सुबह के 8-9 बजे थे। रायपुर के भनपुरी में रहने वाले राहुल जांगड़े (40) सुबह की डेली रूटीन फॉलो कर रहे थे। पत्नी ने चाय-नाश्ते के लिए पूछा, तो जवाब दिया कि ब्रश करके आता हूं। इसके बाद पल-पल दिल के पास…गाना गुनगुनाते हुए वॉशरूम के अंदर गए। पूरी फुर्ती के साथ ब्रश में टूथ पेस्ट लगाया और दांत साफ करने। इसी बीच अचानक उनके गले में बहुत तेज दर्द उठा। गले से बमुश्किल आवाज निकल पा रही थी, वो किसी तरह किचन तक पहुंचे और वहीं गिर पड़े। पत्नी ने देखा कि राहुल की गर्दन किसी गुब्बारे की तरह फूल रही है। उनका शरीर अकड़ा जा रहा है, बिना देरी किए पत्नी-बेटे राहुल को मेकाहारा अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां जांच में पता चला कि उनके गर्दन की मुख्य धमनी (कैरोटिड ऑर्टरी) फट गई है। डॉक्टर्स भी ये केस देखकर हैरान थे, पहली बार किसी व्यक्ति कि धमनी ब्रश करते हुए फटी थी। युवक को अस्पताल के हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी विभाग में ट्रांसफर किया गया। यहां सभी तरह की जांच के बाद डैमेज धमनी की सर्जरी की गई। डॉक्टर्स के अनुसार गाय के दिल की झिल्ली से पैच बनाकर धमनी को रिपेयर किया गया। 5 घंटे की कठिन सर्जरी के बाद मरीज को नई जिंदगी मिली। राहुल अभी सुरक्षित हैं और खतरे से बाहर हैं। बिना किसी प्री मेडिकल हिस्ट्री के इस तरह गले की धमनी फट जाने का पहला केस 1982 के आस-पास दर्ज किया गया था। इसके बाद यानी 44 सालों में सिर्फ 10 से 12 केस ही रिपोर्ट किए हैं। 1997 में सेक्स के दौरान फट गई थी गले की धमनी वहीं, साल 1997 में भी एक ही ऐसा केस रिपोर्ट हुआ, जहां 27 साल के एक युवक की गले की धमनी सेक्स करने के दौरान फट गई थी। मेकाहारा के सीनियर हार्ट, चेस्ट, वैस्कुलर सर्जन और HOD डॉ. कृष्णकांत साहू बताते हैं कि गले की धमनी का इस तरह रेप्चर होना रेयरेस्ट ऑफ रेयर है। ये बेहद खतरनाक कंडीशन है। गोल्डन आवर वाले केस में इसे काउंट किया जाता है। मिनट की देरी और पेशेंट की मौत हो सकती है। 60-70% तक डेथ रेट है। खास बात ये है कि ऑपरेशन के दौरान मरीज की जान बचाने के लिए गाय के दिल की झिल्ली से बने पैच का इस्तेमाल किया गया। इस रिपोर्ट में जानिए, कैसे इस रेयर केस को मेकाहारा के डॉक्टरों ने डील किया, अचानक धमनी फटने के पीछे क्या कारण होते हैं और क्यों ये रेयर है ? रिपोर्ट आते ही हैरानी में पड़ गए डॉक्टर्स डॉ के के साहू ने बताया कि, राहुल की कंडीशन देखते हुए सबसे पहले सीटी एंजियोग्राफी कराई गई। जिससे गले की नसों और धमनियों (ब्लड वेसल्स) को साफ-साफ देखा जा सके। रिपोर्ट देखकर हम भी चौंक गए। मरीज की दायी कैरोटिड ऑर्टरी पूरी तरह फट चुकी थी। धमनी पहचानना मुश्किल हो गया था डॉ साहू ने बताया कि ऑपरेशन से ही जान बच सकती थी, लेकिन ये बेहद जोखिम भरा था। गर्दन में खून का इतना थक्का जमा हो चुका था कि धमनी को पहचानना मुश्किल हो रहा था। जरा सी गलती से मरीज की मौके पर मौत हो सकती थी। ब्रेन में थक्का पहुंचने से लकवा या ब्रेन डेड की स्थिति भी बन सकती थी। लगभग 5 घंटे तक चले इस हाई-रिस्क ऑपरेशन में डॉक्टरों की टीम ने बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की मदद से फटी हुई कैरोटिड ऑर्टरी को रिपेयर किया। अपने आप धमनी का फटना, दुनिया में ऐसे गिने-चुने केस डॉ. साहू के मुताबिक आमतौर पर कैरोटिड ऑर्टरी रप्चर धमनियों (ऑर्टरी) के अंदर