क्लीनिक संचालक निर्मल गुप्ता ने 600 रुपये शुल्क लेकर बिना आवश्यक जांच के एनएस की बोतल चढ़ाई तथा उसमें पालीबियोन, एसीलार व डेक्सोना नामक तीन इंजेक्शन मिलाए। बोतल चढ़ने के तुरंत बाद जितेंद्र को घबराहट व बेचैनी होने लगी। उसने स्वयं बोतल हटाने की मांग की, लेकिन चिकित्सक ने उसे अनदेखा कर दिया और “डाॅक्टर मैं हूं” कहते हुए इलाज जारी रखा।
