बालोद जिले में जिला पंचायत चुनाव को लेकर रोचक मुकाबला देखने को मिल रहा है। जिले के पहले जिला पंचायत उपाध्यक्ष रहे कांग्रेस नेता संजय चंद्राकर 5 साल बाद एक बार फिर अपनी पुरानी सीट (वार्ड नंबर 10) से चुनावी मैदान में उतरे हैं। इस सीट पर भाजपा ने शहर निवासी तोमन साहू को मैदान में उतारा है, जो लगभग 10 साल पहले नगर पालिका पार्षद का चुनाव हार चुके हैं। यह सीट पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित है और अब तक इस पर किसी साहू समाज के प्रत्याशी का कब्जा नहीं हुआ है। पहले चंद्राकर और फिर सिन्हा का यहां प्रतिनिधित्व रहा है। यहां ग्रामीण और शहरी प्रत्याशी के बीच मुकाबला संजय चंद्राकर, जो विधानसभा की दावेदारी भी कर चुके हैं, की उम्मीदवारी भाजपा के लिए चुनौती मानी जा रही है। स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह मुकाबला ग्रामीण और शहरी प्रत्याशी के बीच है। जनता के सामने यह चुनाव स्थानीय गांव के निवासी और शहर में रहने वाले प्रत्याशी के बीच विकल्प प्रस्तुत करता है। यह सीट कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय चंद्राकर की पुरानी सीट होने के कारण वीआईपी सीट के रूप में जानी जाती है। पिछली बार आरक्षण के कारण चंद्राकर चुनाव नहीं लड़ पाए थे। कभी कांग्रेस तो कभी भाजपा से वोट मांगने वालों पर जनता की नजर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी ने कहा कि जिला पंचायत की सभी सीटों के लिए हम कोशिश कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा सीट हम जीत कर आएं। पिछले दो बार से यहां पर जिला पंचायत की अध्यक्ष पद पर कांग्रेस का कब्जा रहा है और हम हैट्रिक मारने की उम्मीद के साथ यहां पर मैदान में उतरे हुए हैं। बात करें जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 10 की तो यह कांग्रेस का सीट है और विपक्ष से चुनाव लड़ने वालों के लिए मैं यही कहना चाहूंगा उनके कुछ लोग विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए वोट मांगते हैं तो पंचायत चुनाव में भाजपा के लिए अब जनता ही यह तय करेगी की वोट आखिर किसको देना है। नगर पालिका लड़ चुके हैं तोमन साहू आपको बता दें कि तोमन साहू इससे पहले नगर पालिका परिषद बालोद में लगभग 10 वर्ष पूर्व नगर पालिका का चुनाव भी लड़ चुके हैं तो इसके कारण जनता असमंजस में है कि उनका वास्तविक सीट बालोद शहर है या फिर करहीभदर ग्रामीण। संशय की स्थिति मतदाताओं के मन में है।
