बिना अनुमति चिरंजीवी की तस्वीरें-वीडियो इस्तेमाल करना पड़ेगा भारी:हैदराबाद कोर्ट ने एक्टर के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा के लिए जारी किया आदेश

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हैदराबाद की सिटी सिविल कोर्ट ने मेगास्टार चिरंजीवी के व्यक्तित्व और पब्लिसिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक अस्थायी आदेश जारी किया है। इसके तहत उनके नाम, फोटो, मीम्स, नकली सामान या एआई से बने कंटेंट का बिना अनुमति इस्तेमाल करने पर रोक लगाई गई है। चिरंजीवी की लीगल टीम ने एक आधिकारिक नोट जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि एक्टर को ट्रोल करना, उनकी फोटो को मॉर्फ करना और एआई का इस्तेमाल करना दंडनीय अपराध होगा। चिरंजीवी के नाम का गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू हो गई है। कई लोगों ने कथित तौर पर मेगास्टार को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया और सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नेगेटिव अभियान चलाया। इनमें से कुछ के खिलाफ पहले ही मामले दर्ज किए जा चुके हैं। कोर्ट के आदेश के अनुसार, चिरंजीवी के लोकप्रिय उपनामों जैसे मेगास्टार, चिरु या अन्नय्या, या उनकी इमेज का किसी भी क्रिएटिव या प्रमोशनल फॉर्मेट में पूर्व सहमति के बिना उपयोग करना दंडनीय अपराध है। कोर्ट ने चिरंजीवी को भारतीय फिल्म उद्योग में सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों में से एक माना, जिनकी प्रतिष्ठा और सार्वजनिक सम्मान को प्रतिवादी पक्षों के कार्यों – ख़ास करके नामकरण, इमेजिंग, वीडियो-मीम्स और सहमति के बिना मर्चेंडाइज के कारण नुकसान पहुंचा है। आदेश में इस बात पर जोर दिया गया है कि इस तरह का शोषण और गलत बयानी, विशेष रूप से डिजिटल और एआई मीडियम के जरिए से चिरंजीवी की सम्मान और आर्थिक हितों को गंभीर अपूरणीय क्षति पहुंचाती है। आदेश में सभी प्रतिवादियों को तत्काल सूचना देने का भी निर्देश दिया गया है और आगे की कार्यवाही 27 अक्टूबर, 2025 के लिए निर्धारित की गई है। पर्सनैलिटी या पब्लिसिटी राइट्स का कोई भी उल्लंघन या मानहानि का एक्ट सिविल और क्रिमिनल कानूनों के तहत गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। टेलीविजन चैनलों, डिजिटल प्लेटफार्मों और मीडिया ऑर्गेनाइजेशन सहित सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को स्पष्ट रूप से चेतावनी दी जाती है कि दर्शकों की संख्या बढ़ाने, टीआरपी बढ़ाने या किसी भी व्यावसायिक या प्रतिष्ठा संबंधी लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से चिरंजीवी के नाम, छवि, आवाज, समानता या व्यक्तित्व विशेषताओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष उपयोग, गलत बयानी या विरूपण, स्पष्ट लिखित सहमति के बिना, कानून के तहत उपलब्ध सबसे सख्त उपायों के साथ किया जाएगा।

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