थाईलैंड की टूरिस्ट सिटी पटाया में एक भारतीय टूरिस्ट के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। लोकल मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 27 दिसंबर की रात एक भारतीय नागरिक पर कुछ ट्रांसजेंडर महिलाओं ने हमला किया। आरोप है कि पर्यटक ने मसाज के बदले पैसा देने से इनकार कर दिया था। यह घटना कैमरे में रिकॉर्ड हो गई और इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इसमें तीन ट्रांसजेंडर महिलाएं 52 साल भारतीय नागरिक राज जसूजा से पैसे की मांग कर रही हैं। जब उसने भुगतान से इनकार किया और कार से वहां से निकलने की कोशिश की, तो विवाद बढ़ गया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांसजेंडर महिलाओं ने आरोप लगाया कि जसूजा ने पैसे देने से मना कर दिया। इसके बाद उन्होंने जसूजा को कार से बाहर खींचा गया और उसकी पिटाई की। बाद में इमरजेंसी रेस्क्यू टीम ने उन्हें बचाया।
जसूजा के चेहरे और सिर में चोट लगी। उन्हें इलाज के लिए पट्टामाकुन अस्पताल ले जाया गया। थाई पुलिस ने कहा है कि जसूजा के पूरी तरह ठीक होने के बाद उनसे औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को कहा जाएगा। इसके बाद मामले की जांच थाई कानून के तहत की जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… ट्रम्प ने लिस्ट जारी कर बताया अमेरिका में रहने वाले किस के कितने प्रवासी सरकारी मदद पर निर्भर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक लिस्ट शेयर की। इसमें बताया गया है कि अमेरिका में रहने वाले किस देश के कितने प्रवासी सरकारी मदद के भरोसे हैं। इस लिस्ट में पाकिस्तान, बांग्लादेश, चीन, नेपाल और भूटान जैसे देशों का नाम शामिल है, लेकिन भारत का नाम इसमें नहीं है। यह लिस्ट ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर डाली है। इसमें दुनिया के लगभग 120 देशों और इलाकों के प्रवासियों से जुड़ा डेटा दिया गया है। इस चार्ट में यह दिखाया गया है कि अमेरिका में रहने वाले किसी खास देश के कितने% प्रवासी परिवार सरकारी मदद लेते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले बांग्लादेशी प्रवासी सबसे ज्यादा सरकारी मदद पर निर्भर हैं। करीब 54.8% बांग्लादेशी परिवार किसी न किसी तरह की सहायता लेते हैं। इसके बाद यूक्रेन के 42.7%, पाकिस्तान के 40.2% और नेपाल के 34.8% प्रवासी परिवार इस लिस्ट में आते हैं। चीन के लगभग 32.9% प्रवासी परिवार भी अमेरिका की वेलफेयर योजनाओं का लाभ लेते हैं। इस पूरी लिस्ट में भारत का नाम नहीं होना खास बात मानी जा रही है। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि भारतीय मूल के लोग अमेरिका में आमतौर पर पढ़े-लिखे और अच्छी कमाई करने वाले माने जाते हैं। साल 2023 में भारतीय मूल के परिवारों की औसत सालाना आय लगभग 1.51 लाख डॉलर रही। ईरान में पुलिस की गोलीबारी से 4 की मौत, 30 शहरों में महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन ईरान में महंगाई के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन 7वें दिन भी जारी रहे। पश्चिमी ईरान में 3 जनवरी को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़पों में 4 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए। नॉर्वे के एक मानवाधिकार संगठन हेंगॉ के मुताबिक, इलाम प्रांत के मालेकशाही इलाके में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की। इसमें ईरान के कुर्द समुदाय के 4 लोगों की मौत हो गई। दो और लोगों की मौत की जांच की जा रही है। ईरान के सरकारी मीडिया के मुताबिक, इन झड़पों के दौरान एक रिवोल्यूशनरी गार्ड की भी मौत हुई। यह घटना तब हुई जब प्रदर्शनकारियों ने एक पुलिस स्टेशन में घुसने की कोशिश की थी। ईरान के लगभग 30 शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं। अब तक झड़पों में 12 लोगों की मौत हो चुकी है। ये विरोध प्रदर्शन पिछले हफ्ते तेहरान के बाजार में व्यापारियों की हड़ताल के बाद शुरू हुए थे, जो बाद में दूसरे इलाकों और कॉलेजों तक फैल गए। UN ने ईरान के लोगों से हिंसा न करने की अपील की है। नाइजीरिया में हथियारबंद गिरोह ने गांव पर हमला किया, 30 से ज्यादा लोगों की मौत नाइजीरिया के उत्तरी हिस्से में स्थित नाइजर राज्य के एक गांव में हुए भीषण हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हो गई। कई ग्रामीणों को हथियारबंद हमलावर अगवा कर ले गए। यह जानकारी स्थानीय पुलिस के हवाले से समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) ने दी है। यह इलाका लंबे समय से हिंसा, अपहरण और असुरक्षा की समस्या से जूझ रहा है। यह हमला शनिवार शाम कसुवान-दाजी गांव में हुआ, जो नाइजर राज्य के बोरगू