फिल्म रिव्यू – निशांची:अनुराग कश्यप की फिल्म प्यार और धोखे की कहानी, ऐश्वर्य ठाकरे का दमदार डेब्यू, एडिटिंग कमजोर और क्लाइमेक्स अधूरा

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डायरेक्टर अनुराग कश्यप की फिल्म ‘निशांची’ 80 के दशक की मसाला फिल्मों से प्रेरित है। फिल्म लगभग 2 घंटे 55 मिनट की है। इसे अजय राय, विपिन अग्रिहोत्री और रंजन सिंह ने जार पिक्चर्स के बैनर तले, फ्लिप फिल्म्स के साथ मिलकर बनाया है। फिल्म में नए एक्टर ऐश्वर्य ठाकरे लीड रोल में हैं। उनके साथ मोनिका पंवार, वेदिका पिंटो, मोहम्मद जीशान अय्यूब और कुमुद मिश्रा ने फिल्म में रोल प्ले किया है।
फिल्म की कहानी कहानी कानपुर के छोटे शहर में सेट है, जहां जुड़वा भाई बबलू और डबलू (ऐश्वर्य ठाकरे) और बबलू की गर्लफ्रेंड वेदिका पिंटो साथ में डकैती करने जाते हैं। डकैती के दौरान बबलू पकड़ा जाता है और जेल चला जाता है, जिससे उसकी जिंदगी में बड़ी कठिनाइयां आने लगती हैं। जेल के अंदर मुख्य खलनायक अम्बिका प्रसाद (कुमुद मिश्रा) अपने खास पुलिस वाले साथी (जीशान अय्यूब) के जरिए बबलू को प्रताड़ित करवा कर उसके साथी का नाम निकालने की कोशिश करता है, लेकिन बबलू कुछ नहीं बताता। फ्लैशबैक में दिखाया जाता है कि उनके पिता जबरदस्त सिंह (विनीत कुमार सिंह) का मर्डर कैसे हुआ और इसमें अम्बिका प्रसाद का क्या हाथ है। वहीं, बाहर डबलू और वेदिका पिंटो के बीच प्यार जन्म लेता है, जिससे कहानी में ट्विस्ट आता है। तीनों बबलू, डबलू और रिंकू अपने अधिकार, प्यार और सच्चाई के लिए संघर्ष करते हैं। फिल्म का क्लाइमेक्स इस बात की ओर इशारा करता है कि सच उनकी जिंदगी में क्या तूफान लाएगा।
फिल्म का डायरेक्शन और तकनीकी पहलू अनुराग कश्यप ने छोटे शहर का लोकल फ्लेवर और माहौल बखूबी पेश किया है। कैमरा और लोकेशन्स कहानी को असलीपन देते हैं। गानों पर मेहनत दिखाई देती है, लेकिन ये ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ जैसा असर नहीं छोड़ते। बैकग्राउंड म्यूजिक कुछ सीन में मदद करता है। एडिटिंग धीमी है, जिससे फिल्म लंबी और कई जगह उबाऊ लगती है। फिल्म में एक्टिंग ऐश्वर्य ठाकरे ने डबल रोल में बेहतरीन डेब्यू किया; बबलू और डबलू दोनों किरदार अलग-अलग और जीवंत हैं। मोनिका पवार ने मंजरी के रोल में फिल्म को संभाला। कुमुद मिश्रा ने अम्बिका प्रसाद में गंभीरता और खौफ पैदा किया। छोटे रोल में भी विनीत कुमार सिंह ने जान डाल दी। वेदिका पिंटो ने रिंकू के रोल में न्याय करने की पूरी कोशिश की है फिल्म की कमजोरियां फिल्म लंबी और कुछ जगह उबाऊ लगती है। सब-प्लॉट्स का जोड़ कमजोर। गाने असरदार नहीं बने। पार्ट-1 होने की वजह से क्लाइमेक्स अधूरा लगता है। निशानची बड़ी कहानी कहने की कोशिश करती है, लेकिन लंबाई, कमजोर एडिटिंग और उलझी पटकथा इसे पूरी तरह असरदार नहीं बनाती। ऐश्वर्य ठाकरे का डेब्यू शानदार है और अनुराग कश्यप की स्टाइल, मोनिका पवार, कुमुद मिश्रा, विनीत कुमार सिंह और वेदिका पिंटो की एक्टिंग फिल्म को पकड़ कर रखती है।

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