पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में 500 से ज्यादा गीत लिखने वाले और 150 सिंगर को हिट बनाने वाले निम्मा लोहारका (48) निधन हो गया। पैतृक गांव में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से उनकी सेहत ठीक नहीं चल रही थी। निम्मा लोहारका का पूरा नाम निरमल सिंह था। 24 मार्च 1977 को उनका जन्म अमृतसर की तहसील अजनाला के गांव लोहरका में हुआ। निम्मा के पिता दर्शन सिंह और मां दलबीर कौर किसान थे। उनके देहांत से पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री में शोक की लहर है। परिवार में उनका एक बेटा है, वो सांग राइटर है। कई चैनल पर दिए इंटरव्यू में निम्मा इस बात का जिक्र कर चुके थे कि उनकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही है। कई लोगों को उन्होंने स्टार बनाया, लेकिन अंतिम समय में बहुत कम लोग काम आए। अब गन कल्चर और बदमाशी वाले गीतों का दौर शुरू हो गया है, इसलिए उनके गीतों का कोई खरीदार नहीं रहा। अंतिम समय में निम्मा को यही मलाल था कि इंडस्ट्री अपना काम निकालकर बहुत तेजी से सबको भूल जाती है। दिलजीत से लेकर नछतर गिल तक ने निम्मा के गीत गाए
निम्मा के लिखे गीत गाकर कई गायक स्टार बने। दिलजीत दोसांझ, रविंदर गरेवाल, मलकीत सिंह, फिरोज़ खान, हरभजन शेरा नछतर गिल, इंद्रजीत निक्कू, अमरिंदर गिल, लखविंदर वडाली, कुलविंदर ढिल्लों जैसे तमाम गायकों को निम्मा के लिखे गीतों से पहचान मिली। कुलविंदर ढिल्लों का गाया और निम्मा का लिखा एक गीत तो अमर हो गया है, जिसके बोले हैं…जलों पैंदी आ तरीक किसे जट्ट दी, कचैरियां च मेले लगदे (जब किसी जट्टी की कोर्ट में तारीख होती है तो वहां पर उसे देखने के लिए मैला लग जाता है)। इसी तरह दिल दित्ता नईं सी ठोकरां लवाण वास्ते, की समझावां एहना नैण कमलेयां नूं सहित पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री को हिट गीत दिए। निम्मा लोहारका के जीवन सफर के 4 पॉइंट… किसान परिवार से उठे, चौथी क्लास से गीतकारी का शौक हुआ
अमृतसर के पास बसे गांव लोहारका में पैदा हुए निम्मा ने एक इंटरव्यू में बताया था कि गांव में ही पढ़ते हुए चौथी क्लास में उनको गीत बनाने का शौक पैदा हो गया था। हालांकि उम्र छोटी थी तो एक-दो लाइन लिख पाता था। कभी पूरी गीत नहीं लिखा, लेकिन गीतकारी का बीज यहीं से पड़ा। उनका परिवार खेतीबाड़ी वाला था तो लिखने-गाने की कला विरासत में नहीं मिली, लेकिन उनके दादा पंजाबी किस्से पढ़ने और गांव की सभाओं में सुनाने का शौक रखते थे। शायद इसी ने मेरे अंदर का गीतकार जगा दिया, जिसने निरमल को निम्मा लोहारका बना दिया। 10वीं क्लास में लिख दिया था, ननकाणे वल्ल जांदे राहियो
निम्मा ने एक इंटरव्यू में किस्सा सुनाया था कि जब वह दसवीं क्लास में थे, तो उस समय स्कूल में एक नाटक होना था। इसके लिए गीत चाहिए था। ये धार्मिक नाटक था, तो इसके लिए पूरी तरह फिट होने वाला धार्मिक गीत नहीं मिल पा रहा था। मेरे स्कूल टीचर्स को ये पता चल गया था कि मैं कुछ-कुछ गीत या कविता टाइप लिखने का शौक रखता हूं। इस पर मुझे एक टीचर ने कहा कि तुम लिखने का शौक रखते हो, चलो हमारे नाटक के लिए गीत लिखो। मैंने नाटक की थीम पर गीत लिखा जो बाद में सुपरहिट हो गया। इस गीत के बोल थे-ननकाणे वल्ल जांदे राहियो। इसके बाद धीरे-धीरे अच्छे गीतकारों की किताबें पढ़ने और मशहूर गायकों को सुनने से उनकी लेखनी में धार आती रही। लुधियाना से शुरू हुए गीतकारी में संघर्ष की शुरुआत
बतौर निम्मा लोहारका ने साल 1994 में 10वीं के बाद संगीत सीखने के लिए लुधियाना का रुख किया। शुरुआती दिनों में गांव से निकलकर बड़े शहर में रहना मुश्किल लगा। इसके बाद स्थानीय गायकों की संगत ने उन्हें लेखन की ओर और अधिक प्रेरित किया। कुछ समय वे मशहूर लोक गायक दीदार संधू के गांव भरोवाल में भी रहे। यहीं रहते हुए उन्होंने अपने नाम निरमलजीत सिंह की जगह नया नाम निम्मा (घर का नाम) + लुहारका (गांव का नाम) जोड़ा। 1995 में पहला गीत रिकॉर्ड किया गया
1995 में लुधियाना में रहते हुए निम्मा लोहारका का पहला गीत रिकॉर्ड हुआ। जालंधर दूरदर्शन के कार्यक्रम ‘लोक रंग’ के लिए गायक हरभजन टाणक ने उनका पहला गीत चिठ्ठी मैं तैनूं लिखां लाल वे गाया।
दूसरा गीत गायक परगट खान ने गाया, जिसके बोल-हाए ओए रब्बा उच्चियां हवेलियां बचपन दा प्यार खोह के लै गईयां गया। इसके बाद गायक कुलविंदर ढिल्लों की एल्बम गरीबां ने की प्यार करना में निम्मा के दो गीत शामिल किए गए, जिन्हें लोगों ने खूब सराहा। 2002 में नछत्तर गिल की आवाज में आया उनका गीत असीं तेरे नाल लाईयां सी निभाउण वास्ते ने निम्मा को सारी दुनिया में पापुलर कर दिया।
