यूरोप की सबसे ताकतवर फ्रांस-जर्मनी की जोड़ी टूटने के करीब:मेलोनी के साथ दोस्ती बढ़ा रहे जर्मन चांसलर, मैक्रों से क्यों हुए नाराज

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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से जर्मनी और फ्रांस यूरोप की सबसे ताकतवर जोड़ी मानी जाती रही है। लेकिन अब इसमें दरार आने लगी है। यूरो न्यूज के मुताबिक जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज अब इटली की दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ दोस्ती बढ़ा रहे हैं। मर्ज ने इसका इशारा दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच से ही कर दिया था। उन्होंने कहा कि 23 जनवरी को रोम में होने वाली इटली-जर्मनी समिट में वह और मेलोनी मिलकर यूरोपीय यूनियन को बेहतर और अलग तरीके से चलाने के लिए कुछ नए सुझाव सामने रखेंगे। अमेरिकी वेबसाइट द पॉलिटिको के मुताबिक मर्ज-मेलोनी दोनों ही दक्षिणपंथी सोच वाले हैं, अमेरिका के साथ रिश्तों को जरूरी मानते हैं और ट्रम्प के साथ टकराव से बचना चाहते हैं। इसके अलावा दोनों की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कुछ न कुछ नाराजगी भी है। यही वजह है कि पहले जर्मनी यूरोपीय नीति तय करने के लिए फ्रांस की ओर देखता था। लेकिन अब व्यापार, उद्योग और अमेरिका से रिश्तों जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने के लिए इटली के साथ खड़ा दिख रहा है। ट्रेड डील से फ्रांस-जर्मनी के बीच मनमुटाव बढ़ा रिपोर्ट के मुताबिक मर्ज का मेलोनी की ओर झुकाव आंशिक रूप से फ्रांस से नाराजगी की वजह से है। जर्मनी इस बात से खफा है कि फ्रांस ने दक्षिण अमेरिका के साथ होने वाले मर्कोसुर ट्रेड डील को कमजोर करने की कोशिश की। मर्कोसुर दक्षिण अमेरिका का एक क्षेत्रीय व्यापार समूह है। इसमें ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, पराग्वे जैसे देश शामिल हैं। यूरोपीय यूनियन (EU) इन देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) करना चाहता है। जर्मनी की इकोनॉमी निर्यात पर टिकी है। उसे इस समझौते में ज्यादा फायदा नजर आ रहा है। वहीं, फ्रांस इस समझौते का विरोध कर रहा है। फ्रांस में किसान बहुत बड़े राजनीतिक ताकत रखते हैं। किसान संगठनों को लगता है कि दक्षिण अमेरिका से सस्ता अनाज, डेयरी, बीफ के आयात से उनकी इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। मैक्रों सरकार को किसानों के नाराज होने का डर है। इस वजह से वे मर्कोसुर डील को टालमटोल कर रहे हैं। जर्मनी का कहना है कि सालों की बातचीत के बाद यह समझौता तैयार हुआ लेकिन फ्रांस घरेलू राजनीति और किसानों के दबाव में इसे रोक रहा है। फाइटर जेट प्रोजेक्ट को लेकर भी विवाद बढ़ा मर्कोसुर के अलावा दोनों देशों के बीच 100 अरब यूरो (10.7 लाख करोड़) के एक फाइटर जेट प्रोजेक्ट को लेकर भी विवाद है। इस प्रोजेक्ट का नाम फ्यूचर कॉम्बैट एयर सिस्टम (FCAS) है। यह एक पूरा एरियल वॉरफेयर सिस्टम है। FCAS में छठी पीढ़ी का लड़ाकू विमान, AI आधारित कमांड सिस्टम, सैटेलाइट और रडार नेटवर्क और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम जैसी एडवांस तकनीक शामिल हैं। यह सिस्टम 2040 के बाद फ्रांस के राफेल और जर्मनी-स्पेन के यूरोफाइटर की जगह लेने वाला है। 