राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अन्य जिलों में गुरुवार को भी तेज बारिश का दौर जारी रहा। इस बीच मौसम विभाग ने आज (शुक्रवार) को रायपुर, दुर्ग, धमतरी, कोरिया, बालोद, बलौदाबाजार, सरगुजा समेत 26 जिलों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। छत्तीसगढ़ में 1 जून से अब तक 349.9 मि.मी. औसत बारिश दर्ज की जा चुकी है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में अब तक रायगढ़ जिले में सबसे ज्यादा 501.9 मि.मी. वर्षा रिकॉर्ड की गई है। बेमेतरा जिले में सबसे कम 167.3 मि.मी. बारिश दर्ज हुई है। अगले 4 से 5 दिन बारिश की तीव्रता में कमी का अनुमान मौसम विभाग की माने तो अगले चार से पांच दिन बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है। इससे पहले गुरुवार दोपहर को रायपुर में घने बादलों के कारण दोपहर 3 बजे ही अंधेरा छा गया। बिलासपुर में सड़कों, दुकानों और गलियां में पानी भर गया। एक घंटे की बरसात में लोगों के घरों में भी पानी घुसने लगा। शिवनाथ नदी में बाढ़ का खतरा राजनांदगांव में लगातार बारिश के बाद शिवनाथ नदी का जलस्तर बढ़ता जा रहा है। जिससे 4 जलाशयों से कुल 36 हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। मोंगरा बैराज से 20 हजार क्यूसेक, घुमरिया नाला बैराज से 10,800 क्यूसेक, सूखा नाला बैराज से 5,200 क्यूसेक और खातू टोला बैराज से 600 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। 16 पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार कर रहे ग्रामीण कांकेर जिले में 4 गांवों के लिए बारिश मुसीबत बन गई है। ग्रामीणों को आवागमन के लिए नदी पर बने स्टॉप डेम का सहारा लेना पड़ता है। वे 16 पिलरों पर कूद-कूदकर नदी पार कर रहे हैं, जिसका वीडियो सामने आया है। स्कूली बच्चों को भी इसी खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ता है। जिला मुख्यालय से 45 किलोमीटर दूर बांसकुंड, ऊपर तोनका, नीचे तोनका और चलाचूर गांव के 500 से अधिक लोग बारिश की वजह से परेशान हैं। यहां चिनार नदी पर पुल नहीं बना है। ग्रामीण डैम के पिलरों को कूद-कूदकर नदी पार करने को मजबूर हैं। बारिश की ये तस्वीरें देखिए लंबा रह सकता है मानसून मानसून के केरल पहुंचने की सामान्य तारीख 1 जून है। इस साल 8 दिन पहले यानी 24 मई को ही केरल पहुंच गया था। मानसून के लौटने की सामान्य तारीख 15 अक्टूबर है। अगर इस साल अपने नियमित समय पर ही लौटता है तो मानसून की अवधि 145 दिन रहेगी। इस बीच मानसून ब्रेक की स्थिति ना हो तो जल्दी आने का फायदा मिलता सकता है। जानिए इसलिए गिरती है बिजली दरअसल, आसमान में विपरीत एनर्जी के बादल हवा से उमड़ते-घुमड़ते रहते हैं। ये विपरीत दिशा में जाते हुए आपस में टकराते हैं। इससे होने वाले घर्षण से बिजली पैदा होती है और वह धरती पर गिरती है। आकाशीय बिजली पृथ्वी पर पहुंचने के बाद ऐसे माध्यम को तलाशती है जहां से वह गुजर सके। अगर यह आकाशीय बिजली, बिजली के खंभों के संपर्क में आती है तो वह उसके लिए कंडक्टर (संचालक) का काम करता है, लेकिन उस समय कोई व्यक्ति इसकी परिधि में आ जाता है तो वह उस चार्ज के लिए सबसे बढ़िया कंडक्टर का काम करता है। जयपुर में आमेर महल के वॉच टावर पर हुए हादसे में भी कुछ ऐसा ही हुआ। आकाशीय बिजली से जुड़े कुछ तथ्य जो आपके लिए जानना जरूरी आकाशीय बिजली से जुड़े मिथ
