10 हजार मजदूरों के रोजगार पर संकट:औद्योगिक गैस संकट से फैब्रिकेशन उद्योगों में 50% तक उत्पादन घटा

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पश्चिम एशिया में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव और ईरान-अमेरिका युद्ध की स्थिति का असर अब जिले के उद्योगों पर साफ दिखने लगा है। औद्योगिक उपयोग की कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति बाधित होने से कई छोटे और मध्यम उद्योगों में उत्पादन 50 से 70 प्रतिशत तक घट गया है। स्थिति यह है कि कई इकाइयां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं और सैकड़ों श्रमिकों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। उद्योग संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई तो बड़ी संख्या में फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ेगा। 5 मार्च के बाद से कमर्शियल गैस की सप्लाई में कटौती का सबसे ज्यादा असर फोर्जिंग और इंजीनियरिंग उद्योगों पर पड़ा है। फोर्जिंग आधारित करीब 40 कारखानों में मशीनें पूरी क्षमता से नहीं चल पा रही हैं, जबकि कई इकाइयों को उत्पादन रोकना पड़ा है। गैस की कमी के कारण ऑक्सीजन उत्पादन भी लगभग 75 प्रतिशत तक प्रभावित हुआ है, जिससे जिले के करीब 400 छोटे-मध्यम उद्योगों पर सीधा असर पड़ा है। भिलाई औद्योगिक क्षेत्र में लगभग 50 फैब्रिकेशन, 150 इंजीनियरिंग और करीब 200 केमिकल उद्योग संचालित हैं। इनमें फैब्रिकेशन उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। बड़े फैब्रिकेशन कारखानों में रोज 150 से 200 औद्योगिक सिलेंडर की खपत होती है, जबकि टूल ब्रिजिंग और माइनर कटिंग इकाइयों में भी रोजाना 50 सिलेंडर तक की जरूरत पड़ती है। सप्लाई बाधित होने से करीब आधे उद्योग बंद होने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। उत्पादन ठप होने से इन उद्योगों में कार्यरत करीब 10 हजार श्रमिकों के पलायन और बेरोजगारी का खतरा बढ़ गया है। कई औद्योगिक इकाइयों में काम घटने से कर्मचारियों की शिफ्ट कम कर दी गई है, जबकि कुछ स्थानों पर मजदूरों को जबरन छुट्टी पर भेजा जा रहा है। यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो बड़ी संख्या में श्रमिकों की नौकरी पर संकट आ सकता है। उद्यमियों का कहना है कि यदि जल्द गैस की नियमित आपूर्ति शुरू नहीं हुई तो उत्पादन ठप होने के साथ बड़े पैमाने पर श्रमिकों की छंटनी तय है, जिसका असर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर रूप से पड़ेगा। 1850 का औद्योगिक सिलेंडर, 3800 रुपए तक बेचा जा रहा
गैस की कमी का फायदा उठाकर कुछ जगहों पर औद्योगिक सिलेंडरों में गैस ट्रांसफर कर ऊंचे दामों पर बेची जा रही है। 19 किलो का औद्योगिक सिलेंडर सामान्यतः 1850 रुपए में मिलता था, वही अब लगभग 3800 रुपए में बेचा जा रहा है। कीमत बढ़ने से उद्योगों की लागत बढ़ गई है और उत्पादन पर असर पड़ रहा है। डिजॉवल्व एसिटिलीन विकल्प, पर महंगी और सीमित
उद्योगों में एलपीजी की कमी के बीच डीए यानी डिजॉवल्व एसिटिलीन गैस को विकल्प माना जा रहा है, लेकिन यह एलपीजी से 8-10 प्रतिशत महंगी है। रायपुर की केवल एक-दो इकाइयों में ही इसका उत्पादन होता है, जिससे पर्याप्त आपूर्ति संभव नहीं है। ऐसे में उद्योगों के सामने उत्पादन जारी रखना बड़ी चुनौती बना हुआ है। शासन को जल्द निर्णय लेना होगा, अन्यथा कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो सकती हैं। छत्तीसगढ़ शासन हमेशा उद्योगों को प्राथमिकता देता रहा है, इसलिए गैस आपूर्ति में सहयोग जरूरी है। उन्होंने उद्यमियों से संयम रखने की अपील की और उम्मीद जताई कि जल्द समाधान निकलकर उत्पादन फिर सामान्य होगा।
केके झा, अध्यक्ष एमएसएमई जिला उद्योग संघ

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