सिंगापुर के एक प्रीमियम अस्पताल में काम कर रहे एक भारतीय नर्स को पुरुष विजिटर से छेड़छाड़ करने के आरोप में एक साल दो महीने की जेल और दो कोड़ों की सजा सुनाई गई है। 34 वर्षीय एलीपे सिवा नागु नामक नर्स ने जून महीने में रैफल्स अस्पताल में एक पुरुष विजिटर के साथ यह हरकत की थी। अदालत में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। पीड़ित व्यक्ति 18 जून को नॉर्थ ब्रिज रोड स्थित अस्पताल में अपने दादा से मिलने गया था। शाम करीब 7:30 बजे जब वह मरीजों के लिए बने टॉयलेट में गया, तो नर्स एलीपे वहां झांकने लगा। उसने पीड़ित से कहा कि वह उसे डिसइंफेक्ट (साफ-सफाई) करना चाहता है और इसी बहाने उसने साबुन अपने हाथ पर लगाकर उसके साथ छेड़छाड़ की। पीड़ित उस समय सदमे में था और डर के कारण कुछ बोल नहीं पाया। बाद में वह अपने दादा के पास लौट गया। मामला 21 जून को दर्ज कराया गया और आरोपी को दो दिन बाद गरफ्तार कर लिया गया। अदालत ने शुक्रवार को सुनवाई के बाद एलीपे को एक साल दो महीने की जेल और दो कोड़ों की सजा सुनाई। अस्पताल प्रबंधन ने घटना के बाद उसे नौकरी से निलंबित कर दिया था। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… भारत ने UNSC में पाकिस्तान से कहा- POK में मानवाधिकारों का उल्लंघन बंद करे संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि परवथनेनी हरीश ने पाकिस्तान से कहा कि अवैध कब्जे वाले कश्मीर (POK) में मानवाधिकारों का उल्लंघन बंद करे। हरीश ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में 80वें संयुक्त राष्ट्र दिवस के मौके पर हुई बहस में कहा, हम पाकिस्तान से कहना चाहते हैं कि वह अपने अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में जारी मानवाधिकार उल्लंघनों को तुरंत रोके, जहां लोग उसकी सैन्य कब्जे, दमन, अत्याचार और संसाधनों के दोहन के खिलाफ खुलकर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। हरीश ने कहा “जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश था है और हमेशा भारत का हिस्सा रहेगा। यहां के लोग भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक ढांचे के अनुसार अपने मौलिक अधिकारों का उपयोग करते हैं। पाकिस्तान के लिए ऐसे सिद्धांत बिल्कुल अजनबी हैं।” हरीश ने संयुक्त राष्ट्र के योगदानों का जिक्र करते हुए कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह संगठन शांति और सुरक्षा की उम्मीद के प्रतीक के रूप में उभरा। गौरतलब है कि 24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर लागू हुआ था, जिसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) की आधिकारिक स्थापना हुई थी। थाईलैंड की राजमाता सिरिकिट का निधन, 93 साल की उम्र में ली अंतिम सांस थाईलैंड की राजमाता सिरिकिट का शुक्रवार को निधन हो गया। वे 93 वर्ष की थीं। रॉयल हाउसहोल्ड ब्यूरो के मुताबिक सिरिकिट ने बैंकॉक के एक अस्पताल में अंतिम सांस ली। 17 अक्टूबर से उन्हें ब्लड इंफेक्शन की समस्या थी और इलाज के बावजूद उनकी हालत में सुधार नहीं हुआ। पिछले कुछ सालों से उनकी तबीयत ठीक नहीं थी और वे सार्वजनिक जीवन से दूर थीं। उनके पति राजा भूमिबोल अदुल्यादेज का निधन अक्टूबर 2016 में हुआ था। उन्होंने ग्रामीण गरीबों की मदद, पारंपरिक हस्तशिल्प को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए कई परियोजनाओं की शुरुआत की थी। 88वें जन्मदिन पर उनके बेटे, राजा महा वजिरालोंगकोर्न और अन्य शाही सदस्य उन्हें अस्पताल में देखने पहुंचे थे। उनका जन्मदिन 12 अगस्त देशभर में मदर्स डे के रूप में मनाया जाता है। सिरिकिट कितियाकारा का जन्म 12 अगस्त 1932 को बैंकॉक के एक समृद्ध कुलीन परिवार में हुआ था। उनके माता-पिता दोनों का संबंध थाईलैंड के वर्तमान चक्री वंश के पूर्व राजाओं से था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वे अपने पिता के साथ फ्रांस चली गईं, जहां उनके पिता राजदूत थे। वहीं उन्होंने 16 साल की उम्र में राजा भूमिबोल से मुलाकात की। राजा के एक सड़क हादसे में घायल होने के बाद वे उनकी देखभाल के लिए स्विट्जरलैंड चली गईं। वहीं दोनों के बीच प्यार पनपा। 1950 में दोनों ने शादी कर ली थी। उन्होंने 1976 में SUPPORT फाउंडेशन की स्थापना की, जो गरीब परिवारों को पारंपरिक कला जैसे रेशम बुनाई, गहना निर्माण, पेंटिंग और मिट्टी के बर्तन बनाने की ट्रेनिंग देती थी। पर्यावरण के क्षेत्र में काम करने के कारण उन्हें ग्रीन क्वीन भी कहा गया। ———————————— 24 अक्टूबर से जुड़े अपडेट्स यहां पढ़ें…
