नक्सलियों के खिलाफ छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर बड़ा ऑपरेशन चल रहा है। जिस कर्रेगुट्टा पहाड़ी को जवान घेर रहे हैं, वहां नक्सल संगठन के टॉप लीडर्स के भी के होने का दावा है। नक्सल संगठन की सबसे बड़ी कमेटी पोलित ब्यूरो और पोलित ब्यूरो सचिव से लेकर सेंट्रल कमेटी जैसे बड़े पद में आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के ही नक्सली हैं। कम्युनिस्ट पार्टी की नीतियों के अनुसार सीपीआई (माओवादी) का सर्वोच्च फैसला लेने वाला निकाय पोलित ब्यूरो है। पोलित ब्यूरो में 5 और सेंट्रल कमेटी में 18 नक्सली हैं। महज डेढ़ साल पहले ही बस्तर के माड़वी हिड़मा को सेंट्रल कमेटी में जगह दी गई है। कैसे नक्सल संगठन काम करता है, कौन है इसमें प्रमुख लीडर और कितने लाखों-करोड़ों के इनामी नक्सली हैं सब आपको बताएंगे इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में- छत्तीसगढ़ से हिड़मा इकलौता जो टॉप-2 टीम में नक्सल सूत्रों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में करीब 40 सालों में हिड़मा ही इकलौता ऐसा नक्सली है जिसे संगठन के टॉप-2 टीम (सेंट्रल कमेटी) में जगह मिली है। वो भी तब जब नक्सल संगठन में अंतर्कलह चली। तब जब बस्तर के नक्सलियों को सिर्फ ढाल के रूप में इस्तेमाल करने की बात उठने लगी। वहीं DVCM के पद से देवा बारसे का प्रमोशन कर उसे DKSZCM कैडर में शामिल कर कमांडर बनाया गया। सक्रिय नहीं गणपति, सुदर्शन की मौत नक्सल सूत्रों की मानें तो पोलित ब्यूरो सदस्य गणपति साल 2004 से लेकर 2018 तक नक्सल संगठन की कमान संभाला था। हालांकि, 2018 के बाद ऐसी खबरें आईं थी कि गणपति बीमार है, सरेंडर करने वाला है। बाद में नक्सल संगठन की ओर से जारी एक प्रेस नोट में इसे गलत बताया गया था। तब से लेकर अब तक गणपति की कोई खबर नहीं है। वो जिंदा है या मारा गया इसकी पुलिस के पास भी कोई खबर नहीं है। इसी तरह करीब 2 साल पहले कट्टम सुदर्शन की भी मौत हो गई है। नक्सलियों ने खुद प्रेस नोट जारी कर इसकी जानकारी दी थी। कट्टम ने किसी गंभीर बीमारी की वजह से दम तोड़ा था। गणपति और कट्टम सुदर्शन की जगह नक्सलियों ने अब किसे स्थान दिया है फिलहाल अभी तक यह स्पष्ट नहीं है। क्योंकि नक्सलियों की तरफ से भी अब तक इस पर कोई जानकारी नहीं आई है। हिड़मा का हुआ एनकाउंटर तो हो जाएगा सफाया माड़वी हिड़मा बस्तर के जल-जंगल-जमीन से अच्छी तरह वाकिफ है। बस्तर में नक्सलवाद के पैर पसारने और संगठन विस्तार में हिड़मा का सबसे ज्यादा योगदान रहा है। हिड़मा का एनकाउंटर होता है या फिर गिरफ्तार हो जाए तो संभव है कि बस्तर से नक्सलवाद का सफाया आसान होगा। हिड़मा ही आदिवासियों को हथियार पकड़वाने और बस्तर में माओवाद संगठन को जिंदा रखने की एक कड़ी है। पुलिस की सूची में ये मोस्ट वांटेड है। डेढ़ साल में मारे गए 400 नक्सली, इनमें बस्तर के ट्राइबल्स ज्यादा तेलंगाना से बस्तर आए नक्सलियों ने यहां के आदिवासियों को हथियार पकड़वाए और खुद के लिए सुरक्षा कवच तैयार किया। अब पुलिस फोर्स के साथ फ्रंट लाइन में बस्तर के ही नक्सली लड़ रहे और मारे जा रहे हैं। तेलुगु कैडर के नक्सली बचकर निकल रहे हैं। हमेशा यह बात उठी है कि बस्तर के नक्सलियों का इस्तेमाल ढाल के रूप में किया जा रहा है। तेलंगाना का कोई ACM, DVCM रैंक का युवा नहीं है जो लड़ाकू हो। या यूं कहें कि वहां फ्रंट लाइन में लड़ने वालों की संख्या लगभग खत्म हो गई है। …………………………….. नक्सलियों से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… नक्सलियों के लिए शांतिवार्ता करने वालों की पूरी प्रोफाइल:टीम में जज, नेता और प्रोफेसर; एक पर नक्सलियों से सांठगांठ पर UAPA लगा छत्तीसगढ़-तेलंगाना बॉर्डर पर स्थित कर्रेगुट्टा पहाड़ में जहां छत्तीसगढ़ की फोर्स नक्सलियों के खिलाफ अकेले लड़ रही है। वहीं तेलंगाना में सबसे बड़े ऑपरेशन को गलत ठहराया जा रहा है। यहां ऑपरेशन रोकने के लिए शांतिवार्ता की तैयारी की जा रही है। शांतिवार्ता समिति में जज, प्रोफेसर जैसे लोग भी शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर
