घटना को समय बीतने के बाद भी जिन घरों में मौतें हुई हैं, वहां का माहौल अब भी भारी है। परिवार अपने लोगों को खोने के दर्द से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, जो मरीज अस्पताल से ठीक होकर लौटे हैं, वे भी पूरी तरह निश्चिंत नहीं हो पा रहे। हल्की तबीयत बिगड़ने पर ही डर बढ़ जाता है।