3 देशों के इस प्रोजेक्ट में फ्रांस और जर्मनी के बीच मतभेद हैं। फ्रांस चाहता है कि फाइटर जेट की डिजाइन और कंट्रोल उसके पास रहे। वहीं, उसकी कंपनी डसॉल्ट एविएशन को अहम भूमिका मिले। वहीं, जर्मनी इस प्रोजेक्ट में बराबर की हिस्सेदारी चाहता है और अपने देश की कंपनी एयरबस के लिए भी बराबर का अधिकार मांग रहा है। मर्ज ने मेलोनी को बनाया नया यूरोपीय साथी जर्मनी का अहम अखबार हांडेल्सब्लाट के मुताबिक मेलोनी अब मर्ज के लिए ‘तेजी से अहम सहयोगी’ बनती जा रही हैं। दोनों नेताओं का रवैया अमेरिका के साथ टैरिफ और ग्रीनलैंड जैसे मुद्दों पर फ्रांस से अलग है। वे अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर नहीं चाहते। इटली के पूर्व राजदूत पिएत्रो बेनासी का कहना है कि,“मेलोनी और मर्ज, ट्रम्प से बातचीत के लिए सबसे ज्यादा खुले रुख वाले यूरोपीय नेता रहे हैं। ट्रम्प के अचानक फैसलों ने इटली और जर्मनी को और करीब ला दिया है।” मेलोनी के सहयोगी नेताओं का आरोप है कि मैक्रों, ट्रम्प के मामले में दो चेहरे दिखाते हैं। सार्वजनिक मौके पर वे ट्रम्प के सामने खुद को सख्त दिखाने की कोशिश करते हैं और यूरोप को अमेरिका पर निर्भर न होने की वकालत करते हैं। लेकिन पर्दे के पीछे उनके साथ उनसे बेहतर रिश्ता रखने की कोशिश करते हैं। पिछले दिनों ट्रम्प ने मैक्रों का प्राइवेट मैसेज लीक कर दिया था। इसमें मैक्रों, ट्रम्प से रिश्ते संभालने की कोशिश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। मर्ज-मेलोनी की बढ़ती नजदीकी, रणनीति से ज्यादा मजबूरी मेलोनी ने दिसंबर 2025 में रूस की फ्रीज की हुई संपत्तियों से यूक्रेन की मदद करने के मर्ज के प्रस्ताव का समर्थन नहीं किया था। वित्तीय नीतियों पर भी दोनों देशों में मतभेद रहे हैं। इटली नरम बजट नीति चाहता है, जबकि जर्मनी लंबे समय से खर्च में सख्ती का समर्थक रहा है। फिर भी हाल के दिनों में यहां भी कुछ नजदीकी दिखी है। मेलोनी ने इटली में खर्च घटाया है, जबकि मर्ज ने जर्मनी में बुनियादी ढांचे और रक्षा पर कर्ज लेकर खर्च बढ़ाने की मंजूरी दी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह गठजोड़ काफी हद तक राजनीतिक मजबूरी और आपसी फायदे पर टिका है। इटली की मेलोनी और जर्मनी के मर्ज, दोनों ने अपनी घरेलू राजनीति में बदलाव किए हैं, जिससे वैचारिक तौर पर वे एक-दूसरे के करीब आए हैं। हालांकि पूर्व राजनयिक स्टेफानो स्टेफानिनी चेतावनी देते हैं,“यह गठबंधन रणनीतिक से ज्यादा तात्कालिक है। हर मुद्दे पर दोनों हमेशा साथ नहीं रहेंगे। मेलोनी ने समझ लिया है कि जब फ्रांस और जर्मनी के बीच तनाव है, तो जर्मनी के करीब जाने का यह सही वक्त है।” ———————————— जर्मनी से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… हिटलर के बाद सबसे ताकतवर सेना बनाने में जुटा जर्मनी:युवाओं को ₹2.5 लाख महीने का ऑफर, ट्रम्प का धोखा और पुतिन से डर इसकी वजह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जर्मनी ने लंबे समय तक सैन्य ताकत से दूरी बनाए रखी, लेकिन अब उसने सेना पर खर्च बढ़ा दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक जर्मन सरकार यूरोप की सबसे ताकतवर सेना बनाने के मिशन पर निकल चुकी है। युवाओं को सेना में लाने के लिए करीब ₹2.5 लाख महीने तक का ऑफर दिया जा रहा है। रूस के बढ़ते खतरे और ट्रम्प के दौर में अमेरिका से टूटते भरोसे ने जर्मनी को यह एहसास दिला दिया है कि अब अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उसे खुद ही उठानी होगी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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