बिलासपुर ट्रेन हादसा…11 यात्रियों की मौत, 20 घायल:77KM दूरी तय कर चुकी थी ट्रेन, 8KM पहले मालगाड़ी से टकराई, डिब्बे के ऊपर चढ़ा इंजन

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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में मंगलवार को कोरबा पैसेंजर ट्रेन और एक मालगाड़ी के बीच जोरदार टक्कर हुई। बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने 11 लोगों की मौत की पुष्टि की है। वहीं 20 लोग घायल हैं। इनमें बच्चे, महिलाएं शामिल हैं। हादसा गतौरा रेलवे स्टेशन के लाल खदान के पास हुआ है। CPRO विपुल कुमार ने बताया कि घायल यात्रियों का इलाज रेलवे अस्पताल, सिम्स और अपोलो में जारी है। रेस्क्यू टीम ने कई यात्रियों को बोगी से सुरक्षित निकाला। पैसेंजर ट्रेन की बोगी को गैस कटर से भी काटा गया है। बोगी में फंसे 2 लोग भी निकाल लिया गया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हादसे की जानकारी ली है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए और गंभीर घायलों को 5 लाख रुपए का मुआवजा घोषित किया है। वहीं छत्तीसगढ़ सरकार ने मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार की आर्थिक सहायता राशि देने का ऐलान किया है। वहीं कोरबा से बिलासपुर रूट पर ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया गया है। आजाद हिंद एक्सप्रेस, हीराकुंड एक्सप्रेस, बिलासपुर-टाटा एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों का समय 4-5 घंटे देरी से चल रहा है। इस रिपोर्ट में विस्तार से पढ़िए अब तक क्या-क्या हुआ, कहां-कहां यात्री घायल हैं, कहां-कहां इलाज चल रहा है, कैसे है अभी स्थिति ? सबसे पहले जानिए कैसे हुआ हादसा ? दरअसल, तेज रफ्तार कोरबा पैसेंजर ट्रेन कोरबा से बिलासपुर जा रही थी। करीब 77 किलोमीटर की दूरी तय कर ली थी। बिलासपुर पहुंचने के लिए 8 किलोमीटर तय करना बाकी था। 4 बजे के आसपास कोरबा पैसेंजर ट्रेन गतौरा रेलवे स्टेशन के लाल खदान के पहुंची। इसी बीच जिस रूट से पैसेंजर ट्रेन की गुजरने वाली थी, उसी रूट पर एक मालगाड़ी खड़ी थी। तेज रफ्तार से बिलासपुर की ओर बढ़ रही पैसेंजर ट्रेन ने टक्कर मार दी। हादसा इतना भयंकर था कि पैसेंजर ट्रेन का इंजन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया। अब हादसे से जुड़ी ये 3 तस्वीरें देखिए… हादसे के बाद यात्रियों को निकाला गया बोगी से बाहर इस दौरान हादसे में 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि 20 लोग घायल हैं। इनमें 5 लोग बिलासपुर की रहने वाले हैं, जबकि बाकी यात्री रायपुर और जांजगीर-चांपा के रहने वाले हैं। वहीं मृतकों की पहचान अभी तक नहीं हो सकी है। मरने वालों की जानकारी जुटाई जा रही है। रेलवे के मुताबिक घायलों को बिलासपुर के रहने वाले 5 को सिम्स अस्पताल, 2 लोगों को अपोलो हॉस्पिटल और बाकी 6 लोगों को रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इनमें से कई लोगों की हालत गंभीर है।हालांकि इनके अलावा कई लोगों को छुट्टी मिल चुकी है। प्रत्यक्षदर्शी ने बताया- हादसे में कई लोग घायल तखतपुर के यात्री देवकुमार धुरी ने बताया कि कोटमीसुनार से बिलासपुर जाने के लिए आ रहा था। इसी बीच अचानक से ट्रेन में धक्का लगा। बाहर झांककर देखा तो पता चला कि इंजन मालगाड़ी के ऊपर चढ़ गया था। आनन-फानन में अपने सामान लेकर हम लोग नीचे कूद गए। इस दौरान बोगी में फंसे लोगों को बाहर निकलने में मदद की। हम अपने घर जाने के लिए अब दूसरी व्यवस्था देख रहे हैं। हादसे में कई लोग घायल हुए हैं। मौके पर चीख-पुकार मच गई थी। कुछ देर बाद रेलवे के अधिकारी और रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। लोगों को बाहर निकाला गया। बिलासपुर में ट्रेन हादसे से 4-5 घंटे देरी से चली गाड़ियां कोरबा से बिलासपुर रूट पर ट्रेनों का संचालन ठप कर दिया गया था। बिलासपुर ट्रेन हादसे की वजह से आजाद हिंद एक्सप्रेस, हीराकुंड एक्सप्रेस, बिलासपुर-टाटा एक्सप्रेस, अमरकंटक एक्सप्रेस समेत कई ट्रेनों का समय 4-5 घंटे देरी से चला। इससे यात्री स्टेशन पर परेशान होते रहे। वहीं बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को ट्रेनों की सही जानकारियां भी नहीं दी जा रही थी, जिससे यात्री इस प्लेटफॉर्म से उस प्लेटफॉर्म में भटकते दिखे। वहीं रायगढ़ और कोरबा में भी एक्सप्रेस ट्रेनों को रोक लिया गया था, जिसकी वजह से यात्री परेशान होते रहे। 3 महीने पहले ही ऑटोमैटिक सिग्नलिंग से लैस किया गया था रूट दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुताबिक कोरबा-बिलासपुर रूट समेत बिलासपुर जोन में 3 महीने पहले ही 462 किलोमीटर का दायरा मॉडर्न तकनीक से लैस हो गया था। एक ट्रैक पर एक साथ एक से अधिक ट्रेनें चलने का रेलवे ने दावा भी किया था, लेकिन हादसे ने रेलवे की पोल खोल दी। दक्षिण-पूर्व मध्य रेलवे ने बताया था कि यात्रियों को बेहतर, सुविधाजनक, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव देने के लिए लगातार प्रयासरत है। यात्रियों को बेहतर सेवाएं देने के साथ-साथ क्षमता में वृद्धि के लिए आधुनिक और उन्नत तकनीक का इस्तेमाल भी किया गया है। अब ग्राफिक्स के जरिए समझिए भारत में हादसों के बारे में ?

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