महाभारत युद्ध समाप्त हो चुका था, लेकिन अश्वत्थामा के भीतर अपने पिता द्रोणाचार्य की मृत्यु का प्रतिशोध सुलग रहा था। एक रात उसने पांडवों के शिविर पर हमला कर दिया और सो रहे द्रौपदी के पांचों पुत्रों (पांडवों के उत्तराधिकारियों) की निर्मम हत्या कर दी। इस समाचार ने पांडव खेमे में शोक की लहर दौड़ दी।
