रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया गया है। वर्ष 2004 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी संजीव शुक्ला को रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे आईजी, बिलासपुर रेंज के रूप में सेवाएं दे रहे थे। वहीं श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा रायपुर ग्रामीण की SP बनाई गई हैं। अमित तुकाराम कांबले (IPS-2009) को कांकेर से अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, रायपुर नगरीय बनाया गया है। रायपुर SSP डॉ लाल उमेद सिंह को जशपुर भेजा गया है। जशपुर SSP शशिमोहन सिंह को रायगढ़ भेज दिया गया है। इसी आदेश के तहत रामगोपाल गर्ग (IPS-2007) को दुर्ग रेंज से स्थानांतरित कर बिलासपुर रेंज आईजी बनाया गया है। अभिषेक शांडिल्य (IPS-2007) को राजनांदगांव रेंज से दुर्ग रेंज आईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा बालाजी राव सोमावर (IPS-2007), जो अब तक पुलिस मुख्यालय रायपुर में कानून व्यवस्था संभाल रहे थे, उन्हें आईजी, राजनांदगांव रेंज नियुक्त किया गया है। इसके अलावा 24 और पुलिस अधिकारियों के तबादले हुए हैं। देखिए ट्रांसफर लिस्ट- रायपुर कमिश्नरी में DCP की नियुक्ति रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद नगरीय पुलिस ढांचे को मजबूत करते हुए पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर पर अहम नियुक्तियां की गई हैं। इसके तहत वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी उमेश प्रसाद गुप्ता को पुलिस उपायुक्त (मध्य) रायपुर, संदीप पटेल को पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रायपुर और मयंक गुर्जर को पुलिस उपायुक्त (उत्तर) रायपुर नगरीय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विकास कुमार (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल) और राजनाला स्मृतिक (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (क्राइम और साइबर) रायपुर नगरीय नियुक्त किया गया है। वहीं ईशु अग्रवाल (IPS-2022), जो अब तक नगर पुलिस अधीक्षक, आजाद चौक रायपुर थे, उन्हें पुलिस सहायक आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय पदस्थ किया गया है। आधे जिले पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू रायपुर के आधे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम आज यानी 23 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है। रायपुर के 21 थाने कमिश्नर और 12 थाने SP संभालेंगे। गृह विभाग ने इसे लेकर बुधवार शाम नोटिफिकेशन जारी किया गया था। रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने के लिए शहर की पुलिस फोर्स को 2 हिस्सों में बांटा गया। भोपाल-इंदौर मॉडल की तर्ज पर कमिश्नरेट सिस्टम लागू कमिश्नरेट सिस्टम लागू होने से पहले यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि इसे पूरे जिले में लागू किया जाएगा। ये अटकलें तब और तेज हो गईं जब गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस सिस्टम के लिए अपना समर्थन जताया। गृहमंत्री विजय शर्मा ने यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के सामने पेश किया था। इस मामले पर 21 जनवरी को हुई कैबिनेट मीटिंग में चर्चा होनी थी, लेकिन IAS लॉबी के विरोध के कारण इस मुद्दे पर चर्चा नहीं हुई। हालांकि बाद में लॉबी भोपाल और इंदौर मॉडल की तर्ज पर कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने पर सहमत हो गई। उसी के अनुसार फैसला लिया गया। 2 अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाने होंगे वहीं IPS लॉबी कमिश्नरेट सिस्टम को लागू करने को फेलियर बताया था, क्योंकि इसे पूरे जिले में लागू नहीं किया गया है। नाम न बताने की शर्त पर डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बताया था कि अधूरे सिस्टम के लिए दो अलग-अलग स्ट्रक्चर बनाने होंगे। डिपार्टमेंट के पास इन स्ट्रक्चर को बनाने के लिए न तो मैनपावर है और न ही रिसोर्स। नतीजतन जिले पर दो अधिकारियों का कंट्रोल होने से कमिश्नरेट सिस्टम जिले के लिए सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा। कमिश्नरी सिस्टम जिले के लिए खानापूर्ति साबित होगा। सीमा को मनमाने ढंग से बांटा गया IPS अधिकारियों के मुताबिक जब जिले में कमिश्नरेट और पुलिसिंग सेटअप को एक साथ लागू किया गया, तो दोनों की सीमाएं तय की गईं। हालांकि, सीमाओं का यह बंटवारा मनमाने ढंग से किया गया था। इससे IPS लॉबी में नाराजगी देखने को मिली थी। विभागीय अधिकारियों ने ग्रामीण इलाका होने के बावजूद उरला इलाके को कमिश्नरी के अंदर दिया गय। इसको देने के पीछे तर्क है, कि पंचायत एरिया पर नियंत्रण लग सके। इन्हीं अफसरों ने मुजगहन, समेत 10 थानों को ग्रामीण थाने में शिफ्ट किया है। यहां की पंचायतों से अफसरों को मतलब नहीं है। कमेटी की बात की भी अनदेखी एडीजी प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता वाली कमेटी ने भी रायपुर के क्षेत्रफल, जनसंख्या और क्राइम रेट के आधार पर पूरे जिले में कमिश्नरी सिस्टम लागू करने का प्रस्ताव भेजा था, क्योंकि रायपुर जिला इतना बड़ा नहीं हैं, जहां पुलिस की दो तरह की व्यवस्था रहे। उन्होंने भुवनेश्वर के कमिश्नरी सिस्टम की अनुशंसा की है। लेकिन उनके प्रस्ताव पर आज तक कोई चर्चा नहीं हुई। न ही गृह विभाग से कमेटी को बुलाकर रिपोर्ट पर जानकारी ली गई और चर्चा की गई। एक थाने में 30 बल, 75 की जरूरत रायपुर में पुलिसिंग के लिए कम से कम 75 का स्टाफ होना चाहिए। जबकि वर्तमान में थानों में औसतन 30 से 35 का बल है। अब मौजूदा बल का भी बंटवारा होगा, जिससे फील्ड में फोर्स की कमी आएगी। जिले में दो तरह की पुलिसिंग और अधिकारियों की संख्या बढ़ने पर थानों में बल कम होगा और अधिकारियों के दफ्तरों में कर्मचारियों की संख्या बढ़ेगी। रायपुर जिले में 7500 से अधिक पुलिस बल की जरूरत बताई जा रही है। …………………………… इससे जुड़ी खबर भी पढ़ें… रायपुर के 90% लोग चाहते हैं कमिश्नरी सिस्टम लागू हो:लोग बोले- पुलिस को पूरे अधिकार दिए जाएं; IG रैंक के अधिकारी होंगे कमिश्नर छत्तीसगढ़ राज्य का पहला और देश का 87वां पुलिस कमिश्नरी सिस्टम 11 दिन बाद 23 जनवरी से रायपुर में लागू होने वाला है। इसे लेकर दैनिक भास्कर ने एक सर्वे किया है। सर्वे में शामिल 90 फीसदी लोगों का कहना है कि पुलिस कमिश्नरी सिस्टम पूरे रायपुर जिले में लागू होना चाहिए। एक ही जिले में दो तरह की पुलिसिंग होने से अपराध बढ़ेगा और आम लोगों को भी दिक्कत होगी। पढ़ें पूरी खबर…
