महादेव सट्‌टा…7 महीने प्लानिंग के बाद CBI रेड:प्रोटेक्शन-मनी लेने-देने वाले ही टारगेट, प्रमोटर्स ने कमाए 6 हजार करोड़, सिंडिकेट के 31 मेंबर रडार पर

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महादेव सट्टा ऐप केस में CBI ने प्रोटेक्शन मनी लेने और देने वालों के करीब 60 ठिकानों पर एक साथ रेड की। इसमें सौम्या चौरसिया, सूरज कश्यप, IPS आरिफ शेख, अभिषेक पल्लव, आनंद छाबड़ा, प्रशांत अग्रवाल और विजय भाटिया समेत 17 लोगों के नाम शामिल हैं। EOW की चार्जशीट के मुताबिक अफसरों तक उनके जूनियर पैसा पहुंचाते थे। वहीं इस सिंडिकेट में शामिल 30 संदेहियों को जांच के दायरे में अबतक नहीं लिया गया है। CBI सूत्रों का कहना है, कि आने वाले दिनों में छूटे संदेहियों के खिलाफ भी एक्शन होगा। CBI सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी की टीम ने 7 महीने EOW की चार्जशीट की पड़ताल की, इसके बाद एक साथ छत्तीसगढ़, दिल्ली, MP और पश्चिम बंगाल में छापा मारा।​​​​​ ED की चार्जशीट के मुताबिक प्रमोटर्स ने 6 हजार करोड़ रुपए कमाए हैं। महादेव सट्‌टा ऐप सिंडिकेट में कौन-कौन शामिल था, अब तक सिंडिकेट के किन सदस्यों के घर टीम जांच करने नहीं पहुंची है, पढ़िए इस रिपोर्ट में ?… अब जानिए एक साथ ED की रेड की कहानी दरअसल, EOW ने 19 अप्रैल 2024 को महादेव सट्टा ऐप की कार्रवाई का कोर्ट में चालान पेश किया था। EOW की जांच में पता चला कि सिंडिकेट के सदस्य हर महीने 450 करोड़ कमाते थे। सिंडिकेट के सदस्यों की यह कमाई लॉकडाउन के बाद की थी। सिंडिकेट में 4 हजार से ज्यादा लोग जुड़े थे। देशभर में इसकी 400 से ज्यादा ब्रांच संचालित हो रही हैं। इसके बाद 26 अगस्त 2024 को छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने महादेव ऐप केस की जांच CBI को सौंप दी थी। CBI ने इस केस की जांच शुरू की। EOW की जांच और चालान को केस का आधार बनाया। CBI के अफसरों ने 7 महीने तक जांच की। इसके बाद 17 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। 26 मार्च की सुबह से CBI की रेड देर रात तक चलती रही। सर्राफा कारोबारी की मदद से पहुंची प्रोटेक्शन मनी वहीं EOW की जांच के मुताबिक महादेव बुक के प्रमोटर्स ने राजनेता, ब्यूरोक्रेट्स और पुलिस अधिकारियों तक प्रोटेक्शन मनी (कार्रवाई से बचने के लिए पैसा) पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ के सर्राफा कारोबारी की मदद ली। इसमें पता चला है कि श्री आभूषण ज्वैलर्स के मालिक सुनील कुमार दम्मानी को हवाला के जरिए प्रोटेक्शन मनी पहुंचती थी। इसे वह चंद्रभूषण वर्मा, राहुल वक्टे के माध्यम से कलेक्ट करता था। इस काम में रितेश कुमार यादव और किशन लाल वर्मा भी मदद करते थे। अब जानिए महादेव बुक में किस तरह खिलाते थे ऑनलाइन सट्‌टा महादेव बुक के प्रमोटर ऑनलाइन सट्‌टा खिलाने का काम पैनल ऑपरेटर के जरिए करते हैं। फ्रेंचाइजी मॉडल के आधार पर पैनल/ब्रांच देकर पैनल ऑपरेटर बनाए गए हैं। हर पैनल ऑपरेटर को एक मास्टर आईडी दी जाती है। इसके बाद शुरू होता था ऑनलाइन सट्‌टे का प्रोसेस। वॉट्सऐप ग्रुप से दी जाती है तकनीकी जानकारी पैनल ऑपरेटर के पास होती है मास्टर आईडी अब जानिए ED ने इस केस में क्या कहा और किया ? ED करीब 16 महीने से महादेव ऐप से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच कर रही है। प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान ED ने आरोप लगाया था कि सिंडिकेट को संरक्षण देने के वालों में उच्च पदस्थ राजनेता और नौकरशाह शामिल हैं। ED के अनुसार, इस मामले में करीब 6,000 करोड़ रुपए की आय का अनुमान था। शेयर बाजार में निवेश किया पैसा प्रमोटरों ने फर्जी शैल कंपनियां बनाई

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