन की उपस्थिति और अभिनय फिल्म की कहानी को विश्वसनीय बनाते हैं। सारा अर्जुन छोटे स्क्रीन टाइम के बावजूद उन्होंने अपने किरदार में स्वाभाविकता और भावनात्मक पहलू जोड़ा, जो फिल्म के गंभीर हिस्सों को और असरदार बनाता है।