चर्बी, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम की परत (प्लाक) जमने, एक्सीडेंट, इन्फेक्शन, ट्यूमर या कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर में होता है। लेकिन यह मरीज बिल्कुल स्वस्थ था। स्पॉन्टेनियस कैरोटिड ऑर्टरी रप्चर यानी का गले की धमनी का बिना किसी बीमारी या चोट के फट जाना रेयर होता है। दुनिया में अब तक मेडिकल जर्नल्स में सिर्फ ऐसे 10 मामले दर्ज हैं। मरीज बोला- मेकाहारा के डॉक्टरों ने दूसरा जीवन दिया दैनिक भास्कर की टीम जब मेकाहारा पहुंची तो राहुल कुमार जांगड़े गलियारे में चक्कर लगा रहे थे। साथ में उनकी पत्नी और बेटा भी था। देखकर अंदाजा लगाना मुश्किल था कि राहुल कुछ वक्त पहले जिंदगी-मौत के बीच की लकीर पर खड़े थे। भास्कर से बातचीत के दौरान राहुल ने बताया कि जब दर्द हुआ तो, लगा कि जिंदा बचना मुश्किल है। मैं कुछ सोच-समझ पाने की स्थिति में नहीं था। जब तक हॉस्पिटल नहीं पहुंचा था, लग रहा था। सबकुछ पीछे छूटता जा रहा है, वापस नहीं लौट पाउंगा। डॉक्टरों से बातचीत के बाद बढ़ा हौसला डॉक्टरों ने मुझे मेरे केस के बारे में बताया। मैं भी हैरान था। डॉक्टरों ने मुझे बताया कि चीजें ठीक हो जाएंगी, बस कॉन्फिडेंस बनाकर रखना होगा। उन्होंने ऑपरेशन के रिस्क बारे में भी बताया। लेकिन डॉक्टरों से बातचीत के बाद मेरे भीतर कॉन्फिडेंस आया, मुझे फील होने लगा था कुछ नहीं होगा। डॉक्टर सब संभाल लेंगे। 1997 में आया था इस तरह का मिलता-जुलता केस साइंस डायरेक्ट में पब्लिश एक जर्नल के मुताबिक साल 1997 में में बिल्कुल इसी तरह का मिलता-जुलता केस आया था। तब 27 साल एक युवक अचानक गर्दन में सूजन बढ़ने की शिकायत के साथ इमरजेंसी विभाग (ED) पहुंचा। यह समस्या तब शुरू हुई जब वह यौन संबंध के दौरान जोर लगाने की स्थिति में था। डॉक्टरों की जांच में सामने आया कि युवक की कॉमन कैरोटिड ऑर्टरी इस दौरान अपने आप फट गई थी। धमनी फटने के कारण तेजी से खून बाहर रिसने लगा था। खून आसपास जमा होकर गुब्बारे जैसी संरचना बन गया। इसी के चलते युवक गर्दन में तेजी से सूजन बढ़ती जा रही थी। तब पैर की नस का पैच लगाकर बचाई गई थी जान डॉक्टरों ने इसके बाद तुरंत सर्जरी करने का फैसला लिया। मरीज की टांग की नस का एक हिस्सा लिया गया। उसी नस से बने पैच की मदद से फटी हुई कैरोटिड ऑर्टरी को रिपेयर किया गया। इस केस में भी समय पर सर्जरी होने से मरीज की जान बच गई और वह पूरी तरह स्वस्थ हो गया। अचानक धमनी फटने के पीछे कई कारण एक्सपर्ट के मुताबिक कैरोटिड ऑर्टरी रेप्चर होने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इस मामले में कोई एक कारण बता पाना मुश्किल है। कुछ स्थितियों में धमनी की दीवार पहले से ही कमजोर होती है, जिससे रेप्चर का जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा धमनी की दीवार असामान्य रूप से मोटी या कमजोर बनने से भी रक्त प्रवाह के दबाव पर दीवार फट सकती है। बैक्टीरिया या वायरस धमनी की दीवार में सूजन या दोष पैदा कर सकते हैं, ऐसे में भी खतरा बना रहता है। या जब धमनी पर अचानक अधिक दबाव पड़ता है। बुजुर्गों में खासकर प्लाक जमने से धमनी की दीवार कमजोर या कठोर हो सकती है और फट सकती है। संस्थान ने कहा- ये बहुत बड़ी सफलता इस सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर ने हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे संस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
