जावेद ने दिखाने के लिए परीक्षा का फार्म भरवाया और खुद के इंस्टिट्यूट पर परीक्षा भी दिलवा दी। इसके बाद उसने फर्जी मार्कशीट बनाकर दे दी। पासपोर्ट बनाने के दो साल बाद विदेश मंत्रालय ने पत्र भेजकर कहा मार्कशीट तो फर्जी है। मुश्तकीम ने बचने के लिए पासपोर्ट वापस जमा करवा दिया।
