रायपुर पुलिस ने मोस्टवांटेड हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र उर्फ रूबी तोमर को ग्वालियर के एक पॉश सोसाइटी के फ्लैट से गिरफ्तार किया गया। वह आलीशान फ्लैट में नौकरों के बीच रहता था। बालकनी में निकलते ही पुलिस ने लोकल पुलिस के साथ रेड मारा और उसे हिरासत में लिया। रविवार को जुलूस के दौरान पत्नी शुभ्रा सिंह तोमर जमकर बवाल काटा। उनसे कहा कि मिलकर पत्नी को मार डालो। वीरेंद्र तोमर इतना चालाक था कि वह इस बात को जानता था कि यदि वह फ्लैट से बाहर निकलता है तो लोगों की नजर में आ जाएगा। जिसके बाद पुलिस उसे गिरफ्तार कर लेगी। बावजूद क्राइम ब्रांच और पुरानी बस्ती को आरोपी के लोकेशन की सूचना मिल गई। इस इनसाइड स्टोरी में जानिए…. किस तरह पुलिस ने 162 दिनों से फरार चल रहे वीरेंद्र तोमर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद अचानक क्यों तोमर की पत्नी सब मिलकर मेरे पति को मार डालो कहने लगी? रायपुर SSP लाल उमेद सिंह ने बताया कि सूदखोरी, रंगदारी, मारपीट और अवैध हथियार रखने के मामले में रायपुर की तेलीबांधा और पुरानी बस्ती पुलिस लंबे समय से दोनों भाई वीरेंद्र और रोहित तोमर को खोज रही थी। इनके खिलाफ अलग-अलग थानों में करीब एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज हैं। पुलिस की अलग-अलग टीम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और मध्य प्रदेश में रेड कार्रवाई कर चुकी थी। लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लग रहा था। परिजनों को नहीं करते थे डायरेक्ट संपर्क SSP ने बताया कि आरोपी इतने शातिर थे कि वे लगातार अपना ठिकाना बदल रहे थे। वे घरवालों से डायरेक्ट फोन के माध्यम से भी संपर्क में नहीं थे। जिससे पुलिस को लोकेशन ट्रेस करने में मशक्कत करनी पड़ रही थी। इस बीच अचानक पुलिस को टेक्निकल एनालिसिस और मुखबिर से खुफिया सूचना मिली कि वीरेंद्र तोमर मध्यप्रदेश के ग्वालियर या दिल्ली में छिपा हुआ हैं। रायपुर से फौरन क्राइम ब्रांच की 2 अलग-अलग टीमें दिल्ली और ग्वालियर के लिए रवाना की गई। बालकनी में आते ही फंसा तोमर पुलिस अफसरों के मुताबिक, ग्वालियर स्थित सिरोल थाना इलाके में विंडसर हिल्स टाउनशिप के एक आलीशान फ्लैट में निगरानी करना शुरू किया गया। करीब 6-7 दिनों तक पुलिस इस बात को पुख्ता नहीं कर पा रही थी कि वीरेंद्र तोमर घर के भीतर मौजूद है। घर में कई नौकरों का आना-जाना रहता था। लेकिन तोमर कहीं नजर नहीं आ रहा था। यहां तक की वह बालकनी में भी नहीं दिखता था। पुलिसकर्मी फ्लैट में लगातार नजर बनाए हुए थे। तभी अचानक शनिवार को अपने बाहर सुख रहे कुछ कपड़े लेने वीरेंद्र तोमर बालकनी में आया। पुलिसवालों ने उसे पहचान लिया। फौरन टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर फ्लैट में रेड मारा। तोमर को हिरासत में लिया गया और रविवार को रायपुर लेकर पहुंची। शुरुआती बातचीत में सामने आया है कि तोमर पुलिस अफसरों को कह रहा था कि वह सरेंडर करने वाला था। हिस्ट्रीशीटर की पत्नी बोली-सब मिलकर मार डालो पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर वीरेंद्र सिंह तोमर का भाटागांव इलाके में जुलूस निकाला। इस दौरान वह लंगड़ाते हुए चल रहा था। बनियान फटी हुई थी। अचानक वीरेंद्र तोमर बेहोश हो गया। वहां पर मौजूद वीरेंद्र तोमर की पत्नी शुभ्रा सिंह तोमर बौखला गई। वह मीडिया के सामने जोर-जोर से चिल्लाने लगी की उसके पति को मिलकर मार डालो। उसने ऐसी क्या गलती की है जो उसका जुलूस निकाला जा रहा है। वह पुलिस पर गलत कार्रवाई का आरोप लगाकर चीखने लगी। स्थिति बिगड़ने से पहले पुलिस ने वीरेंद्र तोमर को वापस गाड़ी पर बैठाया और रवाना हो गई। 