स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्र में आता है। पुलिस के मुताबिक, भारी हथियारों से लैस हमलावर अचानक गांव में घुस आए और लोगों पर अंधाधुंध गोलियां चलानी शुरू कर दीं। हमलावरों ने गांव के बाजार और कई घरों में आग लगा दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत और भारी तबाही फैल गई। नाइजर राज्य पुलिस के प्रवक्ता वासिउ अबियोदुन ने कहा कि हालात पर काबू पाने और अगवा किए गए लोगों की तलाश के लिए सुरक्षा बलों को इलाके में भेजा गया है। हालांकि, गांव के लोगों का कहना है कि रविवार तक उनके इलाके में कोई भी सुरक्षा बल नहीं पहुंचा था। इससे स्थानीय लोगों में डर के साथ-साथ नाराजगी भी है। पुलिस ने जहां कम से कम 30 लोगों की मौत की पुष्टि की है, वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या इससे कहीं ज्यादा है। गांव के कम से कम दो लोगों ने बताया कि अब तक 37 लोगों की मौत हो चुकी है और यह आंकड़ा और बढ़ सकता है, क्योंकि कई लोग अब भी लापता हैं। अगवा किए गए लोगों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल बताए जा रहे हैं। कोंटागोरा डायोसिस के कैथोलिक चर्च के प्रवक्ता रेवरेन्ड फादर स्टीफन कबीरेट ने कहा कि हमले में 40 से ज्यादा लोगों की जान गई और कई बच्चों समेत अन्य लोगों का अपहरण किया गया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हमलावरों को हमले से करीब एक हफ्ते पहले आसपास के इलाकों में देखा गया था, लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस सुरक्षा कदम नहीं उठाए गए। हमले के बाद गांव के लोग इतने डरे हुए हैं कि वे शवों को उठाने तक गांव में लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं। एक ग्रामीण ने बताया कि हमला करीब तीन घंटे तक चला। पुलिस का कहना है कि हमलावर संभवतः पास के नेशनल पार्क के जंगलों से आए थे, जो अब हथियारबंद गिरोहों के सुरक्षित ठिकाने बन चुके हैं। उत्तर कोरिया ने जापान के इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल दागीं, टोक्यो ने इमरजेंसी अलर्ट जारी किया उत्तर कोरिया ने रविवार को जापान के इलाके में बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। जापान के पीएम ऑफिस ने इसे लेकर एक इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। स्थानीय समाचार संगठन द जापान टाइम्स ने रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के बयान के हवाले से बताया कि उत्तर कोरिया ने कम से कम दो मिसाइलें दागी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, ये दोनों मिसाइलें जापान के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के बाहर गिरीं। जापान का यह विशेष आर्थिक क्षेत्र उसके तट से 200 नॉटिकल मील यानी करीब 370 किलोमीटर तक फैला हुआ है और मिसाइलें जापान सागर में गिरीं। इसी रिपोर्ट में रक्षा मंत्री कोइजुमी के हवाले से आगे कहा गया,“उत्तर कोरिया की बार-बार की जा रही बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्च जैसी कार्रवाइयां हमारे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं।” चीन बोला- अमेरिका मादुरो को तुरंत रिहा करे:राष्ट्रपति को अगवा करना गलत; उत्तर कोरिया भी वेनेजुएला के समर्थन में, कहा- अमेरिका गुंडागर्दी कर रहा चीन ने अमेरिका से वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तुरंत रिहा करने की मांग की है। दोनों इस समय अमेरिका की हिरासत में हैं। अमेरिकी सेना उन्हें कल वेनेजुएला की राजधानी काराकास से पकड़कर अमेरिका ले गई थी। चीनी विदेश मंत्रालय ने रविवार को जारी बयान में कहा कि राष्ट्रपति को इस तरह अपने देश ले जाना गलत है। इस मुद्दे का हल बातचीत से होना चाहिए। इससे पहले भी चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। उत्तर कोरिया ने वेनेजुएला में अमेरिका की कार्रवाई को गुंडागर्दी बताया है। उत्तर कोरियाई विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका की यह कार्रवाई किसी भी देश की आजादी और संप्रभुता पर किया गया सबसे गंभीर हमला है। अमेरिकी सैनिकों ने 2 जनवरी की रात वेनेजुएला पर हमला कर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को अगवा कर लिया था। इसके बाद उन्हें न्यूयॉर्क लाया गया है, जहां उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। उन पर हथियार-ड्रग्स से जुड़े मामलों में मुकदमा चलाया जाएगा। अधिकारी ने यह भी दावा किया कि मिसाइलों ने करीब 950 किलोमीटर की दूरी तय की। इसका मतलब यह है कि दक्षिणी जापान का बड़ा हिस्सा इनकी मारक दूरी में आ जाता है, जिसमें अमेरिका और जापान की सेल्फ-डिफेंस फोर्सेज के अहम सैन्य अड्डे भी शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर…
