सरकारी संस्थानों में उच्च शिक्षा की बदहाल व्यवस्था और आर्थिक तंगी के कारण ग्रामीण इलाकों के छात्र प्रतिदिन जिला मुख्यालय स्थित कोचिंग सेंटरों तक पहुंचते हैं। लेकिन बसों में सीट न मिलने और रियायती किराए की मजबूरी उन्हें छत पर बैठकर खतरनाक सफर करने के लिए विवश कर देती है।