24 घंटे के लिए पुलिस की कस्टडी में वीरेंद्र रायपुर पुलिस ने सूदखोर वीरेंद्र तोमर को रविवार को जिला कोर्ट में पेश किया। पुलिस ने कोर्ट से 7 दिनों की रिमांड मांगी थी। लेकिन कोर्ट से पुलिस को एक दिन की रिमांड मिली है। सोमवार को फिर से तोमर को कोर्ट में पेश किया जाएगा। फिलहाल, पुलिस कस्टडी में एक रात तोमर को बिताना होगा। रोहित तोमर अब भी फरार इससे पहले ACCU कार्यालय में भी वीरेंद्र तोमर से पूछताछ की गई। वीरेंद्र का भाई रोहित तोमर अभी भी फरार है। एक टीम रोहित तोमर की तलाश में जुटी है। दोनों भाइयों पर रायपुर के कई थानों में 16 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें चाकूबाजी, मारपीट, हत्या का प्रयास, धमकी, धोखाधड़ी और ब्लैकमेलिंग जैसे मामले शामिल हैं। हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज की छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा ने रायपुर में ब्लैकमेलिंग और सूदखोरी के केस में हिस्ट्रीशीटर रोहित तोमर और वीरेंद्र तोमर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है, जबकि दोनों की पत्नियां और भतीजे को अग्रिम जमानत मिल चुकी है। इस दौरान परिवार ने पुलिस पर जबरन ऑर्गेनाइज्ड क्राइम में फंसाने का आरोप लगाया था। जानिए कौन है वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर वीरेंद्र सिंह उर्फ रूबी तोमर रायपुर का आदतन अपराधी है। आरोप के अनुसार, अपने छोटे भाई रोहित तोमर और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर सूदखोरी का काम करता है। आरोपी कर्जदारों से मूलधन से ज्यादा ब्याज वसूलते और पैसे नहीं देने पर मारपीट करते। वीरेंद्र सिंह तोमर पर पहला मामला 2006 में दर्ज हुआ था। पुलिस ने इसे आदतन अपराधियों की लिस्ट में डाला है। वीरेंद्र के खिलाफ 6 से ज्यादा अलग-अलग थानों में केस दर्ज है। इनमें मारपीट, उगाही, चाकूबाजी, ब्लैकमेलिंग और आर्म्स एक्ट के केस शामिल है। अब जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, करीब 5 महीने पहले प्रॉपर्टी डीलर दशमीत चावला ने वीरेंद्र के भाई रोहित तोमर के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाकर तेलीबांधा थाने में FIR दर्ज कराई थी। FIR के बाद से रोहित तोमर फरार हो गया। रोहित के फरार होने के बाद उसका भाई वीरेंद्र तोमर भी गायब हो गया था। पुलिस ने वीरेंद्र सिंह तोमर के घर की तलाशी ली तो उसके घर में अवैध हथियार पुलिस को मिला था। पुलिस ने वीरेंद्र सिंह के ऊपर आर्म्स एक्ट के तहत FIR दर्ज की थी। करीबियों के घर से जब्त किया था सोना-दस्तावेज वीरेंद्र सिंह तोमर और रोहित तोमर की फरारी के बाद पुलिस ने उनका पता लगाने के लिए उनके करीबियों के ठिकानों में रेड मारी थी। पुलिस ने करीबियों के घरों में छापेमारी के दौरान 40 करोड़ से अधिक की रजिस्ट्री के दस्तावेज, साढ़े तीन करोड़ का सोना और 10 लाख की चांदी जब्त की है। जांच में बैंक पासबुक, चेक और एटीएम भी मिले हैं। पुलिस को संदेह है कि यह संपत्ति उन लोगों की है, जिन्होंने तोमर ब्रदर्स से सूद पर पैसे लिए थे। बाद में ब्लैकमेलिंग के जरिए उनकी संपत्ति के दस्तावेज कब्जे में ले लिए गए। महिलाओं के नाम पर ब्लैंक चेक लेते थे तोमर ब्रदर्स रोहित और वीरेंद्र जब भी किसी को पैसा देते, चाहे 50 हजार रुपए क्यों न हो। उसके बदले में ब्लैंक चेक लेते थे। उसमें हस्ताक्षर करवाते और अंगूठा भी लगवाते। फिर लोगों को दबाव बनाकर उनकी जमीन, मकान, दुकान और गाड़ी अपने नाम कर लेते। हाईकोर्ट ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिका छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी रायपुर में रोहित तोमर और वीरेंद्र तोमर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है। हालांकि, दोनों की पत्नियों और भतीजे की अग्रिम जमानत मंजूर की है। सरकारी वकील ने अदालत में तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत का विरोध किया। सरकारी वकील ने बताया कि दोनों भाइयों का आपराधिक रिकॉर्ड लंबा है और उन पर लगभग 16 मामले दर्ज हैं। सरकारी वकील के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट ने तोमर बंधुओं की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। वीरेंद्र तोमर के खिलाफ 6 से ज्यादा केस दर्ज रोहित तोमर पर 9 से ज्यादा मामले दर्ज सूदखोर रोहित तोमर के खिलाफ राजेंद्र नगर, तेलीबांधा, पुरानी बस्ती, कोतवाली और गुढ़ियारी में 9 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। आरोपी सूदखोरी, मारपीट, ब्लैकमेल के मामले में जेल भी जा चुका है। सूदखोर रोहित गोल्डन मैन के नाम से जिले में मशहूर है। रसूखदारी बनी रहे, इसलिए आरोपी अपने गिरोह के साथ समय-समय पर कार्यक्रमों में भी दिखता था।
