छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन से 2 ननों की गिरफ्तारी मामले में एक नया मोड़ आया है। ननों के साथ पकड़ाई 3 युवतियों में से एक युवती का बयान सामने आया है। नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ की रहने वाली युवती कमलेश्वरी ने कहा है कि हमें कोई अपहरण कर नहीं ले जा रहा था। मर्जी से आगरा जा रहे थे। कमलेश्वरी ने कहा कि ननों पर झूठा आरोप लगाया गया है। हमें मारकर जबरदस्ती बयान लिया गया। मेरा पूरा परिवार पिछले 5-6 साल से ईसाई धर्म को मान रहा है। बता दें कि दुर्ग जेल में बंद ननों से मिलने आज केरल के चार सांसद रायपुर पहुंचे हैं। वे लगभग 11 बजे मुलाकात करने जाएंगे। इसके बाद रायपुर में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे। केरल के चार सांसद दुर्ग जेल में बंद ननों से मिलेंगे केरल के चारों सांसद आज दुर्ग जेल में बंद ननों से मुलाकात करेंगे। वहीं रायपुर में दोपहर करीब 3 बजे ननों की गिरफ्तारी को लेकर प्रदर्शन की तैयारी है। इस विरोध प्रदर्शन में केरल सांसदों के साथ कांग्रेस सह-प्रभारी जरिता लैतफलांग समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता मौजूद रहेंगे। जबरदस्ती धर्मांतरण का आरोप लगाया- कमलेश्वरी कमलेश्वरी प्रधान का कहना है कि मेरे साथ 2 और युवतियां थीं, यानी हम 3 लोग थे। वो दोनों युवतियां दोबारा दुर्ग गईं हैं। जबरदस्ती धर्मांतरण का आरोप लगाया गया। ननों के साथ हम अपने माता-पिता और अपनी मर्जी से आगरा जा रहे थे। मेरे साथ कि उन दोनों युवतियों को ज्यादा डराया, धमकाया गया था। कमलेश्वरी का कहना है कि हम आगरा में अस्पताल में सिस्टर और मरीजों के लिए खाना बनाने और उनकी देखरेख करने के लिए जा रहे थे। कैसे हुआ विश्वास? कमलेश्वरी प्रधान ने कहा कि, कुछ साल पहले मेरी मां बहुत ज्यादा बीमार थी। अस्पताल लेकर गए, अलग-अलग गांवों में भी देसी इलाज करवाए लेकिन ठीक नहीं हुईं। जब यहां गए (चर्च) तो एक दिन में इलाज हो गया। एक दिन में ठीक हो गईं। जिसके बाद हमारा ईसाई धर्म के प्रति विश्वास बढ़ गया। पूरा परिवार इस धर्म को मानने लगा। अब जानिए क्या है पूरा मामला 25 जुलाई को दुर्ग रेलवे स्टेशन में धर्मांतरण और ह्यूमन ट्रैफिकिंग को लेकर जमकर बवाल हुआ था। 2 मिशनरी सिस्टर (नन) और एक युवक पर 3 आदिवासी युवतियों को UP के आगरा में काम दिलाने के बहाने बेचने ले जाने का आरोप लगाते हुए बजरंग दल ने पकड़ा था। मामला भिलाई थाना-3 के दुर्ग जीआरपी चौकी का है। जानकारी के मुताबिक नारायणपुर की युवतियों को आगरा ले जाने वालों का नाम सुखमन मंडावी और मिशनरी सिस्टर प्रीति और वंदना है। ये तीनों लोग कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति नाम की युवती को आगरा लेकर जा रहे थे। फिलहाल दोनों नन दुर्ग जेल में बंद है। …………………………. इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… जेल में बंद ननों से मिलने पहुंची बृंदा करात:कहा- BJP ईसाई समुदाय को टारगेट कर रही; बजरंग दल ने गलत तरीके से विदेशी बताया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सीनियर नेता बृंदा करात दुर्ग जेल में बंद ननों से मिलने पहुंची। उन्होंने कहा कि ननों को झूठे, नकली केस में फंसाया गया है। ये दोनों नन सालों से गरीबों के बीच सेवा कर रही थीं और उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…
